नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI अब सिर्फ चैटबॉट या कंटेंट बनाने तक सीमित नहीं है। कैमरों और कंप्यूटर विजन सिस्टम की मदद से इंसानों और वस्तुओं की पहचान भी तेजी से की जा रही है। ऐसे में एक खास तरह की 'AI-proof' शर्ट चर्चा में है, जिसके डिजाइन में ही ऐसी तकनीक छिपी है जो AI की पहचान प्रणाली को भ्रमित करने की कोशिश करती है।


डिजाइन में छिपा है बड़ा राज

इस शर्ट पर बने पैटर्न देखने में सामान्य या फैशन डिजाइन जैसे लग सकते हैं, लेकिन इन्हें इस तरह तैयार किया जाता है कि कंप्यूटर विजन मॉडल तस्वीर में मौजूद व्यक्ति को सही तरीके से पहचानने में कठिनाई महसूस कर सके।

इसे आम तौर पर adversarial pattern या adversarial design जैसी तकनीकों से जोड़ा जाता है। ऐसे पैटर्न AI मॉडल द्वारा तस्वीर में पहचाने जाने वाले विजुअल संकेतों को प्रभावित कर सकते हैं।


इंसान को दिखे शर्ट, AI को कुछ और

मानव आंखों को शर्ट का डिजाइन सामान्य दिखाई दे सकता है, लेकिन AI सिस्टम तस्वीर को अलग तरीके से प्रोसेस करता है। विशेष पैटर्न कैमरे की इमेज में ऐसे विजुअल संकेत पैदा कर सकते हैं, जिससे ऑब्जेक्ट डिटेक्शन या व्यक्ति की पहचान करने वाले मॉडल की सटीकता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि शर्ट पहनते ही हर AI कैमरे से कोई व्यक्ति पूरी तरह गायब हो जाएगा। अलग-अलग कैमरे, मॉडल, दूरी, रोशनी और सॉफ्टवेयर के आधार पर परिणाम काफी अलग हो सकते हैं।


आखिर क्यों बनाई जा रही हैं ऐसी चीजें?

इस तरह की तकनीक के पीछे सबसे बड़ा मुद्दा प्राइवेसी है। आज सार्वजनिक स्थानों, दुकानों, ऑफिस और अन्य जगहों पर कैमरों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।

AI आधारित फेस रिकग्निशन और ऑब्जेक्ट डिटेक्शन के इस्तेमाल ने यह सवाल खड़ा किया है कि लोगों की तस्वीरों और पहचान का इस्तेमाल किस सीमा तक किया जाना चाहिए।

AI से पहचान छिपाने वाले कपड़े इसी बहस का एक तकनीकी जवाब माने जा सकते हैं।


क्या यह तकनीक पूरी तरह काम करती है?

नहीं, इसकी कोई 100% गारंटी नहीं है।

AI मॉडल लगातार बेहतर हो रहे हैं और एक डिजाइन जो किसी खास मॉडल को भ्रमित कर सकता है, जरूरी नहीं कि दूसरे मॉडल पर भी काम करे। कैमरे का एंगल, तस्वीर की क्वालिटी, कपड़े की स्थिति और रोशनी जैसे कारक भी परिणाम बदल सकते हैं।

इसलिए ऐसी शर्ट को पूर्ण सुरक्षा कवच के बजाय AI विजन सिस्टम के खिलाफ एक प्रयोगात्मक तकनीकी उपाय समझना ज्यादा सही होगा।


AI के दौर में बढ़ेगी प्राइवेसी की बहस

जैसे-जैसे AI कैमरों और निगरानी तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, वैसे-वैसे लोगों की डिजिटल प्राइवेसी को लेकर सवाल भी बढ़ेंगे।

एक तरफ कंपनियां AI को ज्यादा सटीक बनाने पर काम कर रही हैं, तो दूसरी तरफ शोधकर्ता और डिजाइनर ऐसी तकनीक विकसित कर रहे हैं जो AI सिस्टम की पहचान क्षमता को चुनौती दे सके।

यानी आने वाले समय में AI बनाम Privacy की यह तकनीकी लड़ाई और दिलचस्प हो सकती है।