नई दिल्ली: कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी पहली बार अपने जीवन और राजनीतिक सफर को अपने शब्दों में सामने रखने जा रही हैं। उनकी किताब 'Belonging: A Journey of Love' 10 नवंबर 2026 को प्रकाशित होने वाली है। 544 पन्नों की यह किताब उनके बचपन से लेकर भारत के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक नेहरू-गांधी परिवार में उनके प्रवेश और फिर भारतीय राजनीति में उनकी भूमिका तक की कहानी बताएगी।
राजीव गांधी से मुलाकात और शादी की कहानी
किताब में सोनिया गांधी के इटली में शुरुआती जीवन, कैंब्रिज में पढ़ाई के दौरान राजीव गांधी से मुलाकात और फिर उनके साथ विवाह की कहानी शामिल होने की उम्मीद है।
इसके बाद उनका जीवन सीधे नेहरू-गांधी परिवार से जुड़ गया। वह इंदिरा गांधी की बहू बनीं और एक ऐसे परिवार का हिस्सा बनीं, जिसका भारतीय राजनीति पर दशकों तक गहरा प्रभाव रहा।
इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या का दौर
सोनिया गांधी की जिंदगी के सबसे कठिन अध्यायों में इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की हत्या शामिल हैं। किताब में इन घटनाओं और उनके व्यक्तिगत प्रभावों का विवरण सामने आने की उम्मीद है।
राजीव गांधी की हत्या के बाद सोनिया गांधी लंबे समय तक सक्रिय राजनीति से दूर रहीं। बाद में उन्होंने कांग्रेस की कमान संभाली और 1998 में पार्टी अध्यक्ष बनीं।
2004 में प्रधानमंत्री पद ठुकराने का फैसला
किताब का सबसे चर्चित हिस्सा संभवतः 2004 में प्रधानमंत्री पद स्वीकार न करने का उनका फैसला हो सकता है।
UPA की जीत के बाद सोनिया गांधी प्रधानमंत्री पद की सबसे प्रमुख दावेदार थीं, लेकिन उन्होंने यह पद स्वीकार नहीं किया। इसके बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री बने। उनकी किताब इस फैसले के पीछे की व्यक्तिगत सोच और उस समय के राजनीतिक घटनाक्रम पर नया नजरिया दे सकती है।
गांधी परिवार के भीतर की कहानी पर नजर
किताब से यह भी पता चल सकता है कि राजीव गांधी की मृत्यु के बाद परिवार ने राजनीतिक और निजी संकटों का सामना कैसे किया।
राहुल गांधी और प्रियंका गांधी के साथ सोनिया के रिश्ते, परिवार पर हुई त्रासदियों का असर और राजनीति में लौटने का उनका फैसला—ये सभी पहलू पाठकों के लिए खास दिलचस्प हो सकते हैं।
मोदी, RSS और चीन पर भी चर्चा?
किताब के भारतीय प्रकाशन को लेकर हाल में विवाद भी सामने आया है। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि पांडुलिपि के कुछ हिस्सों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, RSS और चीन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा है और संपादन को लेकर मतभेद हुए।
हालांकि, Penguin Random House India ने स्पष्ट किया है कि वह भारत में इस किताब का प्रकाशक नहीं है और उसने इस मामले से जुड़ी कुछ रिपोर्टों में किए गए दावों को खारिज किया है। इसलिए इन कथित अंशों को फिलहाल रिपोर्टों में किए गए दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
क्यों अहम है सोनिया गांधी का संस्मरण?
सोनिया गांधी ने भारतीय राजनीति में करीब तीन दशक बिताए हैं और कांग्रेस की लंबे समय तक अध्यक्ष रहीं। लेकिन सार्वजनिक जीवन में उन्होंने अपने निजी जीवन के बारे में अपेक्षाकृत कम बात की।
इसी वजह से उनकी आत्मकथा को लेकर यह उम्मीद है कि यह नेहरू-गांधी परिवार के अंदरूनी अनुभवों, सत्ता के दौर, व्यक्तिगत त्रासदियों और उनके राजनीतिक फैसलों पर एक प्रत्यक्ष दृष्टिकोण दे सकती है।
हालांकि, किताब के वास्तविक दावे और खुलासे इसके प्रकाशित होने के बाद ही पूरी तरह सामने आएंगे।