मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच चल रहे विवाद ने राजनीतिक रूप ले लिया है। 24 सितंबर 2026 को लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं और ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देकर 'सरकारी गवाह' (approver) बन जाना चाहिए।
राहुल गांधी ने क्या कहा?
राहुल गांधी ने दावा किया कि वह पिछले कई वर्षों से कथित 'वोट चोरी' का मुद्दा उठा रहे हैं। उन्होंने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में नाम जोड़ने-हटाने की प्रक्रिया पर सवाल उठाए।
उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफा देने और सरकारी गवाह बनने की अपील की। गांधी के मुताबिक ऐसा करना देशहित में होगा। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर भी चुनावी प्रक्रिया को लेकर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि इस मामले की जांच होनी चाहिए। ये राहुल गांधी के राजनीतिक आरोप हैं; इन आरोपों का स्वतंत्र न्यायिक निष्कर्ष इस रिपोर्ट के समय उपलब्ध नहीं है।
विवाद की शुरुआत कहां से हुई?
राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस से एक दिन पहले द इंडियन एक्सप्रेस ने एक जांच रिपोर्ट प्रकाशित की थी। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में SIR और मतदाता सूची से जुड़े कई फैसलों पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट में Form-6 में बदलाव, मतदाता नाम जोड़ने-हटाने और चुनावी डेटा के प्रबंधन जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया।
हालांकि, रिपोर्ट में शामिल दावों और चुनाव आयोग की आधिकारिक स्थिति के बीच अंतर है। चुनाव आयोग की ओर से कहा गया कि अलग-अलग मुद्दों पर राय या सुझाव में अंतर सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा है और SIR समेत उसके फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिए गए हैं।
बीजेपी ने क्या जवाब दिया?
राहुल गांधी के आरोपों के जवाब में बीजेपी प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने सवाल उठाया कि इन दावों का आधार क्या है। उन्होंने कहा कि जिस मीडिया रिपोर्ट को आधार बनाया जा रहा है, उसमें संबंधित चुनाव आयुक्तों का प्रत्यक्ष या ऑफ-द-रिकॉर्ड बयान नहीं है।
त्रिवेदी ने यह भी पूछा कि क्या कोई ऐसी रिपोर्ट या आधिकारिक रिकॉर्ड है, जिसमें यह साबित होता हो कि चुनाव आयोग के अंतिम फैसले सर्वसम्मति से नहीं लिए गए। बीजेपी ने चुनाव आयोग की प्रक्रिया को कानूनी रूप से वैध बताया और कहा कि आयोग के फैसले बहुमत/सहमति की निर्धारित प्रक्रिया के तहत होते हैं।
क्या है पूरा विवाद?
विवाद के केंद्र में मुख्य रूप से तीन बातें हैं—
- SIR के दौरान मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया।
- दो चुनाव आयुक्तों द्वारा कथित तौर पर दर्ज की गई आपत्तियां।
- चुनाव आयोग का यह कहना कि अंतिम फैसले सभी आयुक्तों की सहमति से लिए गए।
फिलहाल राहुल गांधी के आरोप, बीजेपी की आपत्तियां और चुनाव आयोग का पक्ष—तीनों अलग-अलग दावे और व्याख्याएं पेश करते हैं। इसलिए कथित चुनावी अनियमितताओं को स्थापित तथ्य के रूप में नहीं, बल्कि जारी राजनीतिक और संस्थागत विवाद के संदर्भ में देखना जरूरी है।