पटना: बिहार की राजधानी पटना में पिछले 21 दिनों से गर्दनीबाग में चल रहा PhD होल्डर्स का अनशन आखिरकार खत्म हो गया। ऑल PhD होल्डर्स एंड रिसर्च एसोसिएशन के छह सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल सैयद अता हसनैन से मुलाकात की। करीब दो घंटे चली बातचीत के बाद छात्रों की मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया गया, जिसके बाद आंदोलन वापस लेने का फैसला किया गया।
15 दिनों में बनेगी कमेटी
राज्यपाल के साथ हुई बातचीत में सहायक प्रोफेसर भर्ती से जुड़े मुद्दों की समीक्षा के लिए 15 दिनों के भीतर एक कमेटी गठित करने पर सहमति बनी है। कमेटी में शिक्षाविदों और अनुभवी प्रशासनिक अधिकारियों को शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
क्या थीं PhD होल्डर्स की प्रमुख मांगें?
प्रदर्शनकारी PhD होल्डर्स की प्रमुख मांगों में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती की अधिकतम उम्र 55 साल करना, भर्ती में ऑब्जेक्टिव लिखित परीक्षा कराना और लिखित परीक्षा के अंकों के साथ API स्कोर को जोड़कर संयुक्त मेरिट लिस्ट तैयार करना शामिल था। इंटरव्यू में टीचिंग डेमो को शामिल करने की मांग भी रखी गई।
इसके अलावा प्रदर्शनकारी UGC Regulation 2018 के प्रावधानों, डोमिसाइल नीति और बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्रोफेसर नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों को भी उठा रहे थे।
भर्ती नियमों पर भी अहम आश्वासन
बैठक के बाद यह भी बताया गया कि Assistant Professor Recruitment Regulations, 2026 के तहत नियमित या संविदा भर्ती तब तक नहीं की जाएगी, जब तक एसोसिएशन की मांगों पर विचार करते हुए नियमों में जरूरी संशोधन नहीं किए जाते।
21 दिन चला आंदोलन
PhD होल्डर्स और गेस्ट फैकल्टी का आंदोलन 4 अगस्त से जारी था। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी कुमुद पटेल लगातार भूख हड़ताल पर रहे। इससे पहले 22 अगस्त को प्रदर्शनकारियों ने लोकभवन की ओर मार्च भी किया था, जहां पुलिस के साथ टकराव और कई लोगों की हिरासत की खबर सामने आई थी।
अब आंदोलन खत्म होने के बाद सबकी नजर 15 दिनों में बनने वाली कमेटी और उसकी सिफारिशों पर रहेगी।