बोतलबंद पानी को लेकर क्यों बढ़ी चिंता?

पानी की बोतल को सुविधाजनक और सुरक्षित विकल्प माना जाता है, खासकर यात्रा, ऑफिस और बाहर रहने के दौरान। लेकिन वैज्ञानिक शोधों ने बोतलबंद पानी में मौजूद बेहद छोटे प्लास्टिक कणों की ओर ध्यान खींचा है।

Columbia University और Rutgers University के शोधकर्ताओं ने एक नई लेजर-आधारित तकनीक से बोतलबंद पानी के नमूनों का विश्लेषण किया। अध्ययन में प्रति लीटर पानी में औसतन लगभग 2.4 लाख प्लास्टिक कण पाए गए। इनमें करीब 90 प्रतिशत कण नैनोप्लास्टिक श्रेणी के थे।

माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक क्या हैं?

माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के ऐसे छोटे टुकड़े होते हैं जिनका आकार 5 मिलीमीटर या उससे कम होता है। नैनोप्लास्टिक इससे भी छोटे कण होते हैं, जिनका आकार 1 माइक्रोमीटर से कम हो सकता है। इतने छोटे कण सामान्य आंखों से दिखाई नहीं देते और इन्हें पहचानने के लिए विशेष वैज्ञानिक उपकरणों की जरूरत पड़ती है।

पानी में प्लास्टिक के कण आते कहां से हैं?

शोधकर्ताओं के अनुसार, बोतल और पानी को शुद्ध करने की प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक फिल्टर, दोनों संभावित स्रोत हो सकते हैं। PET प्लास्टिक बोतलों में इस्तेमाल होता है, जबकि कुछ अन्य प्लास्टिक जल-शुद्धिकरण प्रक्रिया में प्रयुक्त होते हैं। बोतल को दबाने, गर्मी के संपर्क में आने या ढक्कन बार-बार खोलने-बंद करने से भी कुछ कण पानी में पहुंच सकते हैं।

क्या नैनोप्लास्टिक से बीमारी हो सकती है?

यह सवाल महत्वपूर्ण है, लेकिन उपलब्ध शोध से किसी व्यक्ति में बीमारी होने का सीधा निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। वैज्ञानिकों ने नैनोप्लास्टिक के शरीर में प्रवेश करने और कोशिकाओं तथा ऊतकों तक पहुंचने की संभावनाओं पर अध्ययन किया है। हालांकि, सामान्य जीवन में इनके सेवन से होने वाले दीर्घकालिक स्वास्थ्य प्रभावों और जोखिम की मात्रा को समझने के लिए अभी और शोध आवश्यक है।

इसलिए 2.4 लाख कणों के आंकड़े को तत्काल बीमारी या निश्चित स्वास्थ्य नुकसान का प्रमाण मानना सही नहीं होगा। यह अध्ययन प्लास्टिक कणों की मौजूदगी और उन्हें पहचानने की बेहतर तकनीक पर केंद्रित था।

रोजमर्रा में क्या सावधानी रख सकते हैं?

  1. पानी की बोतलों को लंबे समय तक तेज धूप या गर्म जगह पर रखने से बचें।
  2. बार-बार इस्तेमाल के लिए बनी साफ और सुरक्षित पानी की बोतल चुनें।
  3. घर में उपलब्ध सुरक्षित पेयजल और उचित तरीके से रखे गए फिल्टर पानी का उपयोग करें।
  4. एक बार इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक बोतलों को बार-बार इस्तेमाल करने से बचें।
  5. पानी की गुणवत्ता को लेकर संदेह हो तो स्थानीय जल-आपूर्ति या स्वास्थ्य विभाग की सलाह लें।

ये सामान्य सावधानियां हैं; इन्हें नैनोप्लास्टिक से पूरी सुरक्षा की गारंटी नहीं समझना चाहिए।

क्या बोतलबंद पानी पीना बंद कर देना चाहिए?

शोध के आधार पर सभी लोगों को बोतलबंद पानी तुरंत बंद करने की सलाह देना उचित नहीं है। सुरक्षित पेयजल तक पहुंच सबसे जरूरी है। जहां नल का पानी पीने योग्य नहीं है या उसकी गुणवत्ता की पुष्टि नहीं है, वहां केवल प्लास्टिक कणों की चिंता में असुरक्षित पानी पीना सही विकल्प नहीं होगा।

निष्कर्ष:

बोतलबंद पानी में माइक्रोप्लास्टिक और नैनोप्लास्टिक की मौजूदगी वैज्ञानिक शोध का महत्वपूर्ण विषय है। नई तकनीक से इनकी पहचान पहले से अधिक विस्तार से हो पा रही है, लेकिन इनके वास्तविक स्वास्थ्य प्रभावों पर अभी शोध जारी है। फिलहाल घबराने के बजाय सुरक्षित पानी, उचित भंडारण और प्लास्टिक के अनावश्यक इस्तेमाल को कम करने पर ध्यान देना बेहतर है।