ईरान को लेकर अमेरिका-चीन के रुख में अंतर
ईरान के मुद्दे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नीतिगत मतभेद सामने आए हैं। ट्रंप प्रशासन ईरान पर दबाव बनाए रखने और चीन की संभावित मदद रोकने पर जोर दे रहा है। दूसरी ओर, चीन युद्धविराम, कूटनीतिक बातचीत और क्षेत्रीय तनाव कम करने की मांग कर रहा है।
यह अंतर ऐसे समय सामने आया है जब दोनों नेताओं की 24 सितंबर को व्हाइट हाउस में मुलाकात हुई। अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू के मुताबिक, ट्रंप ने बैठक में शी जिनपिंग से स्पष्ट किया कि ईरान को चीन की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष सहायता अमेरिका को स्वीकार नहीं होगी।
ट्रंप की चिंता: ईरान को चीनी मदद
अमेरिकी राजदूत डेविड पर्ड्यू ने बताया कि वॉशिंगटन ने बीजिंग को पहले भी चेताया था कि ईरान को खुफिया जानकारी, सैन्य उपकरणों या उनके पुर्जों के जरिए सहायता देना स्वीकार्य नहीं होगा। उन्होंने कहा कि ट्रंप ने यह बात शी जिनपिंग के साथ बातचीत में फिर दोहराई।
यह अमेरिकी पक्ष का बयान है। इससे अपने आप यह साबित नहीं होता कि चीन ने ईरान को ऐसी सहायता दी है। चीन की ओर से इस विशेष आरोप पर विस्तृत सार्वजनिक प्रतिक्रिया की पुष्टि उपलब्ध रिपोर्ट में नहीं की गई है।
चीन का रुख: युद्धविराम और बातचीत
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने 16 सितंबर को ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बीजिंग में मुलाकात की थी। चीनी पक्ष के अनुसार, वांग यी ने अमेरिका और ईरान से संयम बरतने, इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन की ओर लौटने और बातचीत की प्रक्रिया फिर शुरू करने की अपील की।
बीजिंग ने यह भी कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोलना, अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा बनाए रखना और ऊर्जा आपूर्ति में स्थिरता सुनिश्चित करना जरूरी है। चीन ने क्षेत्रीय तनाव को यमन और लाल सागर तक फैलने से रोकने की अपील भी की।
चीन ईरान के साथ संबंध और अमेरिका से रिश्ते—दोनों को संतुलित करना चाहता है
विश्लेषकों के अनुसार, चीन के लिए ईरान के साथ आर्थिक और रणनीतिक संबंध महत्वपूर्ण हैं, लेकिन बीजिंग अमेरिका और खाड़ी देशों के साथ अपने व्यापक हितों को भी ध्यान में रखता है। इसलिए चीन का रुख ईरान को हर कीमत पर सैन्य समर्थन देने के बजाय कूटनीतिक और आर्थिक संबंध बनाए रखने पर केंद्रित दिखाई देता है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ने होर्मुज और लाल सागर में तनाव घटाने के लिए कूटनीतिक प्रयास किए हैं, लेकिन वह क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई के जरिए समुद्री मार्ग खोलने की भूमिका लेने को तैयार नहीं दिखा।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना अहम मुद्दा
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां तनाव बढ़ने से तेल और गैस की ढुलाई, शिपिंग लागत और अंतरराष्ट्रीय बाजारों पर असर पड़ सकता है। चीन ने इसे खुला और सुरक्षित रखने की अपील की है, जबकि अमेरिका ईरान पर दबाव और चीन की संभावित सहायता को लेकर अपनी चिंता जता रहा है।
क्या चीन और अमेरिका के बीच टकराव बढ़ेगा?
फिलहाल दोनों देशों के बीच ईरान को लेकर मतभेद स्पष्ट हैं, लेकिन इसे सीधे सैन्य टकराव की स्थिति कहना जल्दबाजी होगी। दोनों सरकारें इस मुद्दे पर अलग-अलग प्राथमिकताएं रखती हैं—अमेरिका ईरान पर दबाव और चीन की सहायता रोकने पर जोर देता है, जबकि चीन वार्ता, युद्धविराम और समुद्री मार्गों की सुरक्षा को प्राथमिकता बताता है।
निष्कर्ष:
ईरान के मामले में ट्रंप और शी जिनपिंग की सोच में मुख्य अंतर रणनीति का है। अमेरिका चीन को ईरान की संभावित मदद से रोकना चाहता है, जबकि चीन बातचीत और तनाव कम करने की पैरवी कर रहा है। दोनों नेताओं की हालिया बैठक में यह मुद्दा उठा, लेकिन किसी साझा समाधान की घोषणा नहीं हुई है।