परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में पंजाब बंद
पंजाब में गुरुवार, 15 अक्टूबर 2026 को नशा-विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में राज्यव्यापी बंद का आह्वान किया गया। यह बंद उनके परिवार और हत्या के बाद गठित संयुक्त कार्रवाई समिति की ओर से बुलाया गया है। विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी यूनियनों ने भी इसे समर्थन दिया।
बंद का समय सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक निर्धारित किया गया। कई शहरों में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे, जबकि कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर धरना दिया। बंद का मुख्य उद्देश्य झोटा की हत्या की निष्पक्ष जांच, CBI जांच की मांग और परिवार को न्याय दिलाना है।
क्या है परविंदर सिंह झोटा हत्याकांड?
परविंदर सिंह झोटा मानसा जिले में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले कार्यकर्ता के रूप में जाने जाते थे। रिपोर्टों के अनुसार, 13 अक्टूबर को मानसा में एक मेडिकल स्टोर के पास गोली लगने से उनकी मौत हो गई। घटना के समय वह फेसबुक लाइव कर रहे थे और कथित तौर पर नशीले पदार्थों की बिक्री को लेकर मेडिकल स्टोर संचालक से सवाल कर रहे थे।
इस मामले में मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार पर गोली चलाने का आरोप है। पुलिस ने उसे राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया और पंजाब वापस लाया। आरोपी के खिलाफ दर्ज मामले में हत्या के आरोपों की जांच की जा रही है।
परिवार की मांग: CBI जांच और दोषियों को सजा
परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने अपने बेटे की हत्या के मामले में CBI जांच की मांग की है। परिवार ने यह भी मांग की है कि पोस्टमार्टम चंडीगढ़ स्थित PGIMER में विशेषज्ञ डॉक्टरों के पैनल से कराया जाए। परिवार ने न्याय मिलने तक अंतिम संस्कार नहीं करने की बात भी कही है।
परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पुलिस महानिदेशक गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। वहीं, पंजाब पुलिस ने आश्वासन दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी और यदि किसी अन्य व्यक्ति की साजिश में भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
कांग्रेस, भाजपा और किसान संगठनों का समर्थन
पंजाब बंद को कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का समर्थन मिला। इनमें कांग्रेस, भारतीय जनता पार्टी, शिरोमणि अकाली दल, अकाली दल वारिस पंजाब दे और अन्य अकाली गुट शामिल हैं। संयुक्त किसान मोर्चा, विभिन्न किसान यूनियनों और सरकारी कर्मचारी संगठनों ने भी बंद के समर्थन की घोषणा की।
विपक्षी नेताओं ने झोटा की हत्या को राज्य में नशे की समस्या और कानून-व्यवस्था से जोड़ते हुए सरकार से जवाबदेही की मांग की। किसान संगठनों ने भी नशे के कारोबार के खिलाफ कार्रवाई और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दा बताया।
किन जिलों में दिखा बंद का असर?
15 अक्टूबर को पंजाब के कई हिस्सों में बंद का असर दिखाई दिया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मानसा, अमृतसर, जालंधर, होशियारपुर, फिरोजपुर, बठिंडा और अन्य स्थानों पर बाजारों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में बंद का असर रहा। कई निजी स्कूलों ने एहतियात के तौर पर छुट्टी घोषित की, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ।
अमृतसर में किसान संगठनों ने प्रदर्शन किया और कुछ स्थानों पर मुख्य मार्गों पर धरने लगाए गए। पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई। प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
क्या-क्या खुला रहा?
बंद के दौरान अलग-अलग जिलों में स्थिति अलग रही। कई बाजार बंद रहे, जबकि अस्पताल, एम्बुलेंस और अन्य आपातकालीन सेवाओं को चालू रखने की अपील की गई। सरकारी स्कूलों के बंद होने की कोई राज्यव्यापी घोषणा नहीं बताई गई, हालांकि कई निजी स्कूलों ने स्थानीय परिस्थितियों के कारण छुट्टी रखी।
यात्रियों को सलाह दी गई कि वे बाहर निकलने से पहले स्थानीय प्रशासन और परिवहन सेवाओं की ताजा जानकारी जांच लें, क्योंकि कुछ मार्गों पर प्रदर्शन और यातायात अवरोध की खबरें आईं।
मानसा में पुलिस अधिकारी पर कार्रवाई
झोटा की हत्या के बाद पुलिस की कार्रवाई और पहले की शिकायतों को लेकर भी सवाल उठे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, मानसा सिटी पुलिस स्टेशन-2 की प्रभारी बेअंत कौर को निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने कहा है कि जांच में किसी पुलिस अधिकारी या कर्मचारी की लापरवाही सामने आने पर आगे भी कार्रवाई की जाएगी।
झोटा के परिवार और समर्थकों का आरोप है कि नशे के कारोबार के खिलाफ पहले दी गई शिकायतों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं हुई थी। इन आरोपों की जांच और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का आकलन आधिकारिक जांच के निष्कर्षों के आधार पर किया जाना बाकी है।
सरकार ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री भगवंत मान ने घटना पर दुख जताया और कहा कि दोषियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए पंजाब पुलिस पूरी कार्रवाई करेगी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में हत्या की साजिश में अन्य लोगों की भूमिका सामने आती है, तो उन्हें भी बख्शा नहीं जाएगा। मुख्यमंत्री ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की।
वहीं, विपक्षी दलों ने मामले की CBI जांच और सरकार की जवाबदेही की मांग की है। इस तरह मामला न्यायिक जांच, पुलिस की भूमिका और पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान से जुड़े व्यापक सवालों तक पहुंच गया है।
निष्कर्ष
परविंदर सिंह झोटा की हत्या के विरोध में बुलाया गया पंजाब बंद नशे के कारोबार और कार्यकर्ताओं की सुरक्षा को लेकर राज्य में बढ़ती चिंता को सामने लाता है। परिवार और समर्थक निष्पक्ष जांच तथा न्याय की मांग कर रहे हैं, जबकि पुलिस ने मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी और जांच जारी होने की जानकारी दी है।
अब इस मामले में जांच के निष्कर्ष, परिवार की मांगों पर प्रशासन की प्रतिक्रिया और अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण होगी।