झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कई दिनों से चल रहा छात्र आंदोलन फिलहाल एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। आंदोलनकारी छात्रों ने प्रदर्शन को दो महीने के लिए स्थगित करने का फैसला लिया है। हालांकि, छात्रों ने सरकार को साफ चेतावनी दी है कि यह आंदोलन की समाप्ति नहीं, बल्कि सरकार को दिया गया एक मौका है।

छात्रों के मुताबिक, झारखंड सरकार को अब 60 दिनों के भीतर परीक्षा से जुड़े कथित विवादों और अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच की दिशा में ठोस कदम उठाना होगा। अगर तय समय में अपेक्षित कार्रवाई नहीं होती है, तो छात्र दोबारा बड़ी संख्या में रांची पहुंचेंगे और आंदोलन को फिर से शुरू करेंगे।

CBI जांच की मांग पर अड़े छात्र

आंदोलन के दौरान छात्रों की सबसे प्रमुख मांगों में CBI जांच शामिल रही है। उनका कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं की विश्वसनीयता से समझौता नहीं किया जा सकता और कथित गड़बड़ियों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच जरूरी है।

हालांकि, विवादित परीक्षाओं को रद्द करने जैसे कुछ कदमों के बावजूद कुछ छात्र संगठनों का कहना रहा है कि केवल परीक्षा रद्द करना पर्याप्त नहीं है। वे यह भी चाहते हैं कि कथित अनियमितताओं के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जाए।

सरकार ने जांच के लिए बनाई विशेष टीम

इसी बीच JPSC-JSSC से जुड़े मामलों की जांच के लिए 7 IPS अधिकारियों की टीम गठित किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, ADG मनोज कौशिक के नेतृत्व वाली इस टीम में करीब 50 पुलिस अधिकारी शामिल हैं और टीम को दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने का लक्ष्य दिया गया है।

यही वजह है कि छात्रों के दो महीने के अल्टीमेटम को सरकार की जांच प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा जा रहा है।

अब आगे क्या होगा?

फिलहाल छात्र आंदोलन को अस्थायी रूप से रोक रहे हैं, लेकिन उन्होंने सरकार पर दबाव बनाए रखने का संकेत दिया है। 60 दिनों के भीतर जांच और कार्रवाई पर संतोषजनक प्रगति नहीं हुई तो छात्र फिर रांची में जुटने और आंदोलन तेज करने की चेतावनी दे चुके हैं।

यानी आंदोलन खत्म नहीं हुआ है, बल्कि दो महीने के लिए स्थगित हुआ है—अब असली परीक्षा झारखंड सरकार की है कि वह इस अवधि में छात्रों की मांगों पर कितना ठोस कदम उठाती है।