काठमांडू: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरंगों में फंसे सैकड़ों लोगों को बचाने के लिए बड़े स्तर पर रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक करीब 900 से अधिक हाइड्रोपावर कर्मचारी लापता हैं और उनमें से बड़ी संख्या के सुरंगों में फंसे होने की आशंका है।
सुरंगों तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती
बाढ़ के साथ आए भारी मलबे और चट्टानों ने कई सुरंगों के रास्ते बंद कर दिए हैं। तेज नदी के बहाव और खराब मौसम के कारण रेस्क्यू टीमों के लिए घटनास्थल तक पहुंचना भी मुश्किल है।
नेपाली सेना के इंजीनियर एक्सकेवेटर, ड्रिलिंग मशीन और नियंत्रित विस्फोटों की मदद से मलबा हटाकर सुरंगों में रास्ता बनाने की कोशिश कर रहे हैं।
सुरंगों में भेजी जा रही ऑक्सीजन और कैमरे
बचाव दलों की प्राथमिकता अंदर फंसे लोगों तक हवा, ऑक्सीजन, पानी और भोजन पहुंचाना है। कुछ सुरंगों में छोटे रास्ते या छेद बनाकर ऑक्सीजन पहुंचाने की कोशिश की गई है। अंदर की स्थिति जानने के लिए कैमरों और अन्य खोज उपकरणों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।
Upper Trishuli-3A प्रोजेक्ट में बचाव दल सुरंग के ऊपरी हिस्से तक पहुंच चुका है और वहां बने छोटे रास्ते को चौड़ा करने का काम किया जा रहा है, ताकि बचावकर्मी अंदर जाकर तलाश कर सकें।
भारत और चीन भी मदद में जुटे
नेपाल के इस बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन में भारत और चीन की विशेषज्ञ टीमें भी मदद कर रही हैं। दक्षिण कोरिया की टीमों की भी सहायता ली जा रही है। भारत की ओर से हवाई सहायता और जरूरी उपकरण उपलब्ध कराने की कोशिशें जारी हैं।
समय के खिलाफ दौड़
रेस्क्यू टीमों के सामने सबसे बड़ी चुनौती समय है। सुरंगों में लंबे समय तक फंसे लोगों के लिए ऑक्सीजन, साफ पानी और भोजन की उपलब्धता बेहद महत्वपूर्ण है। विशेषज्ञों के मुताबिक मलबे के भीतर तापमान, पानी और हवा की स्थिति भी लोगों के जीवित रहने की संभावना को प्रभावित कर सकती है।
अधिकारियों के मुताबिक कई जगहों पर बचाव अभियान अभी भी जारी है और सुरंगों के अंदर फंसे लोगों का पता लगाने के लिए लगातार खुदाई की जा रही है। स्थिति बेहद चुनौतीपूर्ण होने के बावजूद रेस्क्यू टीमें लोगों तक पहुंचने की कोशिश में जुटी हैं।