अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने चीन की कथित नई घुसपैठ के दावों को खारिज किया है। उन्होंने खास तौर पर उस दावे को गलत बताया जिसमें कहा जा रहा था कि चीनी सैनिक भारतीय क्षेत्र में 60 किलोमीटर तक अंदर पहुंच गए हैं।

रिजिजू ने कहा कि सीमावर्ती इलाकों को पहले पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी जाती थी, लेकिन अब बॉर्डर क्षेत्रों का विकास, कनेक्टिविटी और सुरक्षा सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है। उन्होंने सीमावर्ती क्षेत्रों में सड़क और दूसरी आधारभूत सुविधाओं के विकास का भी उल्लेख किया।


सीमा पर असली विवाद क्या है?

रिजिजू ने यह भी माना कि भारत-चीन सीमा के कुछ हिस्सों में सीमा का स्पष्ट रूप से सीमांकन नहीं हुआ है। इसी वजह से सीमा के आसपास गतिविधियों और स्थानीय लोगों की आवाजाही को लेकर विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय ग्रामीणों की चिंताओं को गंभीरता से लिया जाना चाहिए, लेकिन इन्हें सीधे तौर पर भारतीय क्षेत्र में चीनी कब्जे का प्रमाण नहीं माना जा सकता।

हाल के दिनों में अरुणाचल के अपर सुबनसिरी जिले के ताकसिंग क्षेत्र को लेकर स्थानीय स्तर पर चीन की गतिविधियों और भारतीय इलाकों में गश्त से जुड़े दावे सामने आए थे। भारतीय सेना ने भी कहा है कि भारत ने अपनी कोई जमीन नहीं खोई है और सीमा पर भारतीय चौकियां भारत के नियंत्रण में हैं।


स्थानीय लोगों की चिंता भी चर्चा में

विवाद के बीच स्थानीय संगठनों ने सीमा क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का जायजा लेने की कोशिश की है। इसका मतलब यह है कि चीनी कब्जे का दावा सरकारी स्तर पर खारिज किया जा रहा है, लेकिन सीमा क्षेत्र में स्थानीय लोगों की सुरक्षा और चराई/आवागमन से जुड़ी चिंताएं अलग मुद्दे के रूप में बनी हुई हैं।


सरकार का फोकस बॉर्डर इंफ्रास्ट्रक्चर पर

रिजिजू का कहना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में बेहतर सड़क और कनेक्टिविटी से न सिर्फ स्थानीय लोगों को फायदा मिलेगा, बल्कि रणनीतिक रूप से भी भारत की स्थिति मजबूत होगी। सरकार लगातार सीमा क्षेत्रों में इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर जोर दे रही है।


फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक और सैन्य बयानों के मुताबिक अरुणाचल प्रदेश में चीन के 60 किलोमीटर अंदर घुसने या नए भारतीय क्षेत्र पर कब्जे की पुष्टि नहीं हुई है। हालांकि, सीमा-निर्धारण और स्थानीय लोगों की चिंताओं को लेकर बहस जारी है।