बुंदेलखंड में दरबार लगाने वाले बाबाओं पर स्टिंग

मध्य प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में चमत्कार और समस्याओं का समाधान करने का दावा करने वाले कुछ बाबाओं को लेकर दैनिक भास्कर की एक अंडरकवर पड़ताल सामने आई है। रिपोर्ट के अनुसार, अखबार की इन्वेस्टिगेशन टीम ने करीब 30 दिन तक छतरपुर, सतना और उत्तर प्रदेश के महोबा में दरबार लगाने वाले छह बाबाओं की गतिविधियों की पड़ताल की।

रिपोर्टर अलग-अलग जगहों पर कभी श्रद्धालु, कभी मरीज तो कभी निवेशक बनकर पहुंचे। टीम के साथ एक कर्मकांडी पंडित भी थे, जिन्होंने बाबाओं से मंत्रों और शास्त्रों से जुड़े सवाल किए। रिपोर्ट में दावा किया गया कि कुछ बाबा इन सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं दे सके।

22 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की बात

रिपोर्ट के मुताबिक, अजयपाल बाबा के दरबार में रिपोर्टर ने निवेश करने की इच्छा जताई। इसके बाद सामुदायिक भवन में हुई बातचीत के दौरान बाबा ने कथित तौर पर हाईवे के पास मौजूद 22 एकड़ सरकारी जमीन पर धीरे-धीरे कब्जा करने की योजना बताई।

रिपोर्ट में बाबा के हवाले से कहा गया कि वहां गोशाला बनवाने के जरिए जमीन हासिल करने की कोशिश की जा सकती है। उन्होंने यह भी कथित तौर पर कहा कि दरबार में लोगों की मदद करने वाले लोग जरूरत पड़ने पर काम आएंगे।

ये बातें स्टिंग रिपोर्ट में दर्ज कथित बातचीत पर आधारित हैं। सरकारी जमीन पर कब्जे की किसी योजना या कार्रवाई की स्वतंत्र प्रशासनिक पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं दी गई है।

मंत्र और हनुमान चालीसा पर पूछे गए सवाल

पड़ताल के दौरान टीम के साथ गए कर्मकांडी पंडित ने एक बाबा से हनुमान चालीसा, राम स्तुति और ‘ॐ हं हनुमते नमः’ जैसे मंत्रों के बारे में पूछा। रिपोर्ट के अनुसार, बाबा इन सवालों का स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए।

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दरबार में 100 रुपये की पर्चियां बनाई जा रही थीं और भुगतान QR कोड के जरिए लिया जा रहा था।

बीमारी और भविष्य को लेकर किए कथित दावे

स्टिंग में रिपोर्टर ने कुछ काल्पनिक समस्याएं रखीं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक बाबा ने घर की तस्वीर देखकर कथित तौर पर मृत्यु और तंत्र-मंत्र से जुड़े दावे किए तथा 4,100 रुपये की जड़ी-बूटी वाली दवा लेने को कहा।

एक अन्य बातचीत में बाबा ने कथित तौर पर घर में दबे सोने की मात्रा बताई और नरबलि से संबंधित सवाल पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी की। इन दावों की कोई वैज्ञानिक पुष्टि रिपोर्ट में प्रस्तुत नहीं की गई है।

दूसरे दरबार में भी काल्पनिक समस्याओं की जांच

रिपोर्ट के अनुसार, ग्वाल बाबा के दरबार में टीम ने अलग-अलग लोगों को काल्पनिक समस्याओं के साथ भेजा। इनमें शादी में बाधा, तलाक, नींद न आना और नशे की लत जैसी बातें शामिल थीं।

रिपोर्ट में दावा किया गया कि दरबार में इन समस्याओं के लिए पर्चियां बनाई गईं और एक मामले में हवन कराने का प्रस्ताव भी दिया गया। कुछ दावों और उपायों की वास्तविकता की पुष्टि स्वतंत्र रूप से नहीं की गई है।

सोशल मीडिया से बढ़ रहा है दरबारों का प्रचार

पड़ताल में यह भी सामने आया कि कुछ बाबा अपने दरबारों का प्रचार सोशल मीडिया रील्स और वीडियो के जरिए करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, एक दरबार में यूट्यूब और इंस्टाग्राम के लिए कैमरामैन भी मौजूद रहता था।

धार्मिक आस्था व्यक्तिगत विषय है, लेकिन बीमारी के इलाज, भविष्यवाणी, चमत्कार या सरकारी जमीन पर अधिकार जैसे दावों को प्रमाण के आधार पर परखना जरूरी है। खासकर बीमारी या मानसिक परेशानी के मामलों में अप्रमाणित उपायों के भरोसे जरूरी चिकित्सा सहायता टालना नुकसानदेह हो सकता है।

क्या कहती है यह पड़ताल?

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट में सामने आए कथित संवादों ने कुछ बाबाओं के चमत्कार संबंधी दावों, धार्मिक ज्ञान और धन जुटाने के तरीकों पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, स्टिंग में दर्ज बातचीत अपने आप में किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक दोष सिद्ध नहीं करती। जमीन पर कब्जे, धोखाधड़ी या अन्य आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित प्रशासनिक जांच और कानूनी प्रक्रिया जरूरी होगी।

निष्कर्ष:

बुंदेलखंड में दरबार लगाने वाले छह बाबाओं पर की गई अंडरकवर पड़ताल में एक बाबा द्वारा 22 एकड़ सरकारी जमीन पर कब्जे की कथित योजना बताने और कुछ बाबाओं के चमत्कार संबंधी दावों पर सवाल उठाए गए हैं। फिलहाल ये निष्कर्ष स्टिंग रिपोर्ट में सामने आई बातचीत पर आधारित हैं; किसी कानूनी कार्रवाई या आरोप की आधिकारिक पुष्टि अलग से आवश्यक है।