बिहार में दो नए एयरपोर्ट के लिए 7,373 एकड़ जमीन जुटाएगी सरकार, 26 हजार से अधिक रैयतों पर असर

पटना, बिहार: राज्य में हवाई सेवाओं का विस्तार करने और बेहतर एयर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बिहार सरकार ने दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की जमीन जुटाने की प्रक्रिया तेज कर दी है। प्रस्तावित परियोजनाएं सारण जिले के सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में विकसित की जानी हैं। इन दोनों एयरपोर्ट के निर्माण के लिए कुल 7,373 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। इस प्रक्रिया के दायरे में 26 हजार से अधिक रैयतों और उनकी जमीन के रिकॉर्ड आने की संभावना है।

राज्य सरकार की योजना के अनुसार, जमीन मालिकों से पहले सीधे खरीद के माध्यम से जमीन प्राप्त करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए जमीन के स्वामित्व, क्षेत्रफल, राजस्व रिकॉर्ड और संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाएगी। यदि जमीन मालिकों के साथ सहमति नहीं बनती है या किसी मामले में इसकी आवश्यकता पड़ती है, तो लागू कानूनी प्रावधानों के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

1. सोनपुर एयरपोर्ट के लिए 4,228 एकड़ जमीन की जरूरत

सारण जिले के सोनपुर में प्रस्तावित ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए लगभग 4,228 एकड़ जमीन जुटाने की योजना है। इस परियोजना के लिए सोनपुर और दरियापुर अंचल के करीब 26 मौजों को चिह्नित किया गया है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, इस क्षेत्र में लगभग 14,224 रैयत और उनकी जमाबंदियां परियोजना के दायरे में आएंगी।

सोनपुर एयरपोर्ट का निर्माण पूरा होने पर सारण और आसपास के क्षेत्रों के लोगों को हवाई यात्रा के लिए बेहतर विकल्प मिलने की संभावना है। इससे पटना और अन्य शहरों तक पहुंचने के विकल्पों का भी विस्तार हो सकता है। हालांकि, एयरपोर्ट के निर्माण, संचालन और उड़ानों की शुरुआत की समयसीमा विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तथा आगे की स्वीकृतियों पर निर्भर करेगी।

2. भागलपुर-मुंगेर एयरपोर्ट के लिए 3,145 एकड़ जमीन

दूसरी परियोजना भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित अजगैबीनाथ धाम ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट से संबंधित है। इसके लिए लगभग 3,145 एकड़ जमीन की आवश्यकता बताई गई है। परियोजना के अंतर्गत करीब 14 मौजों की जमीन चिह्नित की गई है और लगभग 12 हजार रैयतों के प्रभावित होने का अनुमान है।

इस परियोजना से भागलपुर, सुल्तानगंज, मुंगेर और आसपास के क्षेत्रों में हवाई कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है। क्षेत्र में व्यापार, पर्यटन, धार्मिक यात्रा और आर्थिक गतिविधियों को भी लाभ मिल सकता है। विशेष रूप से सुल्तानगंज स्थित अजगैबीनाथ धाम जैसे धार्मिक स्थलों तक आने-जाने वाले यात्रियों के लिए भविष्य में आवागमन के नए विकल्प विकसित हो सकते हैं।

3. किन इलाकों में जुटाई जाएगी जमीन?

सोनपुर एयरपोर्ट के लिए सारण जिले के सोनपुर और दरियापुर अंचल में जमीन चिह्नित की गई है। वहीं, भागलपुर-मुंगेर एयरपोर्ट परियोजना के लिए भागलपुर सदर, सुल्तानगंज, मुंगेर सदर, तारापुर और बरियारपुर अंचलों के संबंधित भूखंड प्रस्तावित हैं।

इन इलाकों में जमीन की मापी, स्वामित्व की पुष्टि और राजस्व रिकॉर्ड का मिलान महत्वपूर्ण होगा। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि किस जमीन का वास्तविक मालिक कौन है, जमीन का क्षेत्रफल कितना है और उस पर किसी प्रकार का विवाद या अन्य कानूनी बाधा तो नहीं है।

प्रस्तावित एयरपोर्ट की जमीन में कृषि भूमि के साथ आबादी वाले हिस्से, बाग-बगीचे और अन्य संरचनाएं भी शामिल हो सकती हैं। कुछ इलाकों में दियारा क्षेत्र की जमीन भी चिह्नित की गई है। ऐसे में जमीन की प्रकृति और मौजूदा उपयोग का सर्वेक्षण प्रक्रिया का अहम हिस्सा होगा।

4. पहले सीधे खरीद, फिर जरूरत पड़ने पर अधिग्रहण

बिहार सरकार जमीन जुटाने के लिए बिहार रैयती भूमि क्रय नीति, 2020 के तहत सीधे खरीद के विकल्प को प्राथमिकता देने की योजना बना रही है। इसका उद्देश्य जमीन मालिकों से बातचीत करके आपसी सहमति के आधार पर जमीन प्राप्त करना है।

इसके लिए संबंधित रैयती भूमि क्रय समितियां और सक्षम प्राधिकारी जमीन की कीमत तय करने की प्रक्रिया में भूमिका निभाएंगे। प्रस्तावित सलाहकार एजेंसी जमीन की संयुक्त मापी, दस्तावेजों की जांच, स्वामित्व सत्यापन, खरीद प्रक्रिया, रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन जैसे कामों में प्रशासनिक सहयोग करेगी।

