अखिलेश यादव के बयान से बढ़ी सियासी हलचल

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव को लेकर समाजवादी पार्टी की रणनीति एक बार फिर चर्चा में है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, "अब हमारी निगाह तीन पर नहीं, चार सौ तीन पर है।" उनके इस बयान को राज्यसभा की तीसरी सीट के बजाय उत्तर प्रदेश विधानसभा की 403 सीटों पर पार्टी का ध्यान केंद्रित करने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, अखिलेश यादव के इस पोस्ट को तीसरे उम्मीदवार को लेकर आधिकारिक वापसी की घोषणा नहीं कहा गया है। इससे पहले सपा की ओर से तीसरे उम्मीदवार को मैदान में उतारने की तैयारी की खबरें सामने आई थीं। सोमवार को सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने भी कहा था कि पार्टी का तीसरा उम्मीदवार मंगलवार को नामांकन दाखिल करेगा।

राज्यसभा चुनाव में सपा के पास कितनी ताकत?

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव होना है। मौजूदा विधानसभा संख्या के आधार पर एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए करीब 37 प्रथम वरीयता वोटों की जरूरत है। सपा के पास अपने सहयोगी कांग्रेस के विधायकों के समर्थन के साथ दो सीटें जीतने के लिए पर्याप्त संख्या बताई जा रही है।

तीसरी सीट के लिए सपा को अतिरिक्त विधायकों के समर्थन की जरूरत होगी। यही वजह है कि तीसरे उम्मीदवार को उतारना पार्टी के लिए महज नामांकन का मामला नहीं, बल्कि वोटों के अतिरिक्त इंतजाम और संभावित क्रॉस-वोटिंग के जोखिम से जुड़ा हुआ है।

सपा ने पहले उतारे हैं दो उम्मीदवार

सपा ने 30 सितंबर को राज्यसभा चुनाव के लिए राम गोपाल यादव और धनराज परिमल नाथवानी को उम्मीदवार बनाया था। दोनों ने अखिलेश यादव की मौजूदगी में नामांकन दाखिल किया था।

राम गोपाल यादव सपा के वरिष्ठ नेता और अखिलेश यादव के चाचा हैं, जबकि धनराज परिमल नाथवानी कॉरपोरेट और खेल प्रशासन से जुड़े रहे हैं। नाथवानी को उम्मीदवार बनाए जाने को सपा की ओर से एक अप्रत्याशित राजनीतिक चयन के तौर पर भी देखा गया।

तीसरे उम्मीदवार को लेकर क्यों बना था सस्पेंस?

सपा की ओर से तीसरा उम्मीदवार उतारने की स्थिति में मुकाबला सीधे बीजेपी के साथ दिलचस्प हो सकता था। सोमवार तक पार्टी के नेताओं की ओर से तीसरे उम्मीदवार के नामांकन के संकेत दिए जा रहे थे और प्रस्तावकों के लिए विधायकों के हस्ताक्षर जुटाने की बात भी सामने आई थी।

ऐसे में अखिलेश यादव का "तीन पर नहीं, 403 पर नजर" वाला बयान महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 403 का सीधा संबंध उत्तर प्रदेश विधानसभा की कुल सीटों से है और 2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर सपा के लिए यह कहीं बड़ा राजनीतिक लक्ष्य है।

क्या सपा तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारेगी?

फिलहाल इसे लेकर अंतिम तस्वीर नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही साफ होगी। उपलब्ध ताजा रिपोर्टों में एक ओर अखिलेश यादव के बयान से तीसरे उम्मीदवार से पीछे हटने के संकेत मिल रहे हैं, वहीं इससे पहले पार्टी नेताओं ने तीसरे उम्मीदवार के नामांकन की तैयारी की बात कही थी।

अगर सपा तीसरा उम्मीदवार नहीं उतारती है, तो पार्टी की रणनीति राज्यसभा में दो सीटों को सुरक्षित करने के साथ-साथ 2027 के विधानसभा चुनाव के लिए संगठन और राजनीतिक समीकरण मजबूत करने पर केंद्रित मानी जाएगी।

2027 पर अखिलेश की नजर?

अखिलेश यादव का "403" वाला बयान राजनीतिक रूप से इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव को लेकर सभी प्रमुख दल अभी से अपनी रणनीति बनाने में जुटे हैं। सपा के लिए राज्यसभा की एक अतिरिक्त सीट की लड़ाई और 403 विधानसभा सीटों की व्यापक चुनावी लड़ाई के बीच संसाधनों और राजनीतिक ऊर्जा का संतुलन अहम हो सकता है।

इसलिए अखिलेश यादव का ताजा संदेश फिलहाल एक राजनीतिक संकेत के रूप में देखा जा रहा है, न कि तीसरे उम्मीदवार को लेकर अंतिम आधिकारिक फैसला। आने वाले घंटों में नामांकन से जुड़ी स्थिति इस सस्पेंस को पूरी तरह खत्म कर सकती है।