सात विदेशी नागरिकों को विदेश जाने की अनुमति
दिल्ली की राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वैनडाइक और छह यूक्रेनी नागरिकों को एक महीने के लिए अमेरिका और यूक्रेन जाने की अनुमति दी है। अदालत ने उन्हें अपने परिवारों से मिलने के लिए यात्रा की इजाजत दी और पासपोर्ट जारी करने का आदेश दिया।
अदालत के निर्देशों के मुताबिक, सभी सातों को एक महीने की अवधि पूरी होने के बाद भारत लौटना होगा। उन्हें अपने पते और संपर्क विवरण देने तथा जरूरत पड़ने पर जांच में शामिल होने की शर्तों का पालन करना होगा। अदालत ने विदेश यात्रा को संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े अधिकारों के संदर्भ में भी देखा।
मामला क्या है?
NIA ने मार्च 2026 में सात विदेशी नागरिकों को कथित तौर पर भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने मिजोरम के रास्ते बिना वैध यात्रा दस्तावेजों के म्यांमार में प्रवेश किया था। उन पर म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन युद्ध का प्रशिक्षण देने और ड्रोन से जुड़े उपकरणों की आपूर्ति में भूमिका होने का संदेह है।
NIA के मुताबिक, यूरोप से ड्रोन की कई खेप भारत के रास्ते मिजोरम में व्यक्तियों और समूहों तक पहुंचाई गईं। ये जांच एजेंसी के आरोप हैं; मामले में दोष अदालत द्वारा सिद्ध किया जाना बाकी है।
फिर विदेश जाने की अनुमति क्यों मिली?
मामले में कानूनी मोड़ तब आया जब NIA ने 8 सितंबर को दाखिल पहली चार्जशीट में Immigration and Foreigners Act, 2025 के प्रावधान लगाए, लेकिन गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA के तहत आरोप शामिल नहीं किए।
NIA ने अदालत को बताया कि UAPA के तहत जांच जारी है और आगे की जांच के बाद जरूरत पड़ने पर पूरक चार्जशीट दाखिल की जा सकती है। अदालत ने यह भी दर्ज किया कि जांच एजेंसी ने आरोपियों की निकट भविष्य में भारत में भौतिक मौजूदगी को जांच पूरी करने के लिए आवश्यक नहीं बताया।
डिफॉल्ट बेल का क्या मतलब है?
आरोपियों को डिफॉल्ट बेल भी मिली है। आपराधिक प्रक्रिया में निर्धारित समयसीमा के भीतर आवश्यक आरोपपत्र दाखिल न होने पर आरोपी को कानून के तहत डिफॉल्ट बेल का अधिकार मिल सकता है।
इस मामले में अदालत ने पहले कहा था कि NIA की चार्जशीट में फिलहाल केवल इमिग्रेशन कानून से जुड़े आरोप शामिल हैं और UAPA के तहत जांच जारी है। इसी कानूनी स्थिति के आधार पर आरोपियों को डिफॉल्ट बेल का लाभ मिला। इसका अर्थ यह नहीं है कि अदालत ने उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया है या जांच बंद हो गई है।
क्या सभी सातों तिहाड़ जेल में बंद थे?
इस मामले में एक जरूरी तथ्यात्मक स्पष्टता भी है। रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी नागरिक मैथ्यू वैनडाइक तिहाड़ जेल में बंद था, जबकि छह यूक्रेनी नागरिक रोहिणी जेल में रखे गए थे। इसलिए सभी सातों को तिहाड़ में बंद बताना सही नहीं होगा।
फैसले पर सवाल क्यों उठ रहे हैं?
इस आदेश पर बहस के पीछे मुख्य वजह यह है कि मामला शुरुआत में आतंकवादी गतिविधियों की कथित साजिश के आरोपों के साथ दर्ज हुआ था, लेकिन पहली चार्जशीट में UAPA की धाराएं नहीं लगाई गईं। साथ ही, जांच एजेंसी ने साफ किया है कि आतंकवाद से जुड़े पहलुओं की जांच अभी खत्म नहीं हुई है।
ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि जांच जारी रहने के दौरान आरोपियों को विदेश जाने की अनुमति देने से आगे की जांच और उनकी उपलब्धता पर क्या असर पड़ेगा। दूसरी ओर, अदालत ने उनकी विदेश यात्रा को सीमित अवधि, वापसी, संपर्क विवरण देने और जांच में सहयोग जैसी शर्तों से जोड़ा है।
निष्कर्ष:
सात विदेशी नागरिकों को भारत से एक महीने के लिए जाने की अनुमति मिलना मामले का अंतिम निपटारा नहीं है। NIA की UAPA जांच जारी है और एजेंसी आगे पूरक चार्जशीट दाखिल कर सकती है। अदालत के आदेश में यात्रा की अनुमति के साथ भारत लौटने और जांच में सहयोग करने की शर्तें भी रखी गई हैं।