बेंगलुरु, 29 अक्टूबर 2026: कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण को लेकर राजनीतिक विवाद गहरा गया है। राज्य की कांग्रेस सरकार में मंत्री सतीश जारकीहोली ने मतदाता सूची से करीब एक करोड़ नाम हटाए जाने का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि मृत मतदाताओं, दूसरे स्थान पर जा चुके लोगों और दोहरी प्रविष्टियों वाले नामों को हटाना जरूरी था। उनके बयान के बाद भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस पर सवाल उठाए हैं।

मंत्री सतीश जारकीहोली ने क्या कहा?

मंत्री सतीश जारकीहोली के मुताबिक, कर्नाटक में मतदाता सूची की समीक्षा उचित तरीके से की गई और नाम हटाने की कार्रवाई के पीछे वास्तविक कारण थे। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कांग्रेस की आपत्तियां दूसरे राज्यों में पुनरीक्षण प्रक्रिया के क्रियान्वयन को लेकर थीं, न कि हर राज्य में मतदाता सूची की जांच के सिद्धांत को लेकर।

उनके बयान को भाजपा ने कांग्रेस के पहले के रुख से विरोधाभासी बताया। हालांकि, किसी नेता के बयान से पूरी प्रक्रिया की वैधता या हर हटाए गए नाम की सही स्थिति अपने-आप प्रमाणित नहीं होती। इसके लिए निर्वाचन आयोग के रिकॉर्ड और संबंधित मामलों की जांच महत्वपूर्ण है।

कर्नाटक की वोटर लिस्ट से कितने नाम हटे?

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अनुसार, पुनरीक्षण से पहले राज्य में करीब 5.54 करोड़ मतदाता दर्ज थे। अंतिम मतदाता सूची में यह संख्या घटकर लगभग 4.55 करोड़ रह गई। इस तरह कुल संख्या में करीब 99.32 लाख की कमी दर्ज की गई।

निर्वाचन अधिकारियों ने बताया कि इस अंतर के पीछे मृत मतदाता, स्थायी रूप से दूसरे स्थान पर जा चुके लोग, अनुपस्थित मतदाता और दोहरी प्रविष्टियां जैसे कारण शामिल हैं। साथ ही, पुनरीक्षण के दौरान नए नाम भी जोड़े गए और मतदाता विवरणों में संशोधन किया गया। इसलिए कुल संख्या में आई कमी को सीधे इतने फर्जी मतदाताओं के नाम हटाए जाने के बराबर मानना सही नहीं होगा।

निर्वाचन आयोग ने क्या जानकारी दी?

कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी वी. अनबूकुमार ने बताया कि अंतिम सूची तैयार करने के दौरान दावे, आपत्तियां, नोटिस और सुनवाई की प्रक्रिया अपनाई गई। उनके मुताबिक, मसौदा सूची में दर्ज मतदाताओं से जुड़े मामलों की जांच के बाद पात्रता संबंधी निर्णय लिए गए।

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया कि फॉर्म-7 के जरिए नाम हटाने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के तहत होती है। किसी मतदाता को अयोग्य ठहराने के लिए संबंधित निर्वाचन अधिकारी की जांच और आदेश आवश्यक हैं। निर्वाचन आयोग ने पात्र मतदाताओं से अपनी प्रविष्टियां जांचने और नाम छूटने पर फॉर्म-6 के माध्यम से आवेदन करने की अपील की।

कांग्रेस के भीतर ही क्यों उठ रहे हैं सवाल?

कर्नाटक के मंत्री का बयान ऐसे समय आया है, जब कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने मतदाता सूची के पुनरीक्षण पर गंभीर सवाल उठाए हैं। मंत्री प्रियांक खरगे ने आरोप लगाया था कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल विपक्ष को नुकसान पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने करीब एक करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से बाहर होने पर चिंता जताई थी।

इस प्रकार कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं के बयानों से पार्टी के भीतर प्रक्रिया को लेकर मतभेद दिखाई दे रहे हैं। एक ओर जारकीहोली ने कर्नाटक में पुनरीक्षण का बचाव किया, वहीं अन्य नेताओं ने नाम हटाने की प्रक्रिया और उसके संभावित प्रभावों पर सवाल उठाए।

भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना

जारकीहोली के बयान के बाद भाजपा ने कहा कि कांग्रेस को मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर अपने रुख पर फिर विचार करना चाहिए। भाजपा की ओर से तर्क दिया गया कि यदि मृत, स्थानांतरित और दोहरी प्रविष्टियों वाले मतदाताओं के नाम हटाना जरूरी है, तो इस प्रक्रिया पर सामान्य रूप से आपत्ति नहीं होनी चाहिए।

हालांकि, मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने की जरूरत और किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट जाने की आशंका दो अलग-अलग मुद्दे हैं। इसलिए किसी भी राज्य में प्रक्रिया का मूल्यांकन नाम हटाने की संख्या के साथ-साथ सत्यापन, सुनवाई, शिकायत निवारण और पात्र मतदाताओं के नाम बहाल करने की व्यवस्था के आधार पर भी किया जाना चाहिए।

जिन मतदाताओं के नाम कटे, वे क्या करें?

निर्वाचन अधिकारियों ने पात्र मतदाताओं से अपनी जानकारी अंतिम मतदाता सूची में जांचने की अपील की है। यदि किसी योग्य मतदाता का नाम सूची में नहीं है, तो वह निर्धारित प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 जमा कर सकता है। नाम, पता या अन्य विवरण में सुधार के लिए संबंधित आवेदन प्रक्रिया अपनाई जा सकती है।

अधिक नाम हटने वाले क्षेत्रों में निर्वाचन अधिकारियों ने डेटा की दोबारा जांच और विशेष नामांकन शिविर आयोजित करने की तैयारी भी की है। इसका उद्देश्य उन पात्र मतदाताओं की पहचान करना है, जिनके नाम गलती से छूट गए हों।

निष्कर्ष

कर्नाटक में मतदाता सूची से करीब 99.32 लाख नाम कम होने का मुद्दा अब राजनीतिक बहस के केंद्र में है। मंत्री सतीश जारकीहोली ने पुनरीक्षण का समर्थन किया है, जबकि कांग्रेस के दूसरे नेताओं ने प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। वास्तविक स्थिति समझने के लिए जरूरी है कि कुल संख्या में आई कमी, नाम हटाने के कारणों और पात्र मतदाताओं के लिए उपलब्ध शिकायत एवं सुधार प्रक्रिया को अलग-अलग देखा जाए।

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Disclaimer (अस्वीकरण): यह रिपोर्ट 29 अक्टूबर 2026 तक उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों और निर्वाचन अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। राजनीतिक नेताओं के आरोप और दावे उनके अपने बयान हैं। मतदाता सूची से संबंधित अंतिम स्थिति के लिए निर्वाचन आयोग के आधिकारिक रिकॉर्ड को प्राथमिकता दें।