चार दिन में कितना सस्ता हुआ सोना-चांदी?
सोने और चांदी की कीमतों में सितंबर के आखिरी सप्ताह में तेज उतार-चढ़ाव देखने को मिला। लगातार चार कारोबारी सत्रों में गिरावट के दौरान चांदी करीब ₹7,000 प्रति किलो और सोना करीब ₹2,500 प्रति 10 ग्राम सस्ता हुआ। 24 सितंबर को IBJA के अनुसार 999 शुद्धता वाला सोना करीब ₹1.51 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2.28 लाख प्रति किलो के आसपास पहुंच गई थी।
हालांकि, 25 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने में हल्की रिकवरी दिखाई दी। NDTV Profit के अनुसार इस दिन भारत में 24 कैरेट सोना करीब ₹1,51,580 प्रति 10 ग्राम और चांदी करीब ₹2,34,040 प्रति किलो बताई गई। शहर, समय और टैक्स/मेकिंग चार्ज के कारण खुदरा कीमत अलग हो सकती है।
आखिर क्यों गिर रहे हैं दाम?
सोने की हालिया कमजोरी के पीछे कई अंतरराष्ट्रीय कारण बताए जा रहे हैं।
1. मजबूत अमेरिकी डॉलर
डॉलर मजबूत होने पर डॉलर में कीमत वाले सोने और चांदी की खरीद दूसरे देशों के निवेशकों के लिए अपेक्षाकृत महंगी हो जाती है। Reuters के मुताबिक 25 सितंबर को डॉलर साप्ताहिक बढ़त की ओर था और सोना सप्ताह के दौरान करीब 2% नीचे था।
2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी
अमेरिकी Treasury yields के ऊंचे स्तर ने भी सोने पर दबाव बनाया है। सोना ब्याज नहीं देता, इसलिए जब बॉन्ड से मिलने वाला रिटर्न आकर्षक होता है तो कुछ निवेशकों के लिए सोने की तुलना में ब्याज देने वाली परिसंपत्तियां अधिक आकर्षक हो सकती हैं। Reuters ने 24 सितंबर को भी ऊंची Treasury yields को सोने की कमजोरी का एक कारण बताया था।
3. फेड की ब्याज दरों को लेकर उम्मीदें
अमेरिकी महंगाई और ब्याज दरों को लेकर बाजार की अपेक्षाएं भी बुलियन कीमतों को प्रभावित कर रही हैं। Reuters के अनुसार कुछ Fed अधिकारियों के संकेतों से बाजार में लंबे समय तक ऊंची दरों की आशंका बढ़ी है।
क्या गिरावट आगे भी जारी रहेगी?
इसका निश्चित जवाब देना संभव नहीं है। मौजूदा बाजार में दो विपरीत ताकतें काम कर रही हैं।
एक तरफ मजबूत डॉलर, ऊंची अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और अपेक्षाकृत सख्त मौद्रिक नीति सोने पर दबाव डाल सकती है। दूसरी तरफ मध्य-पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर समर्थन दे सकती है।
कुछ बाजार विश्लेषकों का मानना है कि हाल की गिरावट के बावजूद सोने के लिए लंबी अवधि के समर्थनकारी कारक मौजूद हैं। वहीं अन्य विश्लेषणों में निकट अवधि में कीमतों के अस्थिर और सीमित दायरे में रहने की संभावना बताई गई है।
चांदी में क्या होगा?
चांदी सोने की तुलना में अधिक अस्थिर हो सकती है क्योंकि इसकी कीमत पर निवेश मांग के साथ-साथ औद्योगिक मांग का भी असर पड़ता है। इसलिए डॉलर, ब्याज दरों, वैश्विक आर्थिक गतिविधि और औद्योगिक मांग में बदलाव चांदी की दिशा को प्रभावित कर सकते हैं।
25 सितंबर को अंतरराष्ट्रीय बाजार में स्पॉट सिल्वर करीब $63.81 प्रति औंस पर था और सप्ताह के दौरान इसमें भी कमजोरी बनी हुई थी।
अभी खरीदारी करें या इंतजार?
चार दिनों की गिरावट को देखकर यह मान लेना सही नहीं होगा कि कीमतें निश्चित रूप से आगे भी गिरेंगी। इसी तरह एक दिन की रिकवरी को देखकर यह कहना भी उचित नहीं होगा कि गिरावट पूरी तरह खत्म हो गई है।
अगर कोई व्यक्ति निवेश के उद्देश्य से सोना या चांदी खरीदना चाहता है, तो उसे निवेश अवधि, जोखिम क्षमता और मौजूदा कीमत को ध्यान में रखना चाहिए। अल्प अवधि में कीमतों में तेज उतार-चढ़ाव संभव है।
ध्यान दें: IBJA की दरें बेंचमार्क दरें हैं और इनमें 3% GST तथा ज्वेलरी के मेकिंग चार्ज शामिल नहीं होते। इसलिए आभूषण खरीदते समय दुकानदार की अंतिम कीमत इससे अलग हो सकती है।
निष्कर्ष:
सोने-चांदी में चार दिनों की तेज गिरावट के बाद 25 सितंबर को कुछ रिकवरी देखने को मिली है। आगे की दिशा मुख्य रूप से अमेरिकी डॉलर, Treasury yields, Fed की ब्याज दर नीति, कच्चे तेल और भू-राजनीतिक घटनाक्रम पर निर्भर रह सकती है। इसलिए फिलहाल बाजार में गिरावट या तेजी की एकतरफा दिशा तय मानना जल्दबाजी होगी।