ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने 23 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए ईरान के परमाणु कार्यक्रम और इजरायल के परमाणु हथियारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि “परमाणु हथियार इजरायल में हैं, लेकिन निरीक्षक ईरान में हैं।”
पेजेशकियान ने क्या कहा?
पेजेशकियान ने अपने भाषण में कहा कि भरोसा तभी बनाया जा सकता है जब अंतरराष्ट्रीय मामलों में “दोहरे मानदंड” खत्म हों। उनके मुताबिक, इजरायल के पास परमाणु हथियार और अन्य सामूहिक विनाश के हथियार हैं, जबकि ईरान से परमाणु निरीक्षण की मांग की जाती है।
उन्होंने कहा कि इजरायल NPT यानी Nuclear Non-Proliferation Treaty का सदस्य नहीं है और उनके दावे के अनुसार वहां अंतरराष्ट्रीय परमाणु निरीक्षण नहीं होता। इसके विपरीत, ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर अंतरराष्ट्रीय निगरानी और निरीक्षण की मांग की जाती है।
इजरायल के परमाणु हथियारों को लेकर क्या स्थिति है?
यहां एक महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि इजरायल ने सार्वजनिक रूप से परमाणु हथियार रखने की आधिकारिक पुष्टि या खंडन नहीं किया है। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लंबे समय से यह व्यापक रूप से माना जाता है कि इजरायल के पास परमाणु हथियार हैं।
इसलिए पेजेशकियान का बयान उनके राजनीतिक और कूटनीतिक रुख को दर्शाता है, जबकि इजरायल की परमाणु क्षमता का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक रूप से स्वीकार नहीं किया गया है।
ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद क्यों?
ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु ऊर्जा तथा तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है। UN में पेजेशकियान ने भी कहा कि ईरान परमाणु हथियार नहीं चाहता, लेकिन शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक के अधिकार पर कोई प्रतिबंध स्वीकार नहीं करेगा।
दूसरी ओर, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका और उसके सहयोगी देश लंबे समय से यह चिंता जताते रहे हैं कि उसकी कुछ परमाणु गतिविधियां हथियार बनाने की क्षमता से जुड़ी हो सकती हैं। मौजूदा युद्ध और परमाणु स्थलों पर हमलों के बाद यह विवाद और जटिल हो गया है।
अमेरिका और इजरायल पर भी साधा निशाना
पेजेशकियान ने अपने भाषण में अमेरिका और इजरायल पर ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने का आरोप लगाया। उन्होंने ईरान को “आतंकवाद का शिकार” बताया और कहा कि उनका देश दबाव के बावजूद आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रुख की आलोचना करते हुए यह भी कहा कि ईरान बातचीत, कूटनीति और वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन धमकी या सैन्य दबाव की भाषा स्वीकार नहीं करेगा।
UN में अमेरिका का प्रतिनिधिमंडल बाहर निकला
पेजेशकियान के भाषण के दौरान अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के सदस्य सभागार से बाहर चले गए। रिपोर्टों के अनुसार, ईरानी राष्ट्रपति ने अपने भाषण में अमेरिका और इजरायल की कड़ी आलोचना की थी।
परमाणु विवाद अब कूटनीति का भी मुद्दा
पेजेशकियान के भाषण से साफ है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के मुद्दे को केवल तकनीकी या सुरक्षा सवाल के रूप में नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समानता और कूटनीतिक दोहरे मानदंड के मुद्दे के रूप में पेश कर रहा है।
वहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने को सुरक्षा प्राथमिकता बताते रहे हैं। ऐसे में परमाणु निरीक्षण, प्रतिबंध, शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक और इजरायल की परमाणु अस्पष्टता आने वाले समय में भी ईरान-अमेरिका विवाद के प्रमुख मुद्दे बने रह सकते हैं।