हूतियों के खिलाफ सऊदी में बढ़ा तनाव

यमन के हूती आंदोलन और सऊदी अरब के बीच सैन्य तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। इसी बीच सऊदी अरब के ग्रैंड मुफ्ती शेख सालेह बिन फौजान अल-फौजान ने सीमा पर तैनात सैनिकों से हूतियों का मुकाबला करने और जरूरत पड़ने पर देश की रक्षा के लिए अपनी जान तक कुर्बान करने को तैयार रहने की अपील की है। यह संदेश सऊदी सरकारी मीडिया के जरिए सामने आया।

ग्रैंड मुफ्ती ने सैनिकों से अपने कर्तव्य पर डटे रहने, सैन्य कमांडरों के आदेशों का पालन करने और सऊदी क्षेत्र तथा पवित्र स्थलों की रक्षा करने का आह्वान किया। उन्होंने हूती समूह को सत्ता से हटाने और यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का अधिकार बहाल करने को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।

हूतियों के हमले और सऊदी का जवाब

यह अपील ऐसे समय आई है जब हूतियों ने सऊदी अरब की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज करने के दावे किए हैं। सऊदी अधिकारियों के अनुसार हालिया हमलों में छह बैलिस्टिक मिसाइलों को इंटरसेप्ट किया गया। हूतियों ने सऊदी तेल और अन्य रणनीतिक ठिकानों को निशाना बनाने के दावे भी किए हैं, हालांकि कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दूसरी ओर, सऊदी अरब ने भी यमन में हूती ठिकानों के खिलाफ हवाई कार्रवाई की है। इस तरह दोनों पक्षों के बीच तनाव अब केवल बयानबाजी तक सीमित नहीं है।

क्या MBS सीधे जंग में उतरेंगे?

इस घटनाक्रम के बीच सऊदी क्राउन प्रिंस और प्रधानमंत्री मोहम्मद बिन सलमान (MBS) की अगली रणनीति पर नजर है। हाल की रिपोर्टों के मुताबिक, सऊदी ने हूतियों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर अमेरिकी मदद की मांग की थी। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से रिपोर्टों में कहा गया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हूतियों पर अमेरिकी हमले के विकल्प पर विचार किया, लेकिन तत्काल सैन्य कार्रवाई आगे नहीं बढ़ाई।

इसका मतलब यह नहीं है कि MBS ने अभी कोई नया पूर्ण पैमाने का सैन्य अभियान घोषित कर दिया है। फिलहाल सऊदी की ओर से सुरक्षा और सैन्य प्रतिक्रिया जारी है और क्षेत्रीय सहयोग पर भी चर्चा हो रही है।

पाकिस्तान और तुर्की की भूमिका भी अहम

सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की के बीच हाल में हुए मक्का डिफेंस एग्रीमेंट के तहत तीनों देशों ने एक-दूसरे की सुरक्षा को लेकर सहयोग का ढांचा तैयार किया है। सितंबर में सऊदी, पाकिस्तान, तुर्की और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने सऊदी अरब के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन किया और क्षेत्र में सुरक्षित नौवहन पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने बातचीत और कूटनीति को टिकाऊ समाधान का रास्ता बताया।

अब सऊदी, पाकिस्तान और तुर्की के चीफ ऑफ स्टाफ की एक तत्काल बैठक आयोजित करने की तैयारी की जा रही है। इसमें सऊदी अरब को सैन्य समर्थन देने के संभावित तरीकों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि, पाकिस्तान या तुर्की ने हूतियों के खिलाफ सीधे सैन्य अभियान में उतरने की कोई घोषणा नहीं की है।

आगे क्या होगा?

ग्रैंड मुफ्ती का बयान सऊदी नेतृत्व की ओर से सैनिकों के मनोबल और देश की रक्षा पर जोर दिखाता है। वहीं MBS के नेतृत्व वाली सरकार के सामने सैन्य प्रतिक्रिया, क्षेत्रीय सहयोग और व्यापक क्षेत्रीय युद्ध से बचने के बीच संतुलन का सवाल है।

फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर सऊदी अरब द्वारा हूतियों के खिलाफ कार्रवाई जारी है, लेकिन MBS ने किसी नए बड़े जमीनी युद्ध की सार्वजनिक घोषणा नहीं की है। आने वाले दिनों में सऊदी-पाकिस्तान-तुर्की सैन्य वार्ता और हूती हमलों की दिशा इस संकट की अगली तस्वीर तय कर सकती है।