आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है। ChatGPT जैसे AI मॉडल से लेकर AI एजेंट्स और बड़े डेटा सेंटर तक, कंपनियां इस टेक्नोलॉजी में भारी निवेश कर रही हैं। लेकिन इस AI बूम का एक असर आम लोगों की जेब पर भी पड़ सकता है।

Zoho के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने हाल ही में चिंता जताई कि AI इंफ्रास्ट्रक्चर में बढ़ते निवेश से मेमोरी और अन्य टेक्नोलॉजी कंपोनेंट्स की मांग बढ़ रही है, जिसका असर स्मार्टफोन और लैपटॉप की लागत पर पड़ सकता है।


AI को चाहिए ज्यादा चिप और मेमोरी

आज के AI सिस्टम को चलाने के लिए बड़े पैमाने पर GPU, मेमोरी, स्टोरेज और अन्य सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की जरूरत होती है। AI कंपनियां और डेटा सेंटर ऑपरेटर इन कंपोनेंट्स की भारी मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं।

इस बढ़ती मांग के कारण टेक्नोलॉजी सप्लाई चेन पर दबाव बन रहा है। यही वजह है कि आने वाले समय में स्मार्टफोन और लैपटॉप बनाने वाली कंपनियों की लागत बढ़ सकती है।


भारत में फोन की कीमतों पर पहले से असर

भारत में भी स्मार्टफोन कंपनियों ने हाल के महीनों में कई मॉडलों की कीमतों में बदलाव किया है। रिपोर्ट के मुताबिक OnePlus, Samsung और OPPO ने अलग-अलग मॉडल्स की कीमतों में बढ़ोतरी की है। OnePlus ने पिछले नौ महीनों में पांचवीं बार और Samsung ने आठ महीनों में नौवीं बार कीमतों में बदलाव किया है।

Samsung Galaxy S25 की भारतीय कीमत में हाल ही में ₹12,000 की बढ़ोतरी की रिपोर्ट भी सामने आई है।


क्या आगे और महंगे होंगे फोन-लैपटॉप?

यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि हर स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमत निश्चित रूप से बढ़ेगी। कंपनियां लागत का कुछ हिस्सा खुद भी वहन कर सकती हैं या अलग-अलग मॉडल्स की कीमतों में अलग तरह से बदलाव कर सकती हैं।

लेकिन अगर AI डेटा सेंटर की मांग के कारण चिप और मेमोरी की सप्लाई पर लंबे समय तक दबाव बना रहता है, तो इसका असर उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स की कीमतों पर पड़ सकता है।


यानी AI जहां टेक्नोलॉजी को तेजी से आगे बढ़ा रहा है, वहीं इसका बढ़ता इंफ्रास्ट्रक्चर खर्च आने वाले दिनों में आपके स्मार्टफोन और लैपटॉप की कीमत भी बढ़ा सकता है।