अमेरिका-पाकिस्तान संबंधों पर जयशंकर की टिप्पणी

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका के साथ भारत के संबंधों पर चर्चा करते हुए कहा कि भारत की सुरक्षा चिंताओं, विशेषकर पड़ोसी देश से आने वाले आतंकवाद, को समझना जरूरी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि किसी साझेदार देश की नीतियों में भारत की इन चिंताओं के प्रति पर्याप्त समझ या संवेदनशीलता नहीं दिखती, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।

जयशंकर ने ये बातें न्यूयॉर्क में Asia Society के एक कार्यक्रम में कहीं। यह चर्चा संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र के दौरान हुई।

'भारत ने दशकों तक आतंकवाद का सामना किया है'

जयशंकर ने कहा कि भारत उन देशों में है जिन्हें कई दशकों से पड़ोसी देश की ओर से सुनियोजित आतंकवाद का सामना करना पड़ा है। उन्होंने आतंकवाद को भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दा बताया।

विदेश मंत्री की टिप्पणी पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसके संदर्भ में थी। भारत लंबे समय से पाकिस्तान पर सीमा पार आतंकवाद को समर्थन देने के आरोप लगाता रहा है। पाकिस्तान इन आरोपों को खारिज करता है।

अमेरिका की पाकिस्तान नीति पर भारत की चिंता

जयशंकर की टिप्पणी ऐसे समय आई है जब अमेरिका और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक संपर्क जारी हैं। दोनों देशों ने अगस्त 2026 में वॉशिंगटन में आतंकवाद-रोधी संवाद का चौथा दौर आयोजित किया था। संयुक्त बयान में ISIS-K, अल-कायदा, तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी जैसे संगठनों के खिलाफ सहयोग पर चर्चा का उल्लेख किया गया।

भारत की चिंता यह है कि अमेरिका के पाकिस्तान के साथ संबंधों में उसकी सीमा पार आतंकवाद संबंधी चिंताओं को भी पर्याप्त महत्व दिया जाए। जयशंकर ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने की उम्मीद है, लेकिन इसके लिए दोनों देशों के बीच मौजूद मुद्दों पर वास्तविक बातचीत जरूरी है।

UN में भी आतंकवाद पर पाकिस्तान को दिया था जवाब

इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान जयशंकर ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना उसे आतंकवाद का लगातार इस्तेमाल करने वाला देश बताया था। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को सामान्य बताने या उसके परिणामों से छूट मांगने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ आत्मरक्षा के अपने अधिकार को भी दोहराया।

व्यापार और अन्य मुद्दे भी संबंधों को प्रभावित कर रहे हैं

जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में व्यापार से जुड़े मतभेदों का भी उल्लेख किया। हाल के महीनों में दोनों देशों के बीच व्यापार, शुल्क और अन्य नीतिगत विषयों पर बातचीत जारी रही है। विदेश मंत्री के अनुसार, सुरक्षा संबंधी चिंताओं के साथ इन मुद्दों पर प्रगति भी संबंधों की दिशा को प्रभावित करेगी।

निष्कर्ष

जयशंकर का संदेश यह था कि भारत-अमेरिका साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए केवल आर्थिक और रणनीतिक सहयोग ही नहीं, बल्कि भारत की सुरक्षा चिंताओं की समझ भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने विशेष रूप से सीमा पार आतंकवाद को ऐसा मुद्दा बताया, जिस पर साझेदार देशों की संवेदनशीलता का असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।