रियाद/नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। 24 और 25 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली ने कई मिसाइलों को रोका। सऊदी नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि दो बैलिस्टिक मिसाइलों को रोकने के बाद उनके टुकड़े मक्का क्षेत्र, जेद्दा, ताइफ और राबिग के कुछ स्थानों पर गिरे। हूतियों ने मक्का और मदीना को निशाना बनाने के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनके हमलों का लक्ष्य सऊदी तेल प्रतिष्ठान और सैन्य ठिकाने थे।
सऊदी अरब में मिसाइल हमलों की सूचना
सऊदी अरब के अधिकारियों के अनुसार, पश्चिमी क्षेत्रों में मिसाइलों को रोकने के बाद मलबा कई जगह गिरा। इसके अलावा रियाद के ऊपर एक ड्रोन और एक बैलिस्टिक मिसाइल को रोके जाने की भी रिपोर्ट आई। सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने यानबू और ताइफ की ओर दागी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों को नष्ट करने की जानकारी दी।
अल जज़ीरा की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी क्षेत्र की ओर दागी गई कुल 10 बैलिस्टिक मिसाइलों को भी रोके जाने की सूचना दी गई। हालांकि, यह आंकड़ा अलग क्षेत्र और हमलों के विवरण से जुड़ा है; इसे मक्का-मदीना की ओर दागी गई मिसाइलों की संख्या नहीं समझना चाहिए।
मक्का-मदीना पर हमले के आरोपों को हूतियों ने नकारा
मक्का और मदीना इस्लाम के दो सबसे पवित्र शहर हैं। सऊदी अधिकारियों ने कहा कि रोकी गई दो बैलिस्टिक मिसाइलों के टुकड़े मक्का और मदीना क्षेत्रों में गिरे। इसके बाद हूतियों पर पवित्र शहरों को निशाना बनाने के आरोप लगे।
हूती सैन्य प्रवक्ता याह्या सरी ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मक्का और मदीना को निशाना बनाने की बात गलत है। समूह का कहना है कि उसके अभियान सऊदी तेल सुविधाओं, हवाई अड्डों और सैन्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ हैं। फिलहाल, उपलब्ध रिपोर्टों से यह स्वतंत्र रूप से स्थापित नहीं होता कि हूतियों ने जानबूझकर मक्का या मदीना पर हमला किया था।
तेल प्रतिष्ठानों और हवाई अड्डों को निशाना बनाने का दावा
हूती सैन्य प्रवक्ता ने दावा किया कि समूह ने सऊदी अरब में कई रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाया। इनमें रियाद का किंग खालिद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा, यानबू में अरामको से जुड़ी सुविधा, राबिग तेल रिफाइनरी, कच्चे तेल की पंपिंग स्टेशन और ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन शामिल हैं।
हूतियों ने दम्माम और नजरान के हवाई अड्डों तथा खमिस मुशैत के एयरबेस को निशाना बनाने का दावा भी किया। हालांकि, सऊदी अधिकारियों ने इन सभी लक्ष्यों पर हमले के दावों की तत्काल पुष्टि नहीं की। इसलिए यह स्पष्ट नहीं है कि कौन-से ठिकानों को वास्तविक नुकसान पहुंचा और किन हमलों को रोक दिया गया।
भारत ने सऊदी अरब पर हमलों की निंदा की
भारत ने सऊदी अरब की संप्रभुता और नागरिकों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाले हमलों पर चिंता जताई है। विदेश मंत्रालय ने 22 अक्टूबर को सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर लगातार हो रहे हमलों की कड़ी निंदा की थी। मंत्रालय ने दम्माम के किंग फहद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पूर्वी प्रांत में सऊदी अरामको के शायबा तेल क्षेत्र पर 21 अक्टूबर को हुए हमलों का भी उल्लेख किया।
भारत का रुख है कि नागरिकों की जान और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को खतरे में डालने वाली कार्रवाई स्वीकार्य नहीं है। हालांकि, इस बयान को हूतियों के खिलाफ किसी नई भारतीय सैन्य कार्रवाई की घोषणा नहीं समझना चाहिए।
सऊदी अरब में सुरक्षा अलर्ट
हमलों की आशंका के बीच सऊदी नागरिक सुरक्षा एजेंसी ने मक्का, जेद्दा, ताइफ और यानबू सहित पश्चिमी क्षेत्रों में संभावित खतरे को लेकर अलर्ट जारी किया। बाद में एजेंसी ने बताया कि तत्काल खतरा टल गया है। रियाद के हवाई अड्डे पर उड़ानों के संचालन में भी बदलाव की रिपोर्ट सामने आई।
इन घटनाओं के कारण नागरिक उड्डयन, ऊर्जा आपूर्ति और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। तेल प्रतिष्ठानों और परिवहन सुविधाओं पर हमलों के दावे महत्वपूर्ण हैं, लेकिन वास्तविक नुकसान का आकलन आधिकारिक पुष्टि के बाद ही किया जा सकता है।
यमन में भी बढ़ा टकराव
तनाव केवल सऊदी अरब तक सीमित नहीं रहा। यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने आरोप लगाया कि हूतियों ने दक्षिणी बंदरगाह शहर अदन में तटरक्षक बल के ठिकानों पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। सरकार के अनुसार, दो मिसाइलें तटरक्षक मुख्यालय और तीसरी तवही इलाके में स्थित एक इमारत पर गिरी।
हूती प्रवक्ता ने इस घटना का अलग विवरण देते हुए कहा कि उनके बलों ने सऊदी समर्थित सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। दोनों पक्षों के दावों में अंतर है और घटनाओं के सभी विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।
आगे क्या हो सकता है?
सऊदी अरब और हूतियों के बीच लगातार हमलों और जवाबी आरोपों से क्षेत्रीय तनाव बढ़ने का खतरा है। तेल प्रतिष्ठानों, हवाई अड्डों और समुद्री मार्गों की सुरक्षा का असर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार और व्यापार पर भी पड़ सकता है। भारत सहित कई देशों के लिए इस क्षेत्र में स्थिरता महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक रहते और काम करते हैं तथा ऊर्जा आपूर्ति के अहम मार्ग मौजूद हैं।
निष्कर्ष: सऊदी अरब ने मिसाइलों को रोकने और मक्का-मदीना क्षेत्रों में मलबा गिरने की सूचना दी है, जबकि हूतियों ने पवित्र शहरों को निशाना बनाने से इनकार किया है और तेल प्रतिष्ठानों व हवाई अड्डों पर हमलों का दावा किया है। भारत ने सऊदी अरब में नागरिक और ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की है। इस घटनाक्रम में आरोपों और स्वतंत्र रूप से पुष्ट तथ्यों के बीच अंतर करना जरूरी है।
अस्वीकरण: यह समाचार प्रकाशित मीडिया रिपोर्टों और उपलब्ध सरकारी बयानों पर आधारित है। हमलों, लक्ष्यों और नुकसान से संबंधित कुछ दावे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं हुए हैं; स्थिति बदलने पर विवरण में संशोधन संभव है।