यरुशलम, 30 अक्टूबर 2026: इजराइल के आम चुनाव के नतीजों ने देश की राजनीति में नया मोड़ ला दिया है। वोटों की गिनती पूरी होने के बाद भी किसी राजनीतिक गठबंधन को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की लिकुड पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है, लेकिन उनका गठबंधन सरकार बनाने के लिए जरूरी 61 सीटों से पीछे रह गया। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन भी बहुमत से दूर है। इस स्थिति में अरब पार्टियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो गई है।
चुनाव के अंतिम आंकड़े क्या कहते हैं?
इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सांसदों का समर्थन जरूरी है। केंद्रीय चुनाव समिति द्वारा जारी मतगणना के आंकड़ों के अनुसार:
| राजनीतिक दल/गठबंधनसीटें | |
| नेतन्याहू का गठबंधन | 53 |
| गादी आइजेनकोट का विपक्षी गठबंधन | 48 |
| अरब पार्टियां (संयुक्त) | 19 |
| कुल | 120 |
चुनाव में मतदान प्रतिशत लगभग 77.9% रहा, जो 1999 के बाद के दशकों में सबसे अधिक बताया गया है। हालांकि, केंद्रीय चुनाव समिति की ओर से पूर्ण आधिकारिक प्रमाणन की प्रक्रिया अभी बाकी है।
लिकुड 27 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी
नेतन्याहू की लिकुड पार्टी ने 27 सीटें हासिल की हैं। इसके बाद गादी आइजेनकोट की याशर पार्टी को 21 सीटें मिलीं, जबकि नफ्ताली बेनेट की बियाचद पार्टी ने 12 सीटें हासिल कीं।
अन्य प्रमुख दलों में जॉइंट लिस्ट को 11, डेमोक्रेट्स को 8, राम को 8, यिस्राइल बेतेनु को 7, यूनाइटेड तोराह जूडिज्म को 7, ओत्जमा येहुदित को 7, शास को 6 और रिलीजियस जियोनिज्म को 6 सीटें मिलीं।
अरब पार्टियां बन सकती हैं किंगमेकर
इस चुनाव का सबसे महत्वपूर्ण पहलू अरब पार्टियों का प्रदर्शन है। जॉइंट लिस्ट और राम ने संयुक्त रूप से 19 सीटें हासिल की हैं। यह अरब नेतृत्व वाली पार्टियों का अब तक का सबसे बड़ा संयुक्त प्रदर्शन बताया जा रहा है।
गणित के लिहाज से विपक्षी गठबंधन की 48 सीटों में अरब पार्टियों की 19 सीटें जोड़ने पर संख्या 67 हो जाती है। यानी यदि सभी दल किसी साझा व्यवस्था पर सहमत होते हैं, तो 61 सीटों का आंकड़ा पार किया जा सकता है।
हालांकि, यह केवल संसदीय संख्या का गणित है। विपक्षी गठबंधन के कई नेताओं ने अरब पार्टियों के साथ औपचारिक सरकार बनाने को लेकर आपत्ति जताई है। इसलिए समर्थन, गठबंधन और सरकार गठन के बीच राजनीतिक बातचीत निर्णायक होगी।
क्या नेतन्याहू फिर सरकार बना पाएंगे?
नेतन्याहू के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने मौजूदा सहयोगियों के अलावा अतिरिक्त समर्थन जुटाने की है। उनका गठबंधन 53 सीटों पर है और बहुमत के लिए आठ और सांसदों का समर्थन चाहिए।
दूसरी तरफ विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के बीच सरकार बनाने के विकल्पों पर बातचीत हुई है। विपक्षी दलों के बीच सहयोग की संभावनाएं तलाश की जा रही हैं, लेकिन अरब पार्टियों के साथ गठबंधन को लेकर मतभेद सामने आए हैं।
चुनाव में धांधली के आरोपों पर भी विवाद
चुनाव परिणाम आने के बाद नेतन्याहू की लिकुड पार्टी की ओर से विदेशी हस्तक्षेप और कथित वोट खरीदने को लेकर आरोप लगाए गए। इन आरोपों को अरब पार्टियों ने खारिज किया है।
इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति ने व्यापक स्तर पर चुनावी गड़बड़ी के दावों को निराधार बताया है। समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि कथित विदेशी हस्तक्षेप की जांच का उद्देश्य किसी पूरे समुदाय पर आरोप लगाना नहीं है और जांच से घोषित मतगणना परिणाम प्रभावित नहीं होंगे।
अब आगे क्या होगा?
चुनाव परिणामों के बाद इजराइल के राष्ट्रपति इसाक हर्जोग राजनीतिक दलों के नेताओं से परामर्श करेंगे। इसके बाद उस नेता को सरकार बनाने का अवसर दिया जा सकता है, जिसके पास संसद में बहुमत का समर्थन जुटाने की संभावना हो।
आगे तीन प्रमुख स्थितियां सामने आ सकती हैं:
- नेतन्याहू अतिरिक्त सांसदों और दलों का समर्थन जुटाकर सरकार बनाने की कोशिश करें।
- विपक्ष अरब पार्टियों के समर्थन या किसी अन्य राजनीतिक समझौते के जरिए बहुमत जुटाए।
- यदि कोई भी पक्ष सरकार बनाने में सफल नहीं होता, तो राजनीतिक गतिरोध के बाद दोबारा चुनाव की स्थिति बन सकती है।
इजराइल की केंद्रीय चुनाव समिति के अनुसार, आधिकारिक परिणाम राष्ट्रपति को 4 नवंबर को सौंपे जाने हैं। नई संसद का शपथ ग्रहण 10 नवंबर को निर्धारित है।
निष्कर्ष
इजराइल के चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड सबसे बड़ी पार्टी बनी है, लेकिन उनका गठबंधन बहुमत हासिल नहीं कर सका। विपक्ष के पास भी अपने दम पर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं हैं। ऐसे में अरब पार्टियों की 19 सीटें सरकार गठन की बातचीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। अब सबकी नजर इस बात पर है कि कौन-सा राजनीतिक समूह 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाता है।
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Disclaimer (अस्वीकरण): यह रिपोर्ट 30 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मतगणना और मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। मतगणना पूरी होने और आधिकारिक परिणाम प्रमाणित होने में अंतर हो सकता है। सरकार गठन से संबंधित संभावनाएं राजनीतिक दलों के बीच होने वाली बातचीत पर निर्भर करेंगी।