पेशावर: पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की राजधानी पेशावर में गुरुवार को एक निजी स्कूल की छत गिरने से दर्दनाक हादसा हो गया। हादसे में कई मासूम बच्चों और एक महिला शिक्षिका की जान चली गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृतकों की संख्या 29 बच्चों और एक महिला टीचर तक पहुंची, जबकि 40 से अधिक लोग घायल हुए हैं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
कक्षाओं के दौरान हुआ हादसा
यह दुर्घटना पेशावर के डिर कॉलोनी इलाके में स्थित अल-खैर स्कूल में हुई। बताया गया कि हादसे के समय बच्चे अपनी कक्षाओं में मौजूद थे। इमारत के ऊपरी हिस्से की छत गिरने से नीचे का हिस्सा भी क्षतिग्रस्त हो गया और कई लोग मलबे में दब गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोग, पुलिस और बचाव दल मौके पर पहुंचे।
घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया
हादसे के बाद घायलों को पेशावर के लेडी रीडिंग अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में आपातकालीन व्यवस्था की गई, ताकि घायल बच्चों और अन्य लोगों को तत्काल चिकित्सा सहायता दी जा सके। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई गई है। घटना के बाद परिजन अस्पताल और स्कूल परिसर में अपने बच्चों की जानकारी जुटाने के लिए पहुंचे।
स्कूल मालिक गिरफ्तार, जांच शुरू
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, स्कूल के मालिक को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जानकारी में इमारत की संरचनात्मक कमजोरी को हादसे की संभावित वजह बताया गया है। हालांकि, छत गिरने के वास्तविक कारणों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय प्रशासन ने घटना की जांच के निर्देश दिए हैं, ताकि यह पता लगाया जा सके कि भवन निर्माण और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया दुख
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हादसे में हुई मौतों पर दुख व्यक्त किया और प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदना जताई। अधिकारियों से घायलों को बेहतर इलाज उपलब्ध कराने और स्कूल भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है।
स्कूलों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल
पाकिस्तान में स्कूलों और अन्य इमारतों के ढहने की घटनाओं ने निर्माण गुणवत्ता, भवनों के रखरखाव और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर चिंताएं बढ़ाई हैं। पेशावर की यह घटना भी स्कूल भवनों की नियमित जांच और बच्चों की सुरक्षा के लिए प्रभावी इंतजामों की आवश्यकता को रेखांकित करती है। हादसे के कारणों और जिम्मेदारी को लेकर अंतिम निष्कर्ष जांच के बाद ही सामने आएगा।
नोट: शुरुआती समाचार रिपोर्टों में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई है और बचाव अभियान के दौरान आंकड़े बदलते रहे। इसलिए खबर प्रकाशित करते समय ताजा आधिकारिक पुष्टि के आधार पर आंकड़े अपडेट करना जरूरी है।