नई दिल्ली: झारखंड कंबाइंड सिविल सर्विसेज (JCCS) प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। परीक्षा में गड़बड़ी के आरोपों की CBI से स्वतंत्र और समयबद्ध जांच कराने की मांग वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई तय की गई है।
CBI जांच की मांग क्यों?
सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में सोशल एक्टिविस्ट हरिशरण देवगन ने आरोपों की निष्पक्ष जांच के लिए मामले को राज्य की जांच एजेंसियों से हटाकर CBI को सौंपने की मांग की है। याचिका में सरकारी अधिकारियों और परीक्षा एजेंसियों की भूमिका की भी जांच की मांग की गई है।
याचिकाकर्ता का कहना है कि परीक्षा को लेकर उठे सवालों की पूरी जांच जरूरी है, ताकि कथित गड़बड़ी के पीछे किसी संगठित या व्यवस्थागत भ्रष्टाचार की भूमिका होने पर उसका पता लगाया जा सके।
सबूत सुरक्षित रखने की मांग
याचिका में परीक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण सबूतों को सुरक्षित रखने की भी मांग की गई है। इनमें मूल OMR शीट, उम्मीदवारों के पास मौजूद OMR कार्बन कॉपी, CCTV फुटेज और सर्वर ऑडिट लॉग जैसे डिजिटल और भौतिक रिकॉर्ड शामिल हैं।
याचिकाकर्ता का तर्क है कि जांच के दौरान इन सबूतों से छेड़छाड़ न हो, इसलिए इन्हें सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
परीक्षा विवाद के बाद बढ़ा मामला
झारखंड में JPSC/JCCS परीक्षाओं को लेकर पहले से विवाद चल रहा है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर उम्मीदवारों और अन्य पक्षों की ओर से जांच और दोबारा परीक्षा की मांग भी उठी है।
इस मामले में अलग-अलग स्तरों पर कानूनी कार्रवाई भी हुई है। रिपोर्टों के अनुसार, रांची के कोतवाली थाने में परीक्षा से जुड़े मामले में नामजद और अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR भी दर्ज की गई है।
अब सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर नजर
अब सभी की नजर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर है। अदालत यह तय करेगी कि कथित परीक्षा अनियमितताओं की जांच CBI से कराने की मांग पर क्या निर्देश दिए जाते हैं।
फिलहाल CBI जांच की मांग अभी एक याचिका है, इसे सुप्रीम कोर्ट द्वारा CBI जांच का आदेश समझना सही नहीं होगा। मामले में अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और आदेश के बाद ही स्पष्ट होगी।