जमीन की कीमत तय करने का अंतिम अधिकार संबंधित सक्षम प्राधिकार और निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार काम करने वाली समितियों के पास रहेगा। सलाहकार एजेंसी की भूमिका प्रक्रिया को सुचारू बनाने तक सीमित होगी।

यदि किसी जमीन मालिक के साथ सहमति नहीं बनती है, तो संबंधित कानूनों के अनुसार भूमि अधिग्रहण का विकल्प अपनाया जा सकता है। हालांकि, प्रत्येक भूखंड के लिए लागू प्रक्रिया और मुआवजे का निर्धारण संबंधित दस्तावेजों तथा कानूनी प्रावधानों के आधार पर होगा।

5. 26 हजार से अधिक रैयतों पर क्या पड़ेगा असर?

दोनों एयरपोर्ट परियोजनाओं के लिए जमीन जुटाने की प्रक्रिया से 26 हजार से अधिक रैयत प्रभावित हो सकते हैं। सोनपुर परियोजना में लगभग 14,224 रैयतों का अनुमान है, जबकि भागलपुर-मुंगेर परियोजना में करीब 12 हजार रैयतों की जमीन शामिल हो सकती है।

जमीन मालिकों के लिए सबसे महत्वपूर्ण विषय जमीन की सही पहचान, स्वामित्व की पुष्टि, जमीन का मूल्य और भुगतान की प्रक्रिया होगी। जिन लोगों की जमीन परियोजना के दायरे में आती है, उन्हें अपने राजस्व रिकॉर्ड, जमाबंदी, रजिस्ट्री और अन्य जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित रखना उपयोगी होगा।

जमीन की कीमत और भुगतान की शर्तों को लेकर संबंधित विभाग की आधिकारिक सूचना महत्वपूर्ण होगी। किसी भी रैयत को अपनी जमीन के संबंध में अंतिम निर्णय लेने से पहले संबंधित सक्षम प्राधिकारी से जानकारी प्राप्त करनी चाहिए।

यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि जमीन चिह्नित होने का अर्थ हर मामले में तत्काल अधिग्रहण या जमीन का हस्तांतरण पूरा हो जाना नहीं है। इसके लिए सर्वेक्षण, स्वामित्व सत्यापन, खरीद या अधिग्रहण की प्रक्रिया और अन्य आवश्यक औपचारिकताएं पूरी करनी होंगी।

6. बिहार को नए एयरपोर्ट से क्या लाभ मिलने की उम्मीद है?

बिहार में नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट विकसित करने का उद्देश्य राज्य की हवाई कनेक्टिविटी को मजबूत करना है। वर्तमान में हवाई यात्रा के लिए यात्रियों को उपलब्ध एयरपोर्ट और उनके उड़ान नेटवर्क पर निर्भर रहना पड़ता है। नए एयरपोर्ट बनने से भविष्य में अधिक क्षेत्रों को हवाई सेवाओं से जोड़ने की संभावना पैदा हो सकती है।

इन परियोजनाओं से पर्यटन, धार्मिक यात्राओं, व्यापार और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। एयरपोर्ट के निर्माण के दौरान भी संबंधित क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे, परिवहन और अन्य सहायक सेवाओं के विकास की जरूरत बढ़ सकती है।

हालांकि, इन संभावित लाभों का वास्तविक प्रभाव एयरपोर्ट की क्षमता, निर्माण की प्रगति, एयरलाइंस की सेवाओं, यात्री मांग और सड़क संपर्क जैसी सुविधाओं पर निर्भर करेगा।

7. आगे क्या होगी प्रक्रिया?

दोनों प्रस्तावित एयरपोर्ट के लिए जमीन की मापी और स्वामित्व सत्यापन सहित भूमि जुटाने की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। इसके लिए सलाहकार एजेंसी की नियुक्ति तथा जमीन से संबंधित रिकॉर्ड तैयार करने पर काम किया जा रहा है।

आगे की प्रक्रिया में संबंधित जमीन की पहचान, दस्तावेजों की जांच, जमीन मालिकों से बातचीत, कीमत तय करना और निर्धारित नियमों के अनुसार खरीद या अधिग्रहण शामिल हो सकता है। इसके साथ ही परियोजना की विस्तृत योजना, आवश्यक मंजूरियों और निर्माण से संबंधित अन्य औपचारिकताओं को भी पूरा करना होगा।

निष्कर्ष: बिहार में सोनपुर और भागलपुर-मुंगेर क्षेत्र में प्रस्तावित दो नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट के लिए कुल 7,373 एकड़ जमीन जुटाने की योजना है। इससे 26 हजार से अधिक रैयतों की जमीन प्रभावित होने का अनुमान है। सरकार पहले सीधे खरीद और आपसी सहमति का रास्ता अपनाना चाहती है, जबकि जरूरत पड़ने पर कानूनी अधिग्रहण किया जा सकता है। अब जमीन के सर्वेक्षण, स्वामित्व सत्यापन, कीमत निर्धारण और परियोजना की आगे की मंजूरियों पर नजर रहेगी।