कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने 24 सितंबर 2026 को चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर प्रेस कॉन्फ्रेंस की। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस ऐसे समय हुई है जब द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में चुनाव आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार आपत्तियां दर्ज की थीं।

प्रोजेक्टर पर अमित शाह का वीडियो दिखाया

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान राहुल गांधी की टीम ने प्रोजेक्टर के जरिए गृह मंत्री अमित शाह से जुड़ा वीडियो भी दिखाया। इसका इस्तेमाल चुनाव आयोग, मतदाता सूची और चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस के सवालों को सामने रखने के लिए किया गया।

राहुल गांधी इससे पहले भी चुनाव आयोग पर मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर आरोप लगाते रहे हैं। 23 सितंबर को उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा था कि उनके अनुसार “वोट चोरी” भारतीय मतदाताओं और संविधान के खिलाफ है।

चुनाव आयोग में कथित मतभेद का मुद्दा

ताजा विवाद की शुरुआत उस रिपोर्ट से हुई जिसमें दावा किया गया कि दो चुनाव आयुक्तों ने Form 6 में बदलाव, मतदाताओं के नाम हटाने और बहाल करने की प्रक्रिया, ERONet सिस्टम के केंद्रीकरण और मतदाता डेटा की सुरक्षा जैसे मुद्दों पर आपत्तियां दर्ज की थीं।

विपक्षी दलों ने इस रिपोर्ट के आधार पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं और निष्पक्ष जांच की मांग की है। कांग्रेस समेत कई विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया रोकने और चुनाव आयोग के कामकाज की जांच कराने की मांग भी की है।

चुनाव आयोग का क्या कहना है?

चुनाव आयोग ने कथित “बंटवारे” या अंतिम निर्णयों में असहमति की बात से इनकार किया है। आयोग के अनुसार, SIR समेत उसके सभी अंतिम फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

आयोग का कहना है कि किसी बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में आंतरिक नोट्स, टिप्पणियां, तकनीकी सुझाव और आपत्तियां संस्थागत विचार-विमर्श का हिस्सा हो सकती हैं।

BJP ने भी कांग्रेस पर उठाए सवाल

इस विवाद के बीच BJP ने राहुल गांधी और विपक्ष के आरोपों को खारिज किया है। BJP की ओर से कहा गया कि आयोग के भीतर अलग-अलग मुद्दों पर चर्चा या आपत्ति दर्ज होना लोकतांत्रिक संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है और अंतिम निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए हैं। पार्टी ने विपक्ष के SIR और मतदाता सूची से जुड़े रुख पर भी सवाल उठाए।

विवाद अब राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तर पर

चुनाव आयोग के कामकाज को लेकर यह विवाद अब राजनीतिक बहस के साथ-साथ कानूनी सवालों से भी जुड़ गया है। विपक्षी दल सुप्रीम कोर्ट से मामले की जांच और SIR प्रक्रिया पर हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपने फैसलों को वैध और सर्वसम्मत बता रहा है।

फिलहाल राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए राजनीतिक आरोप और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष दो अलग-अलग दावे हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि या अंतिम कानूनी निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है।