पुलिस के अनुसार हादसे में चार मजदूर शटरिंग और मलबे की चपेट में आ गए। सूचना मिलते ही पुलिस, दमकल विभाग और प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचीं और स्थानीय लोगों की मदद से राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया गया। सभी दबे मजदूरों को बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया।

मलबे से निकाले गए एक मजदूर शिवराम की मौके पर ही मौत हो गई। इलाज के दौरान दो अन्य मजदूरों ने भी दम तोड़ दिया। इस तरह हादसे में मृतकों की संख्या बढ़कर तीन हो गई। एक अन्य मजदूर की हालत गंभीर बताई जा रही है और उसे बेहतर इलाज के लिए आगरा के एसएन मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।


मृतकों में नेपाल और पश्चिम बंगाल के मजदूर

पुलिस के मुताबिक, मृतकों में एक मजदूर नेपाल का रहने वाला था, जबकि दो अन्य पश्चिम बंगाल के निवासी बताए गए हैं। अधिकारियों की ओर से मृतकों की पहचान और उनके परिवारों से संपर्क की प्रक्रिया की जा रही है।


निर्माण स्थल की सुरक्षा पर उठे सवाल

हादसे के बाद निर्माण स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। पुलिस यह जांच कर रही है कि शटरिंग क्यों गिरी और निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। कुछ रिपोर्टों में मौके पर पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के आरोप भी सामने आए हैं, हालांकि इन आरोपों की जांच की जा रही है।

ओमेक्स की निर्माणाधीन कमर्शियल साइट पर छज्जे के निर्माण के लिए शटरिंग लगाई गई थी। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, ढलाई के दौरान अचानक शटरिंग का ढांचा नीचे गिर गया। हादसे की वास्तविक वजह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।


प्रशासन ने शुरू की जांच

घटना के बाद प्रशासन और पुलिस अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। राहत-बचाव अभियान के बाद अब हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। निर्माण में इस्तेमाल शटरिंग की मजबूती, काम करने की प्रक्रिया और सुरक्षा इंतजामों समेत कई पहलुओं की जांच की जाएगी।

मथुरा के इस हादसे ने एक बार फिर निर्माण स्थलों पर मजदूरों की सुरक्षा और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।