राजस्थान पर सूखे का बड़ा संकट

राजस्थान में कमजोर मानसून ने आने वाले महीनों के लिए चिंता बढ़ा दी है। शुरुआती आकलन में जहां 11 से ज्यादा जिलों में सूखे जैसे हालात सामने आए थे, वहीं ताजा रिपोर्टों के मुताबिक संकट का दायरा करीब 16 जिलों तक पहुंच गया है। इन इलाकों में पेयजल, चारे और रोजगार की समस्या गंभीर होने लगी है।

पाली, जैसलमेर और जालोर सबसे ज्यादा प्रभावित

मानसून सीजन के दौरान राजस्थान में बारिश सामान्य से काफी कम रही। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार राज्य में 350.49 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 424.71 मिमी होती है। यानी कुल बारिश में करीब 17.33 फीसदी की कमी रही।

जिलों में पाली में करीब 58.44 फीसदी, जैसलमेर में 54.17 फीसदी और जालोर में 50.26 फीसदी बारिश की कमी दर्ज की गई। ये आंकड़े इन क्षेत्रों में गंभीर जल संकट की ओर संकेत करते हैं।

16,400 गांवों में पानी-चारे का संकट

अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य के करीब 16,400 गांवों और 52 शहरों में पेयजल, चारे और रोजगार से जुड़ी समस्या सामने आई है। पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में सामान्य बारिश के मुकाबले बेहद कम वर्षा दर्ज की गई है।

रिपोर्ट में बाड़मेर, जोधपुर, नागौर, जयपुर, बालोतरा, जालोर, अजमेर, पाली, फलोदी, जैसलमेर, चूरू, बीकानेर, ब्यावर और सिरोही समेत कई जिलों के प्रभावित गांवों का उल्लेख किया गया है।

क्या सच में चलेगी पानी की ट्रेन?

शुरुआती सर्वे के आधार पर मीडिया रिपोर्टों में आशंका जताई गई है कि अगली गर्मियों में 2-3 जिलों में पानी की ट्रेन चलाने की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, इसे अभी अंतिम निर्णय नहीं माना जा सकता। सूखा प्रभावित जिलों और तहसीलों की आधिकारिक सूची तथा आगे की राहत व्यवस्था विस्तृत सर्वे और सरकारी आकलन के बाद स्पष्ट होगी।

राजस्थान में पहले भी गंभीर जल संकट के दौरान वाटर ट्रेन का इस्तेमाल किया जा चुका है। इसलिए मौजूदा परिस्थितियों में प्रशासन वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था पर भी काम कर रहा है।

सरकार ने शुरू की राहत की तैयारी

सूखे जैसे हालात से निपटने के लिए राजस्थान सरकार ने विशेष एक्शन प्लान तैयार करना शुरू कर दिया है। रिपोर्ट के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों में 650 पानी के वाहन और करीब 3,200 श्रमिक लगाए गए हैं। बंद पड़े हैंडपंपों की मरम्मत के लिए भी अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं।

इंदिरा गांधी नहर परियोजना से जुड़े जिलों के लिए अलग जल प्रबंधन योजना तैयार किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।

किसानों पर भी बढ़ी चिंता

कम बारिश का सीधा असर खरीफ फसलों पर पड़ सकता है। बाजरा, मूंग और ग्वार जैसी फसलों को नुकसान की आशंका जताई गई है। पशुपालकों के लिए चारे और पानी की उपलब्धता भी बड़ी चुनौती बन रही है।

अभी अंतिम सूखा घोषणा नहीं

यहां यह समझना जरूरी है कि “10 साल का सबसे बड़ा अकाल” अभी आधिकारिक रूप से घोषित अकाल नहीं है। शुरुआती सर्वे और बारिश के आंकड़ों के आधार पर गंभीर सूखे जैसे हालात का आकलन किया जा रहा है। आधिकारिक रूप से कौन-कौन से जिले और तहसील सूखा प्रभावित घोषित होंगे, यह विस्तृत सरकारी सर्वे और गिरदावरी रिपोर्ट के बाद स्पष्ट होगा।

निष्कर्ष:

राजस्थान में 2026 का कमजोर मानसून जल संकट और कृषि पर दबाव बढ़ा रहा है। पाली, जैसलमेर और जालोर सबसे अधिक प्रभावित जिलों में हैं, जबकि कई अन्य जिलों में भी सूखे जैसे हालात सामने आए हैं। सरकार ने राहत और जल प्रबंधन की तैयारी शुरू कर दी है। आने वाली गर्मियों में कुछ क्षेत्रों के लिए पानी की ट्रेन की जरूरत पड़ सकती है, लेकिन इस संबंध में अंतिम फैसला आगे के सरकारी आकलन पर निर्भर करेगा।