संसद के मॉनसून सत्र के खत्म होने से ठीक पहले NEET पेपर लीक और छात्रों के प्रदर्शन को लेकर सियासी घमासान और तेज हो गया। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार इस मुद्दे पर सार्वजनिक रूप से प्रतिक्रिया देते हुए संसद में विस्तार से चर्चा के लिए तैयार होने की बात कही।
अमित शाह ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला को पत्र लिखकर विपक्ष के साथ विचार-विमर्श के बाद इस मुद्दे पर चर्चा कराने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि सरकार सभी पहलुओं पर चर्चा के लिए तैयार है और वह सदन में बैठकर विपक्ष की बात सुनने के साथ हर सवाल का जवाब देंगे।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने भी कहा कि सरकार चर्चा के लिए निर्धारित समय को बढ़ाने के लिए तैयार है। सरकार की ओर से इसे विपक्ष के सवालों का जवाब देने और गतिरोध खत्म करने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
हालांकि, विपक्ष की रणनीति इस बीच बदल चुकी थी। प्रदर्शन शुरू होने के बाद कांग्रेस लगातार मांग कर रही थी कि गृह मंत्री संसद में बयान दें और छात्रों से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो। लेकिन अब कांग्रेस ने अमित शाह के इस्तीफे की मांग को प्रमुख मुद्दा बना दिया है।
अमित शाह ने इतनी देर से क्यों बोला?
वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई के मुताबिक, गृह मंत्री की ओर से चर्चा की पेशकश काफी देर से आई। उनका तर्क है कि अगर सरकार तीन सप्ताह पहले ही चर्चा के लिए तैयार हो जाती, तो संसद में लंबे समय तक चले गतिरोध को शायद टाला जा सकता था।
वहीं, वरिष्ठ पत्रकार उर्मिलेश का मानना है कि आंदोलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार की छवि पर भी सवाल उठे और 20 जुलाई की पुलिस कार्रवाई के बाद अमित शाह भी विपक्ष के निशाने पर आ गए। उनके अनुसार, मॉनसून सत्र के अंतिम दौर में चर्चा की पेशकश सरकार की स्थिति को संभालने की कोशिश के रूप में भी देखी जा सकती है।
कांग्रेस ने रणनीति क्यों बदली?
कांग्रेस की शुरुआती मांग थी कि गृह मंत्री सदन में आकर छात्रों के प्रदर्शन और पुलिस कार्रवाई से जुड़े सवालों का जवाब दें। लेकिन सत्र के अंतिम चरण तक पहुंचते-पहुंचते विपक्ष ने अपना राजनीतिक दबाव बढ़ाने के लिए इस्तीफे की मांग को आगे कर दिया।
यही वजह है कि अब सवाल सिर्फ इस बात का नहीं है कि अमित शाह संसद में चर्चा के लिए तैयार हैं या नहीं, बल्कि यह भी है कि क्या देर से की गई चर्चा की पेशकश विपक्ष को स्वीकार होगी?
फिलहाल, सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना हुआ है और इस पूरे विवाद ने NEET, छात्र आंदोलन, पुलिस कार्रवाई और सरकार की जवाबदेही को लेकर नई राजनीतिक बहस छेड़ दी है।