आज 25 सितंबर 2026, शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी है और इसी के साथ 10 दिवसीय गणेशोत्सव का समापन हो रहा है। इस दिन देशभर में श्रद्धालु गणपति बप्पा को विदाई देते हैं। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की रात करीब 11:18 बजे शुरू हुई और 25 सितंबर की रात करीब 11:06 बजे तक रहेगी।
गणेश विसर्जन के लिए अलग-अलग शहरों में शुभ समय अलग हो सकता है। दिल्ली के पंचांग के अनुसार सुबह, दोपहर, शाम और रात में कई शुभ चौघड़िया उपलब्ध हैं। स्थानीय पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा।
घर पर भी कर सकते हैं मिट्टी की प्रतिमा का विसर्जन
अगर आपके पास प्राकृतिक मिट्टी की छोटी गणेश प्रतिमा है और नदी या निर्धारित विसर्जन स्थल तक जाना संभव नहीं है, तो घर पर ही साफ पानी से भरे बड़े पात्र में विसर्जन किया जा सकता है। प्रतिमा के पूरी तरह घुलने के बाद मिट्टी मिले पानी को पौधों या बगीचे की मिट्टी में इस्तेमाल किया जा सकता है।
हालांकि, प्लास्टर ऑफ पेरिस, प्लास्टिक या अन्य गैर-घुलनशील सामग्री की प्रतिमाओं को घर में घोलना उचित नहीं है। ऐसी प्रतिमाओं के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित विसर्जन व्यवस्था का पालन करें।
विसर्जन से पहले करें उत्तर पूजा
विसर्जन से पहले गणपति की अंतिम पूजा यानी उत्तर पूजा की जाती है। इसकी सामान्य विधि इस प्रकार है:
- पूजा स्थान को साफ करें और दीपक जलाएं।
- गणेशजी को फूल, दूर्वा, फल और मोदक/लड्डू अर्पित करें।
- धूप-दीप दिखाकर गणेश आरती करें।
- पिछले दिनों की पूजा में हुई किसी भी भूल के लिए क्षमा प्रार्थना करें।
- परिवार के साथ गणपति बप्पा से सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना करें।
- इसके बाद प्रतिमा को सम्मानपूर्वक विसर्जन के लिए ले जाएं।
कौन-सा मंत्र बोलें?
विसर्जन के दौरान सरल गणेश मंत्र का जाप किया जा सकता है:
“ॐ गं गणपतये नमः।”
इसके साथ श्रद्धालु “गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ” का जयकारा भी लगाते हैं।
क्षमा प्रार्थना के लिए यह श्लोक भी बोला जाता है:
“आवाहनं न जानामि, न जानामि विसर्जनम्।
पूजां चैव न जानामि, क्षमस्व परमेश्वर॥”
घर पर विसर्जन की आसान विधि
एक बड़े, साफ टब या बाल्टी में पर्याप्त पानी भरें। चाहें तो उसमें थोड़ा गंगाजल और फूल डाल सकते हैं। उत्तर पूजा पूरी करने के बाद गणेश प्रतिमा को दोनों हाथों से सम्मानपूर्वक जल में रखें। प्रतिमा को फेंकने के बजाय धीरे-धीरे जल में स्थापित करें।
जब मिट्टी पूरी तरह घुल जाए तो उस मिट्टी-पानी को पौधों या बगीचे में इस्तेमाल किया जा सकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
- विसर्जन से पहले उत्तर पूजा और आरती जरूर करें।
- प्रतिमा को पानी में पटकें या फेंकें नहीं।
- फूल-माला और अन्य पूजन सामग्री को जलाशयों में न डालें; नर्मदा/गंगा आदि जलस्रोतों को प्रदूषित करने से बचें।
- घर पर विसर्जन कर रहे हैं तो केवल प्राकृतिक मिट्टी की प्रतिमा को प्राथमिकता दें।
- बड़े सार्वजनिक विसर्जन के लिए स्थानीय प्रशासन द्वारा निर्धारित स्थान और सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
- पूजा की परंपराएं परिवार और क्षेत्र के अनुसार अलग हो सकती हैं, इसलिए अपने स्थानीय पंचांग/परंपरा के अनुसार मुहूर्त और विधि अपनाएं।
गणपति बप्पा मोरया! अगले बरस तू जल्दी आ!