वॉशिंगटन: दुनिया की अर्थव्यवस्था इस वक्त एक अजीब 'खींचतान' के दौर से गुजर रही है। IMF की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा के मुताबिक, एक तरफ ईरान युद्ध और होर्मुज संकट से पैदा हुआ ऊर्जा झटका वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, वहीं दूसरी तरफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में तेजी से बढ़ रहा निवेश विकास को सहारा दे रहा है।

जॉर्जीवा ने चेतावनी दी कि अर्थव्यवस्था ने अब तक संकट का सामना उम्मीद से बेहतर किया है, लेकिन 'संकट टल गया' मानकर निश्चिंत होने की कोई गुंजाइश नहीं है।


दुनिया किस 'भंवर' में फंसी है?

IMF के मुताबिक इस समय वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मुख्य रूप से ये दबाव हैं:

  1. ऊर्जा संकट और महंगा तेल
  2. लगातार ऊंचा सरकारी कर्ज
  3. महंगाई में कमी की रफ्तार का रुकना
  4. बढ़ती ब्याज दर और बॉन्ड यील्ड
  5. अमेरिका-चीन समेत व्यापारिक तनाव
  6. भू-राजनीतिक अनिश्चितता
  7. AI निवेश से जुड़ी संभावित बाजार अस्थिरता

जॉर्जीवा ने इसे दो विपरीत ताकतों के बीच 'टग ऑफ वॉर' यानी खींचतान बताया है—एक तरफ मध्य-पूर्व का नकारात्मक ऊर्जा झटका और दूसरी तरफ AI निवेश से मिलने वाला सकारात्मक आर्थिक प्रभाव।


तेल संकट से अभी पूरी तरह राहत नहीं

होर्मुज जलडमरूमध्य में लंबे समय तक बने व्यवधान ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को प्रभावित किया। हालांकि दुनिया के कई देशों ने रणनीतिक तेल भंडार का इस्तेमाल किया, गैर-खाड़ी देशों से ऊर्जा आपूर्ति बढ़ी और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में इजाफा हुआ। इसी वजह से IMF के अनुसार वैश्विक अर्थव्यवस्था ने ऊर्जा संकट का सामना अनुमान से बेहतर किया।

लेकिन IMF चीफ ने साफ चेतावनी दी है कि ऊर्जा संकट अभी खत्म नहीं हुआ है। अगर कच्चे तेल की कीमत दोबारा तेजी से बढ़ती है तो महंगाई फिर ऊपर जा सकती है और केंद्रीय बैंकों को ब्याज दरें लंबे समय तक ऊंची रखनी पड़ सकती हैं।


महंगाई फिर बन सकती है बड़ी समस्या

IMF के मुताबिक वैश्विक स्तर पर महंगाई कम होने की प्रक्रिया रुक गई है। जुलाई के अपडेट में IMF ने 2026 की वैश्विक हेडलाइन महंगाई का अनुमान 4.7% किया था। वहीं वैश्विक आर्थिक वृद्धि का अनुमान 3% रखा गया है।

अगर तेल और खाद्य कीमतों में फिर तेजी आती है, तो महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसका सीधा असर ब्याज दरों, कर्ज की लागत और आर्थिक गतिविधियों पर पड़ सकता है।


भारी कर्ज भी IMF की बड़ी चिंता

जॉर्जीवा ने दुनिया की सरकारों को अपने बजट घाटे और कर्ज को लेकर गंभीर होने की सलाह दी है। उनके मुताबिक सभी देशों को ऐसी विश्वसनीय वित्तीय योजनाएं बनानी चाहिए, जिनसे कर्ज और घाटे को टिकाऊ स्तर पर रखा जा सके।

हाल के दिनों में अमेरिका, जापान और यूरोप जैसे बड़े बाजारों में लंबी अवधि के सरकारी बॉन्ड की यील्ड बढ़ी है। इससे सरकारों, कंपनियों और आम लोगों के लिए उधार लेना महंगा हो सकता है।


AI बना अर्थव्यवस्था का 'सहारा'

इस पूरे संकट के बीच AI निवेश वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक ताकत बनकर उभरा है। अमेरिका में AI से जुड़े निवेश ने कॉरपोरेट कमाई और उपभोक्ता खर्च को सपोर्ट किया है। अब दूसरे देश भी डेटा सेंटर, AI हार्डवेयर और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश बढ़ा रहे हैं।

हालांकि IMF ने AI को लेकर भी सावधानी बरतने को कहा है। अगर AI कंपनियों की भविष्य की कमाई को लेकर बाजार की उम्मीदों में बड़ा बदलाव आता है, तो इससे वित्तीय बाजारों में तेज गिरावट का जोखिम पैदा हो सकता है।


भारत पर क्या असर?

भारत जैसी तेल आयात करने वाली अर्थव्यवस्था के लिए कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल चुनौती बन सकता है। महंगा तेल आयात बिल बढ़ा सकता है और महंगाई पर दबाव डाल सकता है। हालांकि IMF के जुलाई अनुमान में भारत की 2026 की आर्थिक वृद्धि को 6.4% बताया गया था।

भारत के लिए मजबूत घरेलू मांग और अपेक्षाकृत तेज आर्थिक वृद्धि सुरक्षा कवच का काम कर सकती है, लेकिन लंबे समय तक महंगा तेल और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों का सख्त रहना जोखिम बढ़ा सकता है।


IMF का साफ संदेश

IMF चीफ का संदेश फिलहाल यही है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था संकट से बाहर निकलने की राह पर जरूर है, लेकिन खतरे अभी खत्म नहीं हुए हैं। तेल कीमतों में फिर तेजी, महंगाई, बढ़ता सरकारी कर्ज और व्यापार तनाव दुनिया की अर्थव्यवस्था को दोबारा झटका दे सकते हैं।

दूसरी ओर, AI और तकनीकी निवेश वैश्विक ग्रोथ को नई गति दे सकते हैं। IMF के मुताबिक 2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर करीब 3% और 2027 में 3.4% रहने का अनुमान है।