महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी चलाने वाले ड्राइवरों के लिए अब मराठी भाषा का कामकाजी ज्ञान जरूरी कर दिया गया है। महाराष्ट्र मोटर वाहन नियमों में किए गए संशोधन के तहत कमर्शियल पैसेंजर ट्रांसपोर्ट वाहनों के ड्राइवरों को यात्रियों से रोजमर्रा के काम के लिए मराठी में संवाद करने में सक्षम होना होगा। 

यह नियम सिर्फ पारंपरिक ऑटो और टैक्सी तक सीमित नहीं है। ऐप-बेस्ड कैब सेवाओं से जुड़े पात्र ड्राइवर भी इसके दायरे में आते हैं। सरकार का कहना है कि स्थानीय भाषा का कामकाजी ज्ञान यात्रियों और ड्राइवरों के बीच संवाद को बेहतर बनाने में मदद करेगा।


मराठी नहीं आई तो क्या होगा?

सरकार की कार्रवाई तत्काल लाइसेंस रद्द करने से शुरू नहीं होगी। जांच में अगर किसी ड्राइवर को जरूरी मराठी ज्ञान नहीं आता पाया जाता है, तो उसे नोटिस देकर भाषा सीखने का मौका दिया जाएगा। उपलब्ध नियमों के अनुसार, सुधार नहीं होने पर संबंधित लाइसेंस अथॉराइजेशन को पहले निलंबित किया जा सकता है और लगातार नियम तोड़ने पर इसे रद्द भी किया जा सकता है।

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने भी स्पष्ट किया है कि जो ड्राइवर मराठी नहीं सीखेंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, नियमों में ड्राइवर को अपना पक्ष रखने का अवसर दिए जाने की प्रक्रिया भी मौजूद है।


कितने ड्राइवर प्रभावित हो सकते हैं?

राज्य में बड़ी संख्या में ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों ने मराठी प्रशिक्षण लिया है, लेकिन कुछ ड्राइवर अभी भी प्रशिक्षण या परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए हैं। अगस्त 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक करीब 25,000 ऑटो ड्राइवरों के पास अभी प्रमाणन नहीं था, जिनमें 7,750 ड्राइवर proficiency test में असफल हुए थे।

इस फैसले को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस भी शुरू हो गई है। समर्थकों का कहना है कि महाराष्ट्र में सार्वजनिक परिवहन सेवा देने वालों को स्थानीय भाषा का बुनियादी ज्ञान होना चाहिए, जबकि आलोचकों ने ड्राइवरों की रोजी-रोटी और गैर-मराठी भाषी लोगों पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर सवाल उठाए हैं।

अब नजर इस बात पर है कि नए नियमों को RTO किस तरह लागू करता है और भाषा संबंधी जांच के बाद ड्राइवरों पर कार्रवाई की प्रक्रिया कितनी सख्ती से आगे बढ़ती है।