ब्रासीलिया/साओ पाउलो: ब्राजील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला डा सिल्वा ने 25 अक्टूबर 2026 को हुए राष्ट्रपति चुनाव के दूसरे दौर में जीत हासिल कर देश की राजनीति में ऐतिहासिक वापसी की है। ब्राजील के सुपीरियर इलेक्टोरल कोर्ट के अनुसार, लूला को 51.79 प्रतिशत वैध वोट मिले, जबकि उनके प्रतिद्वंद्वी और सीनेटर फ्लावियो बोल्सोनारो को 48.21 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। इस जीत के साथ लूला चौथी बार, लेकिन गैर-लगातार कार्यकाल के लिए राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं।

ट्रंप की नीतियों के आलोचक हैं लूला

लूला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कई नीतियों और लैटिन अमेरिका में अमेरिकी प्रभाव बढ़ाने की कोशिशों के आलोचक रहे हैं। चुनावी जीत के बाद उन्होंने ब्राजील की स्वतंत्रता और संप्रभुता पर जोर देते हुए कहा कि देश किसी का पिछवाड़ा नहीं बनेगा और उसके भविष्य का फैसला ब्राजील के लोग ही करेंगे। लूला ने डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ भी बयान दिया। उनके इस रुख को अमेरिका के बढ़ते प्रभाव पर सवाल उठाने वाले लोगों के लिए एक अहम राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।

फ्लावियो बोल्सोनारो को मिली कड़ी चुनौती

फ्लावियो बोल्सोनारो पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के बेटे हैं और दक्षिणपंथी राजनीति से जुड़े हैं। चुनाव के पहले दौर में फ्लावियो ने लूला से अधिक वोट हासिल किए थे, लेकिन दूसरे दौर में लूला ने वापसी करते हुए जीत दर्ज की। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों के बीच लगभग 44 लाख वोटों का अंतर रहा। यह नतीजा ब्राजील की राजनीति में दोनों खेमों के बीच गहरे मतभेदों को भी दर्शाता है।

चुनाव परिणाम पर बोल्सोनारो ने उठाए सवाल

हार के बाद फ्लावियो बोल्सोनारो ने परिणाम स्वीकार नहीं किया और चुनाव रद्द कराने की मांग करने की बात कही। मतदान की निर्धारित अवधि समाप्त होने से ठीक पहले मतदान का समय दो घंटे बढ़ाए जाने के फैसले को लेकर विवाद सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार, दोनों उम्मीदवारों की ओर से मतदान समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया था, हालांकि बाद में इस फैसले पर सवाल उठाए गए। चुनाव अधिकारियों द्वारा घोषित नतीजों में लूला को स्पष्ट बढ़त मिली है।

लूला का नया कार्यकाल कब शुरू होगा?

आधिकारिक चुनावी घोषणा के अनुसार, लूला ने 64,256,232 वोट हासिल किए। उनका नया कार्यकाल 5 जनवरी 2027 से शुरू होने वाला है। इस जीत से लैटिन अमेरिका की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था में मौजूदा वामपंथी नेतृत्व जारी रहेगा। हालांकि, घरेलू अर्थव्यवस्था, महंगाई, सार्वजनिक सुरक्षा और अमेरिका के साथ व्यापारिक संबंधों जैसे मुद्दे आने वाले कार्यकाल में महत्वपूर्ण बने रहेंगे।

ब्राजील की राजनीति के लिए क्या मायने?

लूला की जीत ऐसे समय में आई है, जब लैटिन अमेरिका के कई देशों में दक्षिणपंथी नेताओं को चुनावी सफलता मिली है। ब्राजील के नतीजे से क्षेत्रीय राजनीति में अलग रुख कायम रहने की संभावना है। फिर भी, चुनाव परिणाम को केवल अमेरिका के पक्ष या विरोध के रूप में देखना पर्याप्त नहीं होगा—ब्राजील के मतदाताओं के फैसले में घरेलू आर्थिक और सामाजिक मुद्दों की भी भूमिका रही है।

निष्कर्ष: लूला डा सिल्वा की जीत ने ब्राजील में उनके नेतृत्व को एक और कार्यकाल दिया है। उनका संप्रभुता पर जोर और ट्रंप की नीतियों से असहमति अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बनी हुई है। वहीं, फ्लावियो बोल्सोनारो की ओर से नतीजे को चुनौती देने की बात के कारण चुनाव के बाद की राजनीतिक स्थिति पर भी नजर बनी रहेगी।

अस्वीकरण: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक चुनावी आंकड़ों और प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। राजनीतिक बयानों को संबंधित नेताओं के विचारों के रूप में प्रस्तुत किया गया है; आगे की कानूनी कार्रवाई या राजनीतिक घटनाक्रम में बदलाव संभव है।