रूस के साइबेरिया क्षेत्र के इरकुत्स्क में एक लैब कर्मचारी की मौत के बाद गंभीर संक्रमण की आशंका से हड़कंप मच गया है। इरकुत्स्क एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाली 28 वर्षीय कर्मचारी की मौत के बाद करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया है। कई लोगों को अस्पतालों में भर्ती भी कराया गया है।

स्थानीय मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि कर्मचारी दारिया शिपिलोवा 25 सितंबर को लैब में काम करने के दौरान एक ऐसी टेस्ट ट्यूब टूटने के बाद संक्रमण के संपर्क में आई थीं, जिसमें न्यूमोनिक प्लेग का बैक्टीरिया मौजूद था। हालांकि, रूसी स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

कैसे सामने आया मामला?

रिपोर्टों के मुताबिक, लैब कर्मचारी के टेस्ट ट्यूब टूटने की घटना के कुछ दिनों बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। उन्हें गंभीर निमोनिया जैसे लक्षणों के बाद 29 सितंबर को शेलेखोव अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन 1 और 2 अक्टूबर की दरम्यानी रात उनकी मौत हो गई।

197 लोग निगरानी में, 189 अस्पताल में भर्ती

कर्मचारी के संपर्क में आए लोगों की पहचान के बाद करीब 197 लोगों को मेडिकल निगरानी में रखा गया। रिपोर्टों के अनुसार इनमें से 189 लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने एहतियात के तौर पर कई चिकित्सा संस्थानों में प्रतिबंध और क्वारंटाइन जैसी व्यवस्थाएं लागू की हैं।

अब तक निगरानी में रखे गए लोगों में बीमारी के लक्षण सामने आने या टेस्ट पॉजिटिव होने की कोई सार्वजनिक पुष्टि नहीं हुई है। इरकुत्स्क के गवर्नर के अनुसार शुरुआती जांच में निगरानी में रखे गए लोगों के टेस्ट नकारात्मक पाए गए हैं।

क्या सच में न्यूमोनिक प्लेग से हुई मौत?

यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में इसे संभावित न्यूमोनिक प्लेग का मामला बताया जा रहा है, लेकिन रूस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी Rospotrebnadzor ने आधिकारिक रूप से मौत का कारण “अज्ञात कारण वाला निमोनिया” बताया है।

एजेंसी का कहना है कि मरीज के नमूनों की अतिरिक्त जांच की गई, लेकिन उसके काम से जुड़े किसी रोगजनक सूक्ष्मजीव का पता नहीं चला। एजेंसी ने यह भी कहा कि संस्थान में रोगजनक सूक्ष्मजीवों से जुड़ी किसी दुर्घटना की सूचना दर्ज नहीं हुई थी।

प्लेग की आशंका क्यों बढ़ी?

मामला इसलिए गंभीर माना जा रहा है क्योंकि मृतक महिला एक एंटी-प्लेग रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करती थीं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि उन्होंने न्यूमोनिक प्लेग पैदा करने वाले बैक्टीरिया वाली टेस्ट ट्यूब तोड़ दी थी।

हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। इसलिए फिलहाल यह कहना सही नहीं होगा कि टूटी टेस्ट ट्यूब से संक्रमण फैला और उसी के कारण महिला की मौत हुई।

न्यूमोनिक प्लेग कितना खतरनाक है?

न्यूमोनिक प्लेग, Yersinia pestis नामक बैक्टीरिया से होने वाला प्लेग का एक गंभीर रूप है। यह फेफड़ों को प्रभावित करता है और करीबी संपर्क में सांस से निकलने वाली बूंदों के जरिए व्यक्ति से व्यक्ति तक फैल सकता है।

समय पर पहचान और उचित एंटीबायोटिक उपचार मिलने पर इसका इलाज संभव है, लेकिन बिना उपचार के बीमारी तेजी से गंभीर हो सकती है।

अमेरिका भी कर रहा है स्थिति पर नजर

मामले को लेकर अमेरिका ने भी चिंता जताई है। अमेरिकी विदेश विभाग के एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका रूस के इरकुत्स्क क्षेत्र में संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग के मामले की रिपोर्टों से अवगत है और CDC सहित अन्य एजेंसियों के साथ स्थिति पर नजर रख रहा है। साथ ही रूस से मामले की सटीक और पारदर्शी जानकारी जल्द साझा करने की अपील की गई है।

फिलहाल क्या है स्थिति?

फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि रूस में व्यापक प्लेग फैलने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। करीब 197 लोगों को एहतियात के तौर पर निगरानी में रखा गया है और स्वास्थ्य अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।

टेस्ट ट्यूब टूटने, न्यूमोनिक प्लेग से संक्रमण और महिला की मौत के बीच संबंध को लेकर जांच जारी है। जब तक आधिकारिक जांच से इसकी पुष्टि नहीं होती, इसे संदिग्ध न्यूमोनिक प्लेग मामला कहना अधिक उचित होगा।