नई दिल्ली: इस साल 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन मनाया जाएगा। इस बार राखी का त्योहार कई वजहों से खास बताया जा रहा है। ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार रक्षाबंधन के दिन शतभिषा नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बन रहा है। साथ ही चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। इन ग्रह-नक्षत्र स्थितियों को कुछ ज्योतिषाचार्य करीब 70 साल बाद बनने वाला विशेष संयोग बता रहे हैं। हालांकि, यह 70 साल वाला दावा ज्योतिषीय गणना और मान्यताओं पर आधारित है, इसे खगोलीय तथ्य नहीं माना जाना चाहिए।


70 साल बाद क्यों खास बताया जा रहा है?

28 अगस्त को रक्षाबंधन के साथ शतभिषा नक्षत्र और अतिगंड योग का संयोग बन रहा है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इन योगों को विशेष महत्व दिया जाता है। इसी के साथ चंद्रमा के कुंभ राशि में रहने की स्थिति भी इस दिन को खास बना रही है।


रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण भी

इस बार रक्षाबंधन के दिन ही आंशिक चंद्र ग्रहण भी पड़ रहा है। ग्रहण 28 अगस्त की सुबह भारतीय समय के अनुसार होगा। लेकिन सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।


भारत में नहीं दिखेगा, इसलिए सूतक का असर नहीं

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का सूतक काल आमतौर पर उन स्थानों पर माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है। चूंकि 28 अगस्त का चंद्र ग्रहण भारत से दिखाई नहीं देगा, इसलिए भारत में सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन के धार्मिक अनुष्ठान सामान्य रूप से किए जा सकेंगे।


कब बांधें राखी?

दिल्ली के लिए उपलब्ध पंचांग के अनुसार 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन राखी बांधने का समय सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक बताया गया है। पंचांग के अनुसार भद्रा सूर्योदय से पहले ही समाप्त हो चुकी होगी। स्थानीय शहर के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है।


ग्रहण को लेकर न रहें परेशान

रक्षाबंधन और चंद्र ग्रहण का एक ही दिन पड़ना जरूर चर्चा का विषय है, लेकिन भारत में ग्रहण दिखाई नहीं देने के कारण यहां धार्मिक रूप से इसके असर को लेकर चिंता करने की जरूरत नहीं बताई जा रही है। अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में नियम अलग हो सकते हैं, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त देखना बेहतर रहेगा।