भारत समेत चार देशों के जहाजों को मिलेगी छूट
नई दिल्ली: होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर ईरान की ओर से बड़ा बयान सामने आया है। ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अमीर हयात-मोगद्दम ने कहा है कि भारत, चीन, इराक और कतर के जहाजों को इस समुद्री रास्ते से गुजरने पर लगी पाबंदियों से छूट दी गई है।
4 नवंबर 2026 को सामने आए उनके बयान के मुताबिक, इन चार देशों के जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकते हैं और अमेरिकी सेना भी उन्हें रोक नहीं रही है।
यह फैसला भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पश्चिम एशिया में संघर्ष के कारण समुद्री व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हुई है। हालांकि, यह बयान ईरानी संसद की समिति के उपाध्यक्ष ने दिया है। इसे ईरान की ओर से जारी विस्तृत आधिकारिक नौवहन आदेश के समान नहीं माना जाना चाहिए।
भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है होर्मुज जलडमरूमध्य?
होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। यह ईरान और ओमान के बीच स्थित दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री ऊर्जा मार्गों में से एक है।
भारत अपनी जरूरत का लगभग 90 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। पश्चिम एशिया से आने वाले तेल और गैस के जहाजों के लिए होर्मुज का रास्ता बेहद महत्वपूर्ण है।
हालांकि, भारत की कुल कच्चे तेल की आपूर्ति में इस मार्ग की हिस्सेदारी पहले की तुलना में कम हुई है। हिंदुस्तान टाइम्स की 4 नवंबर की रिपोर्ट के अनुसार, फिलहाल भारत के लगभग 30 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इस मार्ग से होता है। संघर्ष से पहले यह निर्भरता अधिक थी।
भारत के लिए LPG और LNG की आपूर्ति के लिहाज से भी यह मार्ग महत्वपूर्ण है। देश के लगभग 90 प्रतिशत LPG आयात और आधे से अधिक LNG आयात का परिवहन इस जलमार्ग से जुड़ा है।
भारत को दवाइयों के आयात के लिए भी रास्ता देने की बात
ईरानी सांसद अमीर हयात-मोगद्दम ने कहा कि भारतीय जहाजों को छूट देने का एक उद्देश्य भारत से दवाइयों के आयात को आसान बनाना भी है।
उनके मुताबिक, चीन को छूट देने के पीछे ईरान के राजनीतिक हित हैं, जबकि भारत के साथ व्यापार और दवाइयों की आपूर्ति को भी महत्व दिया गया है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि भारतीय और चीनी जहाजों से पारगमन शुल्क लिया जा रहा है, जबकि कतर के जहाजों को बिना शुल्क गुजरने दिया जा रहा है। हालांकि, इस दावे के विपरीत भारत सरकार पहले स्पष्ट कर चुकी है कि भारतीय जहाजों के सुरक्षित पारगमन के लिए ईरान को कोई भुगतान नहीं किया गया है।
क्या आठ महीने बाद पूरी तरह खुला होर्मुज का रास्ता?
पश्चिम एशिया में फरवरी 2026 से जारी संघर्ष के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। कई जहाजों ने सुरक्षा जोखिम के कारण इस मार्ग से गुजरना टाल दिया, जबकि कुछ को वैकल्पिक रास्तों और विशेष सुरक्षा व्यवस्थाओं के तहत आगे बढ़ना पड़ा।
हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि पिछले आठ महीनों से यह जलमार्ग पूरी तरह बंद था। कुछ गैर-शत्रुतापूर्ण देशों के जहाजों की आवाजाही जारी रही है, जबकि दूसरे जहाजों पर प्रतिबंध और सुरक्षा संबंधी जोखिम बने हुए हैं।
ईरान ने पहले भी कहा है कि गैर-शत्रुतापूर्ण देशों के जहाज निर्धारित सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करके गुजर सकते हैं।
भारत की तेल और गैस सप्लाई को मिल सकती है राहत
यदि ईरान की घोषित छूट व्यवहार में लागू होती है और भारतीय जहाज नियमित रूप से गुजर पाते हैं, तो भारत की ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव कम हो सकता है।
इससे कच्चे तेल, LPG और LNG की खेपों के परिवहन में आसानी हो सकती है। जहाजों की आवाजाही सामान्य होने पर बीमा, माल ढुलाई और आपूर्ति में होने वाली अनिश्चितता भी कम हो सकती है।
लेकिन इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि समुद्री सुरक्षा की स्थिति कैसी रहती है और शिपिंग कंपनियां इस रास्ते से गुजरने को कितना सुरक्षित मानती हैं।
भारत-ईरान के बीच कूटनीतिक बातचीत का असर
पिछले कई महीनों से भारत और ईरान के बीच होर्मुज में भारतीय जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर बातचीत होती रही है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों में स्वतंत्र और सुरक्षित नौवहन की आवश्यकता पर जोर दिया है।
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों देशों के बीच ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े जहाजों को रास्ता देने के मुद्दे पर लगातार बातचीत हुई है। भारत की कूटनीतिक कोशिशों के बाद कुछ भारतीय जहाज इस मार्ग से सुरक्षित निकलने में सफल भी हुए हैं।
आगे क्या होगा?
ईरान की ओर से दी गई छूट भारत के लिए सकारात्मक संकेत है, लेकिन वास्तविक राहत तभी मिलेगी जब भारतीय जहाज बिना बाधा और सुरक्षा जोखिम के नियमित रूप से इस रास्ते से गुजर सकेंगे।
भारत सरकार और शिपिंग कंपनियों की ओर से जहाजों की आवाजाही, सुरक्षा और बीमा संबंधी स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि ईरान की घोषणा से भारतीय ऊर्जा आपूर्ति को कितनी व्यावहारिक राहत मिलती है।
निष्कर्ष: होर्मुज जलडमरूमध्य से भारतीय जहाजों को छूट देने का ईरान का बयान भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण है। इससे तेल, LPG और LNG की आपूर्ति को राहत मिलने की संभावना है। लेकिन जलमार्ग पूरी तरह सामान्य होने का दावा अभी जल्दबाजी होगी।