हैदराबाद की NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ इन दिनों CJI सूर्यकांत को लेकर हुए विवाद के कारण चर्चा में है। यूनिवर्सिटी के 2026 बैच के छात्रों के एक समूह ने CJI सूर्यकांत को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने पर आपत्ति जताई थी। छात्रों ने यूनिवर्सिटी प्रशासन से इस फैसले पर दोबारा विचार करने की अपील की थी।
छात्रों की आपत्ति का संबंध जुलाई में जंतर-मंतर पर हुए छात्र प्रदर्शन और उस दौरान पुलिस कार्रवाई से जुड़ी सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही से था। 22 जुलाई को CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस कार्रवाई से जुड़ा मामला तत्काल सुनवाई के लिए उठाया गया था। उस समय कोर्ट ने वीडियो देखने से इनकार करते हुए तत्काल सुनवाई नहीं की थी। बाद में CJI ने स्पष्ट किया था कि उस समय पूरी याचिका दाखिल नहीं हुई थी, बल्कि केवल एक प्रतिनिधित्व आया था।
इसी घटनाक्रम के बाद NALSAR के छात्रों के एक वर्ग ने CJI को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि बनाए जाने का विरोध किया। छात्रों का तर्क था कि कानून के छात्रों के रूप में वे संवैधानिक अधिकारों, न्याय और शिकायतों पर विचार-विमर्श जैसे मूल्यों को महत्वपूर्ण मानते हैं।
BCI ने पहले क्या फैसला लिया?
विवाद उस समय और बढ़ गया जब Bar Council of India (BCI) ने सभी राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया कि NALSAR के 2026 बैच के छात्रों को अगले आदेश तक अधिवक्ता के रूप में एनरोल न किया जाए। BCI ने इस अभियान को लेकर यूनिवर्सिटी से उन लोगों की जानकारी भी मांगी, जो कथित तौर पर इसे आयोजित या आगे बढ़ाने में शामिल थे।
इस फैसले का मतलब यह था कि यदि आदेश लागू रहता, तो 2026 बैच के छात्रों के लिए कानून की डिग्री पूरी करने के बाद बार में एनरोल होकर प्रैक्टिस शुरू करने में बाधा आती।
फिर BCI ने अपना फैसला क्यों बदला?
विवाद और आलोचना के बाद BCI ने अपने पहले आदेश को वापस ले लिया। परिषद ने माना कि पूरे बैच के अधिकांश छात्र कथित अभियान में शामिल नहीं थे, इसलिए सभी छात्रों को सामूहिक रूप से दंडित करना उचित नहीं होगा। BCI ने अपने संशोधित रुख में कहा कि किसी छात्र को उसकी गलती के बिना नुकसान नहीं होना चाहिए।
इसलिए अब यह कहना सही नहीं होगा कि NALSAR के 2026 बैच के छात्र वकील नहीं बन पाएंगे। BCI के फैसले को वापस लेने के बाद उनके अधिवक्ता के रूप में एनरोलमेंट का रास्ता फिर से खुल गया है।
यानी इस मामले में बड़ा मोड़ यह है कि CJI सूर्यकांत के विरोध से शुरू हुआ विवाद पहले पूरे बैच के एनरोलमेंट पर रोक तक पहुंचा, लेकिन BCI ने बाद में अपना फैसला वापस लेकर छात्रों को राहत दे दी।