नेहा बोरा की रिहाई, अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी से बढ़ी हलचल
नई दिल्ली: दिल्ली में प्रस्तावित ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा को शुक्रवार शाम हिरासत में लिया गया था। शनिवार सुबह उन्हें रिहा कर दिया गया। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके को पुलिस ने निवारक कार्रवाई के तहत गिरफ्तार किया।
नेहा बोरा ने हिरासत का अनुभव बताया
रिहाई के बाद नेहा बोरा ने दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस उन्हें करीब चार से पांच घंटे तक दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर घुमाती रही और रातभर हिरासत में रखा।
नेहा ने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें लंबे समय तक बोलने नहीं दिया गया और वकील से संपर्क करने में परेशानी हुई। उनके मुताबिक, वकीलों को उनसे मिलने के लिए कई घंटे इंतजार करना पड़ा।
नेहा ने हिरासत के तरीके पर आपत्ति जताते हुए कानून-व्यवस्था और नागरिक अधिकारों से जुड़े सवाल उठाए। ये आरोप नेहा और उनके संगठन की ओर से सामने आए हैं; पुलिस का पक्ष अलग से देखना जरूरी है।
अभिजीत दीपके को क्यों किया गया गिरफ्तार?
CJP संस्थापक अभिजीत दीपके को दिल्ली में ‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले हिरासत में लिया गया था। पुलिस के मुताबिक, उन्हें पहले नोटिस दिए गए थे और शांति भंग होने की आशंका के मद्देनजर निवारक कार्रवाई की गई।
रिपोर्टों के अनुसार, दीपके के खिलाफ भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धाराओं 126 और 170 के तहत कार्रवाई की गई। उन्हें स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के सामने पेश किया जाना था।
‘लहरा दो तिरंगा’ मार्च से पहले पुलिस की कार्रवाई
कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से आयोजित मार्च को दिल्ली के कनॉट प्लेस इलाके में होना था। पुलिस ने मार्च की अनुमति नहीं दी थी। इसके बाद प्रदर्शन से पहले सुरक्षा बढ़ाई गई और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
यह मार्च मतदाता सूची से जुड़े कथित अनियमितताओं के मुद्दे और चुनाव आयोग के खिलाफ विरोध से जुड़ा था। पुलिस की कार्रवाई के बाद प्रदर्शनकारियों और उनके समर्थकों ने हिरासत तथा रिहाई की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
आगे क्या होगा?
नेहा बोरा की रिहाई के बाद अब अभिजीत दीपके के मामले में मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली कार्यवाही महत्वपूर्ण है। इस घटनाक्रम में पुलिस के आधिकारिक पक्ष, हिरासत से जुड़े कानूनी दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के बयानों पर नजर रहेगी।
निष्कर्ष: नेहा बोरा की रिहाई और अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी ने दिल्ली में प्रस्तावित मार्च से जुड़े विवाद को चर्चा में ला दिया है। जहां नेहा ने हिरासत के दौरान अपने साथ हुए व्यवहार पर सवाल उठाए हैं, वहीं पुलिस ने दीपके के मामले में निवारक कार्रवाई का आधार शांति-व्यवस्था बनाए रखना बताया है।
अस्वीकरण: यह समाचार 17 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों के आधार पर तैयार किया गया है। हिरासत के दौरान पुलिस के व्यवहार से जुड़े आरोप संबंधित पक्षों के दावे हैं और उनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।