कॉफी और सेहत के बीच क्या है संबंध?
सुबह की कॉफी कई लोगों की दिनचर्या का हिस्सा है। अब शोध में इसके संभावित स्वास्थ्य लाभों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालिया अध्ययनों में कॉफी पीने और मेटाबॉलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीएटोटिक लिवर डिजीज (MASLD), जिसे आम तौर पर फैटी लिवर कहा जाता है, तथा लिवर कैंसर के कम जोखिम के बीच संबंध पाया गया है। हालांकि इन अध्ययनों से यह साबित नहीं होता कि कॉफी पीने से बीमारी निश्चित रूप से रुक जाती है।
फैटी लिवर को लेकर क्या कहती है रिसर्च?
2026 में प्रकाशित एक अध्ययन में प्रतिभागियों की कॉफी पीने की आदतों और स्वास्थ्य संबंधी आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसमें बिना चीनी वाली कॉफी पीने वालों में MASLD का जोखिम कॉफी न पीने वालों की तुलना में कम पाया गया। अध्ययन में यह संबंध खास तौर पर बिना चीनी वाली और कैफीनयुक्त कॉफी के सेवन के साथ देखा गया।
यूरोपीय लिवर और मेटाबॉलिक रोग विशेषज्ञ संस्थाओं के दिशानिर्देशों में भी बताया गया है कि कई ऑब्जर्वेशनल अध्ययनों में कॉफी पीने वालों में फैटी लिवर और लिवर फाइब्रोसिस का जोखिम कम देखा गया है। हालांकि, इस संबंध की पुष्टि के लिए अधिक उच्च गुणवत्ता वाले क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत है।
लिवर कैंसर के कम जोखिम से भी जुड़ी कॉफी
ब्रिटेन के UK Biobank के लगभग 3.55 लाख प्रतिभागियों पर आधारित 2026 के एक अध्ययन में कॉफी सेवन और लिवर स्वास्थ्य के बीच संबंध का विश्लेषण किया गया। करीब 13 साल के औसत फॉलो-अप में अधिक कॉफी पीने वालों में लिवर सिरोसिस, लिवर कैंसर और लिवर संबंधी मृत्यु का जोखिम कम पाया गया। शोध में कैफीन वाली और डिकैफ कॉफी, दोनों के साथ अनुकूल संबंध देखे गए।
हालांकि, यह एक ऑब्जर्वेशनल अध्ययन था। इसलिए इससे यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि कॉफी ही जोखिम कम होने का कारण थी। खानपान, जीवनशैली और अन्य स्वास्थ्य कारक भी परिणामों को प्रभावित कर सकते हैं।
क्या कॉफी दूसरे कैंसर से भी बचा सकती है?
World Cancer Research Fund के अनुसार, उपलब्ध शोध में कॉफी का सेवन लिवर और गर्भाशय के कैंसर के कम जोखिम से जुड़ा पाया गया है। कुछ अन्य कैंसरों के लिए भी संभावित संबंध सामने आए हैं, लेकिन वहां प्रमाण उतने मजबूत नहीं हैं। संस्था यह भी स्पष्ट करती है कि कैंसर से बचाव के लिए कॉफी पीने की कोई निश्चित मात्रा बताने की पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
कितनी कॉफी पीना सही है?
रिसर्च में अलग-अलग मात्रा और प्रकार की कॉफी का अध्ययन किया गया है। लेकिन इन नतीजों के आधार पर हर व्यक्ति के लिए रोजाना एक निश्चित मात्रा की सलाह देना उचित नहीं होगा। कॉफी में चीनी, क्रीम और सिरप मिलाने से अतिरिक्त कैलोरी और चीनी की मात्रा बढ़ सकती है। फैटी लिवर से जुड़े एक अध्ययन में बिना चीनी वाली कॉफी के साथ लाभकारी संबंध देखा गया, जबकि मीठी कॉफी के लिए ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला।
कॉफी के प्रति संवेदनशील लोगों को कैफीन से बेचैनी, नींद में परेशानी या धड़कन तेज होने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। अपनी सेहत, दवाओं और कैफीन सहनशीलता के अनुसार सेवन तय करना बेहतर है।
कॉफी को इलाज का विकल्प न समझें
फैटी लिवर या कैंसर से बचाव के लिए केवल कॉफी पर निर्भर रहना सही नहीं है। संतुलित आहार, नियमित शारीरिक गतिविधि, स्वस्थ वजन बनाए रखना और शराब से जुड़े जोखिमों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। जिन लोगों को पहले से लिवर की बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह और निर्धारित जांच जारी रखनी चाहिए।
निष्कर्ष:
रिसर्च कॉफी को लिवर स्वास्थ्य और कुछ कैंसरों के कम जोखिम से जोड़ती है। लेकिन यह संबंध बीमारी से पूर्ण सुरक्षा का प्रमाण नहीं है। कॉफी को संतुलित जीवनशैली का हिस्सा माना जा सकता है, इलाज या रोकथाम की गारंटी नहीं।