देश की स्कूली शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी दो प्रमुख संस्थाओं NCERT और CBSE में बड़ी संख्या में पद खाली होने का मामला सामने आया है। संसद की Estimates Committee ने अपनी रिपोर्ट में इन रिक्तियों पर गंभीर चिंता जताते हुए जल्द और समयबद्ध तरीके से भर्ती करने की जरूरत बताई है। रिपोर्ट 12 अगस्त 2026 को लोकसभा में पेश की गई। 

NCERT में 1,596 पद खाली

समिति के मुताबिक, अक्टूबर 2025 तक NCERT में कुल 2,844 स्वीकृत पदों के मुकाबले सिर्फ 1,248 पदों पर कर्मचारी कार्यरत थे। यानी 1,596 पद खाली थे। इनमें 145 अकादमिक, 131 स्कूल शिक्षण, 916 मंत्रालयिक और 404 सहायक पद शामिल थे। 

समिति ने कहा कि NCERT देश की शिक्षा नीति, पाठ्यक्रम और शैक्षणिक सामग्री को आकार देने वाली महत्वपूर्ण संस्था है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पदों का खाली रहना गंभीर चिंता का विषय है। पैनल ने शिक्षा मंत्रालय से इन रिक्तियों को भरने के लिए गंभीर और प्रभावी कदम उठाने को कहा है। 

CBSE में 44% पद रिक्त

दूसरी ओर, CBSE में भी स्थायी कर्मचारियों की बड़ी कमी सामने आई है। बोर्ड के 2,117 स्वीकृत पदों में से 933 यानी करीब 44% पद खाली हैं। इनमें सबसे ज्यादा कमी ग्रुप-C सपोर्ट स्टाफ में है, जहां 595 पद रिक्त बताए गए हैं।

समिति ने खास तौर पर CBSE की परीक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। CBSE देशभर में बड़ी संख्या में बोर्ड परीक्षाओं का संचालन करता है और लाखों छात्र इसकी परीक्षाओं में शामिल होते हैं। पैनल का मानना है कि स्थायी कर्मचारियों की कमी और अस्थायी या कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों पर निर्भरता परीक्षाओं की सुरक्षा, गुणवत्ता और सुचारु संचालन के लिए जोखिम पैदा कर सकती है।

बढ़ते काम के बीच स्टाफ की कमी

रिपोर्ट के अनुसार, CBSE से संबद्ध स्कूलों की संख्या 1992-93 में 3,787 से बढ़कर 2024-25 में 31,234 हो गई। बोर्ड के क्षेत्रीय और उप-क्षेत्रीय कार्यालयों का नेटवर्क भी बढ़ा है। ऐसे में समिति ने कहा कि बढ़ते काम के अनुरूप स्थायी कर्मचारियों की संख्या मजबूत करना जरूरी है।

संसदीय समिति ने CBSE से संवेदनशील परीक्षा संबंधी कार्यों में अस्थायी कर्मचारियों पर निर्भरता कम करने और समयबद्ध तरीके से सभी रिक्त पदों को भरने की सिफारिश की है।

अब बड़ा सवाल यह है कि NCERT और CBSE में इन हजारों रिक्त पदों को भरने के लिए सरकार कितनी तेजी से भर्ती प्रक्रिया आगे बढ़ाती है।