RTI से सामने आया चुनाव आयोग के भीतर विवाद

नई दिल्ली: भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) के भीतर अधिकारियों के कामकाज और निर्णय लेने की प्रक्रिया को लेकर विवाद सामने आया है। RTI के तहत प्राप्त दस्तावेजों से पता चला है कि दो चुनाव आयुक्तों ने एक वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ कैबिनेट सचिव से शिकायत की थी। हालांकि, कैबिनेट सचिवालय ने इस मामले में सीधे कार्रवाई करने के बजाय शिकायतों को स्वीकार करने और मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय को उनकी प्रतियां भेजने का निर्णय लिया।

यह मामला चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, आंतरिक निगरानी और एक संवैधानिक संस्था की स्वतंत्रता से जुड़े सवाल खड़े करता है।

किन चुनाव आयुक्तों ने की शिकायत?

दस्तावेजों के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने 29 जुलाई 2026 को कैबिनेट सचिव टी.वी. सोमनाथन को अलग-अलग पत्र लिखे थे।

उनकी शिकायतें वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग के कामकाज से संबंधित थीं। गर्ग को सितंबर 2024 में कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) के माध्यम से निर्वाचन आयोग में तैनात किया गया था।

दोनों आयुक्तों ने आरोप लगाया कि प्रशासनिक जिम्मेदारी संभालने के बाद गर्ग ने वरिष्ठ उप चुनाव आयुक्तों, उप चुनाव आयुक्तों, महानिदेशकों और समकक्ष अधिकारियों के बीच काम का बंटवारा बदलने के आदेश जारी किए। उनके मुताबिक, ये बदलाव आयोग या संबंधित अधिकारियों से पहले चर्चा किए बिना किए गए थे।

शिकायतों में यह भी कहा गया कि ऐसे निर्णयों से पहले चर्चा और मंजूरी लेने के संबंध में मौखिक तथा लिखित निर्देश दिए गए थे। विवेक जोशी ने यह आरोप भी लगाया कि प्रशासनिक विभाग ने उनके मांगने पर संबंधित फाइल उपलब्ध नहीं कराई।

कैबिनेट सचिवालय ने कार्रवाई क्यों नहीं की?

RTI से प्राप्त कैबिनेट नोट के अनुसार, सचिवालय ने शिकायतों को गंभीरता से लेने की बात कही, लेकिन यह भी माना कि दोनों आयुक्तों के पत्र व्यक्तिगत हैसियत में भेजे गए थे। वे पूरे निर्वाचन आयोग की ओर से जारी औपचारिक शिकायत नहीं थे।

कैबिनेट सचिवालय का तर्क था कि आयोग एक स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है। उसकी ओर से आधिकारिक शिकायत के बिना किसी अधिकारी के खिलाफ कार्यपालिका द्वारा कार्रवाई करना आयोग के कामकाज में हस्तक्षेप माना जा सकता है।

दस्तावेजों के मुताबिक, 3 अगस्त को तैयार एक नोट में मुख्य चुनाव आयुक्त की राय लेने का प्रस्ताव रखा गया था। इसके बाद 4 अगस्त के नोट में कार्रवाई की उपयुक्तता पर सवाल उठाए गए। अंततः 5 अगस्त को दोनों आयुक्तों को शिकायतें प्राप्त होने की सूचना भेजी गई और प्रतियां मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय तथा संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों को भेजी गईं।

मतदाता सूची और IT व्यवस्था से क्या है संबंध?

इस विवाद का एक महत्वपूर्ण पहलू निर्वाचन आयोग की तकनीकी व्यवस्था और मतदाता सूची के प्रबंधन से जुड़ा है।

सितंबर 2026 में प्रकाशित रिपोर्टों के अनुसार, काम के बंटवारे में प्रस्तावित बदलावों से मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और रिकॉर्ड अपडेट करने की प्रक्रिया पर केंद्रीय स्तर पर निगरानी बढ़ने की आशंका जताई गई थी। इससे राज्य और स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठे।

हालांकि, निर्वाचन आयोग ने 26 सितंबर को स्पष्ट किया था कि संबंधित अधिकारी के काम के पुनर्वितरण वाले आदेश दोनों चुनाव आयुक्तों के निर्देश के बाद लागू नहीं किए गए थे। आयोग ने यह भी कहा था कि मामला आयोग की नीति या IT विभाग से संबंधित नहीं, बल्कि प्रतिनियुक्ति पर आए एक अधिकारी के कामकाज से जुड़ा था।

कानून क्या कहता है?

मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 की धारा 18 के अनुसार, आयोग का कामकाज जहां तक संभव हो सर्वसम्मति से किया जाना चाहिए। मतभेद होने पर निर्णय बहुमत के आधार पर लिया जा सकता है।

कैबिनेट सचिवालय ने इसी प्रावधान का उल्लेख करते हुए कहा कि आयोग के काम और अधिकारियों के आचरण का नियमन उसके अपने नियमों और दिशानिर्देशों के तहत होना चाहिए।

दूसरी ओर, शिकायत करने वाले आयुक्तों का आरोप था कि बिना पूर्व चर्चा या मंजूरी के काम का बंटवारा बदलना स्थापित प्रक्रिया और संबंधित कानून के अनुरूप नहीं था। ये आरोप हैं; दस्तावेजों से अपने आप किसी कानूनी उल्लंघन का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकलता।

आगे क्या होगा?

RTI से सामने आए दस्तावेज यह स्पष्ट करते हैं कि दोनों चुनाव आयुक्तों ने शिकायतें भेजीं और कैबिनेट सचिवालय ने उन पर सीधे कार्रवाई नहीं की। हालांकि, उपलब्ध जानकारी से यह स्पष्ट नहीं है कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कार्यालय ने इन पत्रों पर आगे क्या निर्णय लिया या बाद में कोई अन्य कार्रवाई हुई या नहीं।

इस मामले में निर्वाचन आयोग की आंतरिक प्रक्रिया, संबंधित अधिकारी की भूमिका और शिकायतों पर की गई आगे की कार्रवाई महत्वपूर्ण बनी हुई है।

निष्कर्ष

दो चुनाव आयुक्तों की शिकायत और कैबिनेट सचिवालय की प्रतिक्रिया ने निर्वाचन आयोग के भीतर प्रशासनिक निर्णय लेने की प्रक्रिया और संवैधानिक स्वतंत्रता पर बहस को फिर सामने ला दिया है। RTI दस्तावेज शिकायतों और उन पर सरकारी प्रतिक्रिया का रिकॉर्ड देते हैं, लेकिन आरोपों की अंतिम सत्यता या आगे की कार्रवाई के बारे में निष्कर्ष निकालने के लिए अतिरिक्त आधिकारिक जानकारी जरूरी है।

अस्वीकरण: यह समाचार 22–23 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित रिपोर्टों और RTI के तहत सामने आए दस्तावेजों पर आधारित है। संबंधित अधिकारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों को स्वतंत्र रूप से सिद्ध तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।