बिना OTP दिए खातों से लाखों रुपये गायब
साइबर ठगी के मामलों में अब सिर्फ OTP या बैंकिंग जानकारी हासिल करना ही ठगों का तरीका नहीं रह गया है। आगरा में सामने आए दो मामलों में पीड़ितों का कहना है कि उन्होंने किसी को OTP, UPI PIN, पासवर्ड या अन्य बैंकिंग जानकारी नहीं दी, इसके बावजूद उनके खातों से करीब 6.02 लाख रुपये निकल गए।
पुलिस ने दोनों मामलों में शिकायत के आधार पर जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि रकम किस तकनीकी माध्यम से निकाली गई, इसका पता डिजिटल साक्ष्यों और लेनदेन की जांच के बाद चलेगा।
पहला मामला: रिटायर्ड रेलवे अधिकारी के खाते से 4.35 लाख
पहला मामला सेवानिवृत्त रेलवे अधिकारी शेर सिंह से जुड़ा है। उनके मुताबिक, उनके बैंक खाते से दो ट्रांजेक्शन के जरिए कुल 4.35 लाख रुपये निकाले गए।
रिपोर्ट के अनुसार, रात करीब 9:24 बजे 3.96 लाख रुपये और तीन मिनट बाद करीब 39 हजार रुपये की निकासी हुई। शेर सिंह ने घटना की जानकारी मिलने के बाद साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराई। मामले में FIR भी दर्ज की गई है।
हालांकि, इस मामले को लेकर अलग-अलग रिपोर्टों में मोबाइल हैक होने की आशंका और APK फाइल से जुड़ी जानकारी सामने आई है। पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक तकनीकी तरीका क्या था।
दूसरा मामला: तीन बैंक खातों से 1.67 लाख रुपये निकले
दूसरा मामला शाहगंज के आलोक नगर निवासी सुमित सक्सेना और उनकी पत्नी से जुड़ा है। उनके तीन बैंक खातों से कुल 1.67 लाख रुपये निकाले गए।
रिपोर्ट के अनुसार—
- SBI खाते से ₹90,000
- ICICI बैंक खाते से ₹50,000
- Canara Bank खाते से ₹27,000
पीड़ित का कहना है कि उन्होंने किसी को OTP, UPI PIN, पासवर्ड या कोई संदिग्ध लिंक साझा नहीं किया था। उन्होंने मोबाइल या बैंकिंग सिस्टम में किसी तरह की सेंध की आशंका जताई है।
ATM और AEPS से निकासी की भी जांच
इस मामले में शुरुआती जानकारी के मुताबिक करीब 27 हजार रुपये ATM से निकाले जाने की बात सामने आई है। वहीं करीब 30 हजार रुपये AEPS यानी Aadhaar Enabled Payment System के जरिए निकाले जाने का आरोप है।
पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन लेनदेन के लिए किस डिवाइस, खाते या पहचान का इस्तेमाल किया गया और रकम आखिर कहां पहुंची।
ठग मोबाइल में कैसे सेंध लगा सकते हैं?
साइबर अपराधी कई तरीकों से मोबाइल और डिजिटल खातों तक पहुंच बनाने की कोशिश करते हैं। इनमें फर्जी APK फाइल, संदिग्ध लिंक, नकली ऐप, फिशिंग और कभी-कभी रिमोट-एक्सेस जैसे तरीके शामिल हैं।
आगरा में हाल ही में ग्रीन गैस मीटर अपडेट और CRN नंबर देखने के नाम पर APK फाइल भेजकर दो लोगों से 11.51 लाख रुपये की ठगी का मामला भी सामने आया था। पुलिस ने लोगों को अनजान APK फाइल डाउनलोड नहीं करने की सलाह दी है।
सिर्फ OTP पर निर्भर रहना काफी नहीं
OTP बैंकिंग सुरक्षा की एक महत्वपूर्ण परत है, लेकिन फोन या डिवाइस के साथ छेड़छाड़ होने पर जोखिम केवल OTP तक सीमित नहीं रहता। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर ऐप डाउनलोड करना, APK इंस्टॉल करना या रिमोट-एक्सेस देना भी खतरनाक हो सकता है।
विशेषज्ञों और पुलिस की सलाह है कि बैंकिंग से जुड़े काम हमेशा बैंक के आधिकारिक ऐप या वेबसाइट से ही करें।
ठगी से बचने के लिए क्या करें?
साइबर अपराध से बचने के लिए इन बातों का ध्यान रखें:
- ❌ अनजान नंबर से भेजी गई APK फाइल इंस्टॉल न करें
- ❌ किसी को OTP, UPI PIN, CVV या पासवर्ड न बताएं
- ❌ बैंक/KYC/बिजली/गैस कनेक्शन के नाम पर आए संदिग्ध लिंक पर क्लिक न करें
- ❌ किसी अनजान व्यक्ति को मोबाइल का रिमोट एक्सेस न दें
- ✅ मोबाइल में अनजान ऐप दिखे तो तुरंत जांच करें
- ✅ बैंक खाते में संदिग्ध लेनदेन दिखते ही बैंक को सूचना दें
- 📞 साइबर ठगी होने पर तुरंत 1930 पर शिकायत करें
पुलिस कर रही है जांच
आगरा पुलिस ने दोनों मामलों में जांच शुरू कर दी है। पुलिस लेनदेन का डिजिटल रिकॉर्ड, बैंकिंग चैनल और संभावित डिवाइस एक्सेस की जानकारी खंगाल रही है।
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों मामलों में एक ही तकनीक या एक ही गिरोह शामिल है। जांच पूरी होने के बाद ही ठगी के वास्तविक तरीके और आरोपियों के बारे में स्थिति स्पष्ट होगी।
एक नजर में
- 📍 स्थान: आगरा, उत्तर प्रदेश
- 💰 दो मामलों में रकम: करीब ₹6.02 लाख
- 👨💼 पहला मामला: रिटायर्ड रेलवे अधिकारी, ₹4.35 लाख
- 👨👩👦 दूसरा मामला: दंपत्ति के तीन खातों से ₹1.67 लाख
- 🔐 OTP साझा करने से इनकार: दोनों मामलों में
- 📱 जांच का फोकस: मोबाइल, बैंकिंग सिस्टम और लेनदेन का तकनीकी विश्लेषण
- 🚨 साइबर हेल्पलाइन: 1930
निष्कर्ष
साइबर ठगी अब सिर्फ OTP हासिल करने तक सीमित नहीं है। आगरा के मामलों ने यह जरूर दिखाया है कि बिना OTP साझा किए भी बैंक खाते से अनधिकृत रकम निकल सकती है, लेकिन इसके पीछे इस्तेमाल तकनीक की पुष्टि पुलिस जांच के बाद ही होगी। इसलिए संदिग्ध APK, ऐप, लिंक और रिमोट-एक्सेस से बचना बेहद जरूरी है।