रेवंत रेड्डी के बयान से राजनीतिक विवाद

तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी के भगवान राम और भगवान शिव को लेकर दिए गए बयान पर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है। दिल्ली में सोमवार, 28 सितंबर को एक मीडिया कार्यक्रम में बोलते हुए रेड्डी ने दावा किया कि कांग्रेस उत्तर भारत में अपेक्षाकृत कमजोर और दक्षिण भारत में अधिक सफल इसलिए रही, क्योंकि भाजपा ने भगवान राम को राजनीतिक रूप से अपना लिया है।

रेड्डी ने कहा कि उत्तर भारत में भगवान राम और दक्षिण भारत में भगवान शिव की भक्ति का विशेष महत्व है। उन्होंने अपनी बात रखते हुए कहा, “शिव गरीबों के भगवान हैं, राम अमीरों के भगवान हैं और भाजपा अमीरों की पार्टी है।” यह मुख्यमंत्री का राजनीतिक और धार्मिक प्रतीकों से जुड़ा वक्तव्य था, न कि किसी धार्मिक ग्रंथ का उद्धरण।

'भाजपा ने भगवान राम को हथिया लिया'

कार्यक्रम में रेवंत रेड्डी ने कहा कि भाजपा के नेता सार्वजनिक मंचों पर मुख्य रूप से ‘जय श्री राम’ का नारा लगाते हैं और उन्होंने सवाल किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ‘हर हर महादेव’ क्यों नहीं कहते। उन्होंने खुद को द्रविड़ और शिवभक्त बताते हुए उत्तर भारत के लोगों को आर्य और रामभक्त कहा।

रेड्डी ने यह भी दावा किया कि भाजपा ने भगवान राम को राजनीतिक रूप से अपना प्रतीक बना लिया है। उनके बयान में धार्मिक आस्था, उत्तर-दक्षिण की सांस्कृतिक पहचान और राजनीतिक समर्थन के संबंध को लेकर टिप्पणियां शामिल थीं।

भाजपा नेता बंदी संजय कुमार ने किया पलटवार

रेड्डी के बयान पर केंद्रीय मंत्री और भाजपा नेता बंदी संजय कुमार ने आलोचना की। उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री भगवान राम और भगवान शिव के बीच राजनीतिक विभाजन की रेखा खींच रहे हैं।

बंदी संजय ने कहा कि तेलंगाना में वेमुलावाड़ा का राजराजेश्वर मंदिर ‘दक्षिण काशी’ और भद्राचलम का राम मंदिर ‘दक्षिण अयोध्या’ के रूप में जाना जाता है। उनके अनुसार, मुख्यमंत्री को धार्मिक प्रतीकों को उत्तर और दक्षिण के राजनीतिक विभाजन से नहीं जोड़ना चाहिए।

SIR पर भी बोले मुख्यमंत्री

इसी कार्यक्रम में रेवंत रेड्डी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रक्रिया का इस्तेमाल वोट हटाने और भाजपा को फायदा पहुंचाने के लिए किया जा सकता है। उन्होंने विपक्षी दलों से मिलकर ‘SIR Go Back’ अभियान चलाने की अपील की और इसकी तुलना स्वतंत्रता आंदोलन के ‘Simon Go Back’ नारे से की। ये मुख्यमंत्री के आरोप और राजनीतिक मांगें हैं; इन्हें चुनाव आयोग द्वारा प्रमाणित निष्कर्ष नहीं माना जाना चाहिए।

बयान के बाद धार्मिक प्रतीकों पर राजनीतिक बहस

रेवंत रेड्डी की टिप्पणियों के बाद राजनीतिक बहस का केंद्र भगवान राम और भगवान शिव के नामों का राजनीतिक भाषणों में इस्तेमाल बन गया है। भाजपा ने उनके बयान की आलोचना की है, जबकि मुख्यमंत्री ने इसे उत्तर-दक्षिण की धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान और कांग्रेस की राजनीतिक स्थिति के संदर्भ में रखा।

निष्कर्ष:

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने भाजपा पर भगवान राम को राजनीतिक रूप से अपना प्रतीक बनाने का आरोप लगाते हुए राम को अमीरों और शिव को गरीबों का भगवान बताया। केंद्रीय मंत्री बंदी संजय कुमार ने इस टिप्पणी की आलोचना की। दोनों नेताओं के बयान राजनीतिक बहस का हिस्सा हैं; इन्हें धार्मिक समुदायों की सर्वमान्य मान्यता के रूप में प्रस्तुत करना उचित नहीं होगा।