सऊदी अरब पर हमलों के बीच मक्का समझौता चर्चा में

मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों के बीच सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान के बीच हुआ मक्का संयुक्त रक्षा समझौता चर्चा में है। समझौते के तहत तीनों देशों ने यह सिद्धांत स्वीकार किया है कि किसी एक सदस्य पर सशस्त्र हमला बाकी सदस्यों के खिलाफ हमला माना जाएगा।

हालांकि, समझौते में प्रत्येक देश की सैन्य जिम्मेदारी और किसी हमले की स्थिति में उठाए जाने वाले ठोस कदमों का पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं किया गया है। इसलिए इसे अपने आप में किसी देश के खिलाफ युद्ध की घोषणा नहीं माना जा सकता।

UNGA के दौरान तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक

25 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा सत्र के दौरान तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के विदेश मंत्रियों ने न्यूयॉर्क में बैठक की। इसमें सऊदी अरब पर हुए हमलों की निंदा की गई और समझौते के तहत संभावित सहायता के विकल्पों पर चर्चा हुई।

तुर्की के विदेश मंत्रालय के अनुसार, तीनों देशों ने सैन्य प्रमुखों की जल्द बैठक बुलाने की योजना पर भी विचार किया, ताकि सऊदी अरब की सहायता के संभावित तरीकों का आकलन किया जा सके।

क्या तुर्की और पाकिस्तान सऊदी अरब के लिए युद्ध में उतरेंगे?

फिलहाल उपलब्ध आधिकारिक बयानों से यह पुष्टि नहीं होती कि तुर्की या पाकिस्तान सऊदी अरब की ओर से हूतियों अथवा किसी अन्य पक्ष के खिलाफ सीधे सैन्य हमला करने जा रहे हैं।

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फिदान ने कहा है कि सऊदी अरब को कुछ सैन्य जरूरतें, खासकर तकनीकी सहायता की आवश्यकता हो सकती है और तुर्की समझौते के तहत ऐसी मदद देने को तैयार है। उन्होंने सऊदी अरब की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता पर हमलों को गंभीर बताया।

पाकिस्तान की ओर से भी समझौते को रक्षात्मक बताया गया है। विदेश मंत्री इशाक डार ने पहले कहा था कि यह किसी विशेष देश के खिलाफ गठबंधन नहीं है और इसका उद्देश्य सुरक्षा सहयोग बढ़ाना है।

हूती हमलों ने बढ़ाई सऊदी अरब की चिंता

यमन के हूती विद्रोही सऊदी अरब और क्षेत्रीय समुद्री मार्गों को निशाना बनाने की बात कहते रहे हैं। 19 सितंबर को सऊदी अधिकारियों ने बताया कि रियाद की ओर दागी गई बैलिस्टिक मिसाइल को रोक लिया गया। हूतियों ने सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य स्थानों पर हमलों के दावे भी किए, हालांकि सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई।

इन घटनाओं के कारण सऊदी अरब की वायु रक्षा, ऊर्जा ढांचे और समुद्री व्यापार मार्गों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है।

समझौते की असली परीक्षा अभी बाकी

मक्का समझौते में सामूहिक रक्षा का सिद्धांत शामिल है, लेकिन इसका व्यावहारिक अर्थ—जैसे सैन्य तैनाती, हथियारों की आपूर्ति, खुफिया सहयोग या प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई—संबंधित सरकारों के फैसलों और समझौते की विस्तृत प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।

तीनों देशों के विदेश मंत्रियों की हालिया बैठक में तत्काल सैन्य कार्रवाई की घोषणा के बजाय सैन्य प्रमुखों की बैठक और सहायता के विकल्पों पर चर्चा की गई। इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि तुर्की और पाकिस्तान सऊदी अरब के साथ मिलकर हमला करेंगे।

निष्कर्ष:

सऊदी अरब पर हूती हमलों के बीच मक्का संयुक्त रक्षा समझौता सक्रिय कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है। तुर्की ने तकनीकी सैन्य सहायता की तत्परता जताई है और तीनों देशों ने सैन्य प्रमुखों की बैठक पर विचार किया है। लेकिन पाकिस्तान या तुर्की के सीधे युद्ध में उतरने अथवा संयुक्त हमले की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।