ट्रेन टिकट के PNR नंबर में बड़ा बदलाव

अगर आप ट्रेन से सफर करते हैं और आने वाले दिनों में आपके टिकट पर PNR नंबर पहले से अलग दिखाई दे, तो घबराने की जरूरत नहीं है। भारतीय रेलवे ने अपने करीब चार दशक पुराने Passenger Reservation System (PRS) को नए सिस्टम में अपग्रेड करने के साथ PNR की शुरुआती नंबर सीरीज में बदलाव शुरू कर दिया है।

रेलवे की नई व्यवस्था में 10 अंकों वाला PNR नंबर बना रहेगा, लेकिन उसके शुरुआती अंकों की पुरानी व्यवस्था बदली जा रही है। रिपोर्ट के मुताबिक, नई PNR सीरीज में नंबर 1, 3, 5 या 7 से शुरू हो सकते हैं।

कब से लागू होगा नया PNR सिस्टम?

रेलवे ने नई PNR सीरीज को चरणबद्ध तरीके से लागू करना शुरू कर दिया है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत कुछ ट्रेनों में नए सीरीज वाले PNR जारी किए जा रहे हैं।

रिपोर्टों के मुताबिक, दिसंबर 2026 के तीसरे सप्ताह तक देश की सभी ट्रेनों में नई PNR व्यवस्था लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी आने वाले महीनों में यात्रियों को अलग-अलग ट्रेनों के टिकट पर नई सीरीज दिखाई देने लगेगी।

अभी PNR नंबर कैसे तय होते हैं?

1986 में कंप्यूटरीकृत रेलवे रिजर्वेशन सिस्टम शुरू होने के बाद PNR की शुरुआत में इस्तेमाल होने वाले अंकों का संबंध रेलवे के अलग-अलग डेटाबेस सेंटर से रहा है।

पुरानी व्यवस्था में:

  1. दिल्ली से जुड़े PNR आमतौर पर 2 से शुरू होते थे।
  2. कोलकाता से जुड़े PNR 6 से शुरू होते थे।
  3. मुंबई से जुड़े PNR 8 से शुरू होते थे।
  4. चेन्नई से जुड़े PNR 4 से शुरू होते थे।

नई व्यवस्था में इस क्षेत्रीय/डेटाबेस सेंटर आधारित शुरुआती सीरीज को बदला जा रहा है।

आखिर रेलवे ने PNR सीरीज क्यों बदली?

इस बदलाव की बड़ी वजह रेलवे के Next Generation Passenger Reservation System में माइग्रेशन है। रेलवे ने अपने लगभग 40 साल पुराने रिजर्वेशन सिस्टम को आधुनिक तकनीक के साथ अपग्रेड किया है।

नए सिस्टम का उद्देश्य ज्यादा संख्या में टिकट बुकिंग को संभालना, सिस्टम की क्षमता बढ़ाना और यात्रियों को तेज तथा ज्यादा भरोसेमंद रिजर्वेशन सुविधा देना है। रेलवे के मुताबिक, नया PRS क्लाउड-आधारित तकनीक की दिशा में भी अपग्रेड किया जा रहा है।

क्या PNR के 10 अंक भी बदल जाएंगे?

नहीं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक बदलाव PNR की सीरीज/शुरुआती अंकों में है। PNR की 10 अंकों वाली पहचान को खत्म करने की बात नहीं है।

इसलिए अगर किसी यात्री को नया PNR 1, 3, 5 या 7 से शुरू होता हुआ मिले, तो यह रेलवे की नई व्यवस्था का हिस्सा होगा और इसे देखकर किसी तरह के साइबर फ्रॉड की आशंका नहीं करनी चाहिए।

पुराने टिकट का क्या होगा?

पुराने सिस्टम से पहले से बुक किए गए टिकट सामान्य रूप से यात्रा के लिए मान्य रहेंगे। केवल PNR सीरीज बदलने की वजह से पुराने टिकट को रद्द करने की जरूरत नहीं है।

हालांकि, रिपोर्टों में एक महत्वपूर्ण स्थिति का उल्लेख किया गया है। यदि पुरानी व्यवस्था के तहत बुक किए गए टिकट में यात्रा की तारीख बदलने जैसी प्रक्रिया नए सिस्टम में करनी हो, तो कुछ मामलों में टिकट को कैंसिल करके नए सिरे से बुक करना पड़ सकता है। यात्रियों को ऐसी स्थिति में अपने टिकट के नियम और रेलवे की लागू प्रक्रिया जरूर जांचनी चाहिए।

नए सिस्टम से यात्रियों को क्या फायदा होगा?

रेलवे के नए PRS का उद्देश्य सिर्फ PNR नंबर बदलना नहीं है। पूरा रिजर्वेशन सिस्टम ज्यादा क्षमता और बेहतर तकनीक के साथ तैयार किया जा रहा है।

नए सिस्टम से टिकट बुकिंग की क्षमता बढ़ने, सीट की उपलब्धता और किराए की जानकारी तेजी से मिलने तथा रिजर्वेशन प्रक्रिया को ज्यादा सुचारू बनाने की उम्मीद है। रेलवे के अनुसार, वर्तमान PRS रोजाना लाखों यात्रियों की आरक्षण जरूरतों को संभालता है और नए सिस्टम को बढ़ती डिजिटल मांग के हिसाब से तैयार किया गया है।

चार दशक बाद रेलवे का बड़ा तकनीकी बदलाव

भारतीय रेलवे का कंप्यूटरीकृत Passenger Reservation System वर्ष 1986 में शुरू हुआ था। इसके बाद समय-समय पर इसमें कई छोटे-बड़े तकनीकी बदलाव किए गए, लेकिन अब रेलवे ने पूरे सिस्टम को बड़े स्तर पर आधुनिक बनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

इसलिए आने वाले समय में टिकट पर PNR का शुरुआती नंबर बदला हुआ दिखना रेलवे के इसी तकनीकी अपग्रेड का हिस्सा होगा। दिसंबर 2026 तक नई व्यवस्था के देशभर में लागू होने के बाद सभी ट्रेनों के रिजर्व टिकटों पर नई PNR सीरीज दिखाई देने की उम्मीद है।