कौन है निदाल मलिक हसन?
निदाल मलिक हसन अमेरिका की सेना में मेजर और मनोचिकित्सक रह चुका है। 5 नवंबर 2009 को टेक्सास के फोर्ट हुड सैन्य अड्डे पर उसने गोलीबारी की थी, जिसमें 13 लोगों की मौत हुई और 32 लोग घायल हुए थे। सैन्य अदालत ने 2013 में उसे दोषी ठहराते हुए मौत की सजा सुनाई थी।
हसन ने हमले को जिहाद से जोड़ते हुए अपनी कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश की थी। वह बाद में गिरफ्तारी के दौरान लगी गोली के कारण कमर से नीचे तक लकवाग्रस्त हो गया और व्हीलचेयर का इस्तेमाल करता है।
3 दिसंबर को फायरिंग स्क्वॉड से होगी मौत की सजा
अमेरिकी सेना ने 6 अक्टूबर 2026 को हसन को फायरिंग स्क्वॉड के जरिए मृत्युदंड देने का आदेश दिया। यह कार्रवाई 3 दिसंबर 2026 को दोपहर 1 बजे स्थानीय समय पर फोर्ट हुड, टेक्सास में निर्धारित की गई है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 2 अक्टूबर को सैन्य अदालत की मौत की सजा को मंजूरी दी थी।
यह अमेरिकी सेना के लिए बेहद दुर्लभ कदम है। अमेरिका में आखिरी सैन्य फांसी 1961 में हुई थी, जबकि फायरिंग स्क्वॉड से सैन्य मृत्युदंड का पिछला उदाहरण द्वितीय विश्व युद्ध के बाद का है।
पहली बार होगी लाइवस्ट्रीमिंग?
इस पूरे मामले को सबसे ज्यादा चर्चा में लाने वाली बात मौत की सजा की लाइवस्ट्रीमिंग है। Pentagon ने कहा है कि हसन की फायरिंग स्क्वॉड से होने वाली फांसी को लाइवस्ट्रीम किया जाएगा। अगर यह योजना उसी रूप में लागू होती है, तो यह अमेरिका में किसी कानूनी फांसी की पहली ज्ञात सार्वजनिक लाइवस्ट्रीम होगी।
अमेरिका में सार्वजनिक फांसी का दौर करीब एक सदी पहले खत्म हो गया था। 1936 में केंटकी के ओवेन्सबोरो में रैनी बेथिया को फांसी दी गई थी, जिसे अमेरिका की आखिरी व्यापक रूप से मान्यता प्राप्त सार्वजनिक फांसी माना जाता है। उस समय करीब 20,000 लोग इसे देखने पहुंचे थे।
आखिर ट्रंप प्रशासन ऐसा क्यों कर रहा है?
अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा है कि लोगों को यह देखने में सक्षम होना चाहिए कि ऐसे अपराधों के गंभीर परिणाम होते हैं। इसी सोच के तहत इसे सार्वजनिक करने की बात सामने आई है।
हालांकि, इस फैसले को लेकर अमेरिका में ही तीखी बहस छिड़ गई है। कुछ रिपब्लिकन और डेमोक्रेट सांसदों ने भी लाइवस्ट्रीमिंग का विरोध किया है। आलोचकों का कहना है कि मृत्युदंड को सार्वजनिक तमाशे में बदलना अमेरिकी न्याय व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है।
कानूनी अड़चन अभी बाकी
हालांकि तारीख तय हो चुकी है, लेकिन 3 दिसंबर को फांसी होना अभी पूरी तरह निश्चित नहीं माना जा सकता। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, हसन संघीय अदालत में अपनी सजा को चुनौती देकर प्रक्रिया को लंबे समय तक टाल सकता है। इसलिए लाइवस्ट्रीमिंग की योजना भी कानूनी प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
1936 से 2026 तक का बड़ा बदलाव
अमेरिका में सार्वजनिक फांसी को धीरे-धीरे इसलिए खत्म किया गया क्योंकि ऐसी घटनाएं न्याय से ज्यादा सार्वजनिक तमाशे में बदलने लगी थीं। अब लगभग 90 साल बाद किसी फांसी को इंटरनेट पर लाइव दिखाने की योजना ने उसी पुरानी बहस को फिर जिंदा कर दिया है।
निदाल हसन की प्रस्तावित फांसी इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि इसमें मिलिट्री एग्जीक्यूशन, फायरिंग स्क्वॉड और लाइवस्ट्रीमिंग—तीनों असाधारण पहलू एक साथ जुड़े हैं। हालांकि, कानूनी चुनौतियों के कारण 3 दिसंबर की तारीख आगे खिसक सकती है।