नई दिल्ली: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के 5 सितंबर के प्रस्तावित दिल्ली मार्च को लेकर सरकार और प्रशासन की तैयारियां तेज हो गई हैं। CJP ने इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च का ऐलान किया है। पार्टी का आरोप है कि 25 जुलाई को युवाओं से किए गए आश्वासनों को अब तक पूरी तरह लागू नहीं किया गया है।
मार्च से पहले कानून-व्यवस्था पर फोकस
5 सितंबर को बड़ी संख्या में छात्रों और युवाओं के दिल्ली पहुंचने की संभावना के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती कानून-व्यवस्था बनाए रखना है।
सुप्रीम कोर्ट ने 31 अगस्त को मार्च पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई ठोस आधार नहीं है जिससे यह माना जाए कि प्रदर्शन से अनिवार्य रूप से अप्रिय घटना होगी। साथ ही प्रशासन को कानून-व्यवस्था बनाए रखने और प्रदर्शनकारियों को भी कानून के दायरे में शांतिपूर्ण तरीके से प्रदर्शन करने की जिम्मेदारी बताई गई है।
दिल्ली पुलिस की क्या तैयारी?
दिल्ली पुलिस ने बताया है कि उसे मार्च के लिए अनुमति का अनुरोध अभी प्राप्त नहीं हुआ है और अगर आवेदन आता है तो उसे नियमों के मुताबिक देखा जाएगा। ऐसे में पुलिस की ओर से रूट, भीड़ नियंत्रण और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर तैयारियां किए जाने की संभावना है।
इंडिया गेट और पुलिस मुख्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा सकती है।
सरकार से क्या चाहते हैं प्रदर्शनकारी?
CJP का कहना है कि 25 जुलाई को आंदोलन वापस लेते समय सरकार की ओर से छात्रों और प्रदर्शनकारियों से कई आश्वासन दिए गए थे। इनमें प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने का मुद्दा प्रमुख है। पार्टी का आरोप है कि इन मामलों में अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई।
इसके अलावा प्रदर्शनकारी NEET और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों, पुलिस कार्रवाई और छात्रों की मांगों पर भी जवाबदेही चाहते हैं।
5 सितंबर को कौन-कौन होगा शामिल?
CJP के मुताबिक मार्च में NEET से जुड़े मृत छात्रों के परिवार, कथित पुलिस कार्रवाई से प्रभावित परिवार, छात्र संगठन और युवा शामिल होंगे। पार्टी ने देशभर के युवाओं से दिल्ली पहुंचने की अपील की है।
AISA ने भी इस मार्च को समर्थन देने की घोषणा की है। संगठन ने छात्रों के खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने और कथित पेलेट व गोलीबारी की जांच की मांग की है।
सरकार के सामने दोहरी चुनौती
सरकार के सामने एक तरफ प्रदर्शनकारियों की मांगों और पुराने आश्वासनों पर जवाब देने का दबाव है, तो दूसरी तरफ राजधानी में किसी भी तरह की कानून-व्यवस्था की समस्या रोकने की चुनौती है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि सरकार 5 सितंबर से पहले प्रदर्शनकारियों की सभी मांगों पर कोई नया निर्णय लेगी या नहीं। लेकिन सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासन को अब प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा और व्यवस्था सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान देना होगा।