आज जिस वेलुपिल्लई प्रभाकरन को 1991 में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की हत्या की साजिश में LTTE के प्रमुख के तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया, उसी प्रभाकरन के साथ राजीव गांधी की 1987 में हुई मुलाकात का एक दिलचस्प और ऐतिहासिक प्रसंग सामने आता है। प्रकाशित संस्मरणों और रिपोर्टों के अनुसार, राजीव गांधी ने मुलाकात के बाद अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट प्रभाकरन को दे दी थी।
भारतीय वायुसेना के हेलिकॉप्टर से पहुंचा था दिल्ली
जुलाई 1987 में भारत और श्रीलंका के बीच शांति समझौते की बातचीत चल रही थी। समझौते में LTTE की भूमिका महत्वपूर्ण थी और भारत चाहता था कि प्रभाकरन बातचीत में शामिल हो।
प्रभाकरन को भारत लाने के लिए भारतीय वायुसेना के दो हेलिकॉप्टर जाफना भेजे गए थे। उनके साथ तत्कालीन भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हरदीप सिंह पुरी भी गए थे। इसके बाद प्रभाकरन को नई दिल्ली लाया गया, जहां उसे अशोका होटल के कमरा नंबर 518 में ठहराया गया।
उसकी यात्रा और गतिविधियों को काफी गोपनीय रखा गया था। रिपोर्टों के अनुसार, भारतीय अधिकारियों को आशंका थी कि अगर उसकी मौजूदगी का पता चलता तो उसकी सुरक्षा खतरे में पड़ सकती थी।
राजीव गांधी से हुई कई दौर की बातचीत
दिल्ली में प्रभाकरन और भारतीय नेतृत्व के बीच समझौते की शर्तों पर बातचीत हुई। शुरुआत में LTTE प्रमुख कई प्रावधानों को लेकर असहमत था।
प्रभाकरन की आपत्तियों में श्रीलंका के उत्तरी और पूर्वी प्रांतों के प्रस्तावित विलय और जनमत संग्रह जैसे मुद्दे शामिल थे। बातचीत में तत्कालीन तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एम.जी. रामचंद्रन समेत कई लोगों की भूमिका रही। अंततः 28 जुलाई 1987 को प्रभाकरन ने समझौते को स्वीकार करने की सहमति दी, ऐसा बातचीत में मौजूद रहे तत्कालीन अधिकारी रोनेन सेन के हवाले से दिप्रिंट ने रिपोर्ट किया।
राहुल गांधी से मंगवाई बुलेटप्रूफ जैकेट
इस पूरी कहानी का सबसे चर्चित हिस्सा प्रभाकरन की वापसी से ठीक पहले का है।
कई प्रकाशित विवरणों के मुताबिक, राजीव गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी से अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट लाने को कहा। राहुल जैकेट लेकर आए और राजीव गांधी ने वह जैकेट प्रभाकरन को दे दी।
रिपोर्टों में राजीव गांधी के कथित शब्द भी दर्ज हैं—“Take care of yourself.” यानी, “अपना ख्याल रखना।”
इस घटना का उल्लेख पत्रकार एम.आर. नारायण स्वामी की किताब The Rout of Prabhakaran से जुड़े विवरणों और अन्य प्रकाशित रिपोर्टों में भी मिलता है। हालांकि अलग-अलग स्रोत इस घटना के कुछ विवरणों को अलग तरीके से प्रस्तुत करते हैं।
राजीव गांधी को प्रभाकरन पर भरोसा था
बातचीत के दौरान कुछ भारतीय अधिकारियों ने प्रभाकरन पर पूरी तरह भरोसा न करने की सलाह दी थी। एक सुझाव यह भी था कि उसे तब तक भारत में रखा जाए जब तक LTTE हथियार न डाल दे।
प्रकाशित विवरणों के अनुसार, राजीव गांधी ने यह सुझाव नहीं माना और कहा कि प्रभाकरन ने उन्हें अपना वचन दिया है और वह उस पर भरोसा करते हैं।
इसके बाद प्रभाकरन श्रीलंका लौट गया और 29 जुलाई 1987 को भारत-श्रीलंका समझौते पर हस्ताक्षर हुए। समझौते के बाद भारतीय शांति सेना यानी IPKF को श्रीलंका भेजा गया।
चार साल बाद बदला पूरा घटनाक्रम
1987 की उस मुलाकात के लगभग चार साल बाद घटनाक्रम पूरी तरह बदल गया।
21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में राजीव गांधी की आत्मघाती बम हमले में हत्या कर दी गई। भारतीय जांच और न्यायिक कार्यवाही में LTTE को इस हत्या की साजिश के लिए जिम्मेदार ठहराया गया और प्रभाकरन को साजिश का प्रमुख आरोपी माना गया।
यही वजह है कि राजीव गांधी द्वारा प्रभाकरन को बुलेटप्रूफ जैकेट देने का प्रसंग बाद के वर्षों में एक बेहद विडंबनापूर्ण ऐतिहासिक घटना के रूप में याद किया जाता है।
यानी 1987 में जिस व्यक्ति की सुरक्षा के लिए राजीव गांधी ने अपनी बुलेटप्रूफ जैकेट दी थी, उसी LTTE नेतृत्व को बाद में 1991 में राजीव गांधी की हत्या की साजिश के लिए जिम्मेदार ठहराया गया।