राहुल गांधी ने दोहराई खुली बहस की चुनौती

नई दिल्ली: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुली बहस की चुनौती फिर दोहराई है। 3 नवंबर को सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री किसी भी मंच और जगह का चुनाव कर सकते हैं। दोनों आमने-सामने बैठकर देश के सामने उठ रहे सवालों पर चर्चा करें।

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि विपक्ष को देशविरोधी बताने वाले आरोपों के बीच यह स्पष्ट होना चाहिए कि वास्तव में किसके विदेशी ताकतों से संबंध हैं और उन संबंधों की प्रकृति क्या है।

उन्होंने कहा कि बहस में मीडिया और देश के युवाओं को भी शामिल किया जाना चाहिए। राहुल ने यहां तक कहा कि प्रधानमंत्री चाहें तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत को बहस का निर्णायक बना सकते हैं।

किन मुद्दों पर बहस चाहते हैं राहुल गांधी?

राहुल गांधी ने प्रस्तावित बहस के लिए कई मुद्दे गिनाए। इनमें भारत की वित्तीय व्यवस्था, भारत-अमेरिका समझौता, उद्योगपति गौतम अदाणी से जुड़ा मामला और जेफ्री एपस्टीन प्रकरण शामिल हैं।

उन्होंने भारत-अमेरिका समझौते की प्रक्रिया और उसकी समय-सीमा पर सवाल उठाए। साथ ही पूछा कि इस समझौते को लेकर मंत्रिमंडल को कितनी जानकारी दी गई थी।

राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री से कहा कि यदि उनके आरोपों पर सवाल हैं तो सार्वजनिक बहस के जरिए तथ्यों को सामने लाया जाए। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक दावे हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

निर्मला सीतारमण ने संसद को बताया बहस का मंच

राहुल गांधी की चुनौती पर केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया पर जवाब दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से बहस के लिए जगह पूछने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संसद पहले से ही चर्चा का मंच है और राहुल गांधी स्वयं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं।

सीतारमण ने गृह मंत्री अमित शाह की ओर से SIR और EVM के मुद्दों पर विशेष संसद सत्र में चर्चा की पेशकश का उल्लेख किया। उन्होंने सवाल किया कि सोशल मीडिया पर चुनौती देने जैसा उत्साह राहुल गांधी संसद में बहस के दौरान क्यों नहीं दिखाते?

वित्त मंत्री ने कहा कि केवल जवाब मांगना पर्याप्त नहीं है, बल्कि जवाब सुनने की जिम्मेदारी भी निभानी चाहिए। उन्होंने राहुल गांधी से विशिष्ट आरोप और उनके समर्थन में तथ्य प्रस्तुत करने को कहा।

अमित शाह की चुनौती का भी किया जिक्र

निर्मला सीतारमण ने अपने जवाब में गृह मंत्री अमित शाह की उस पेशकश का हवाला दिया, जिसमें SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और EVM पर चर्चा के लिए विशेष संसद सत्र बुलाने की बात कही गई थी।

सरकार की ओर से यह तर्क दिया जा रहा है कि इन मुद्दों पर चर्चा के लिए संसद उपयुक्त मंच है। वहीं, राहुल गांधी प्रधानमंत्री के साथ अलग सार्वजनिक बहस चाहते हैं।

पीयूष गोयल ने भी साधा निशाना

केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने भी राहुल गांधी पर तंज कसा। उन्होंने सोशल मीडिया पर वीडियो साझा करते हुए कहा कि राहुल गांधी 2014 से खुद से ही बहस कर रहे हैं।

इस तरह राहुल गांधी की चुनौती के बाद भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कांग्रेस और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है।

क्या प्रधानमंत्री स्वीकार करेंगे चुनौती?

फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से इस प्रस्तावित सार्वजनिक बहस को स्वीकार करने की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। विवाद का मुख्य मुद्दा यह है कि चर्चा संसद के भीतर होनी चाहिए या प्रधानमंत्री और विपक्ष के नेता के बीच अलग सार्वजनिक मंच पर।

आने वाले दिनों में संसद की कार्यवाही और राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं से इस मुद्दे पर आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकती है।