अक्टूबर के पहले कारोबारी दिन बाजार में तेज गिरावट

भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को दोपहर के कारोबार के दौरान बिकवाली तेज हो गई। BSE सेंसेक्स एक समय अपने पिछले बंद स्तर 72,480 से 950 अंक से अधिक नीचे फिसलकर करीब 71,527 पर पहुंच गया। NSE निफ्टी भी गिरकर 22,301 के स्तर तक आ गया।

दोपहर के कारोबार में गिरावट और बढ़ी। बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, सेंसेक्स ने इंट्राडे में 71,293 का निचला स्तर छुआ, जबकि निफ्टी 22,217 तक फिसला। ये इंट्राडे स्तर हैं; इन्हें दिन का अंतिम क्लोजिंग आंकड़ा नहीं समझना चाहिए।

मारुति, महिंद्रा और टाटा स्टील समेत बड़े शेयरों में गिरावट

बाजार में आई बिकवाली का असर कई बड़ी कंपनियों के शेयरों पर दिखाई दिया। आजतक की दोपहर 1:34 बजे तक की रिपोर्ट के अनुसार, BSE लार्जकैप शेयरों में गिरावट इस प्रकार रही:

  1. Maruti Suzuki: 4.45%
  2. Mahindra & Mahindra: 4.35%
  3. Tata Steel: 3.70%
  4. ITC: 2.90%
  5. Adani Ports: 2.74%
  6. BEL: 2.70%
  7. Eternal: 2.50%
  8. HUL: 2.45%

मिडकैप शेयरों में Policybazaar करीब 6.50%, UPL 4.07%, Bharat Forge 3% और AU Small Finance Bank 2.80% नीचे कारोबार कर रहे थे। स्मॉलकैप में Sansera और One Source के शेयरों में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। ये आंकड़े संबंधित रिपोर्ट के समय के हैं और कारोबार के दौरान बदल सकते हैं।

ऑटो सेक्टर पर सबसे ज्यादा दबाव

गुरुवार के कारोबार में ऑटो शेयरों में व्यापक कमजोरी रही। आजतक की रिपोर्ट के अनुसार, ऑटो इंडेक्स में 3% से अधिक की गिरावट आई। मारुति और महिंद्रा जैसे प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियों के शेयरों में भी बिकवाली देखी गई।

बाजार गिरने की प्रमुख वजहें

1. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली

विदेशी संस्थागत निवेशकों की निकासी बाजार पर दबाव बनाए हुए है। आजतक के मुताबिक, 30 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब ₹10,000 करोड़ से अधिक की निकासी की।

2. अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी

अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में तेजी से उभरते बाजारों में निवेश का आकर्षण प्रभावित हो सकता है। Reuters ने भी विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड निकासी और ऊंची अमेरिकी यील्ड को भारतीय बाजार में कमजोरी के प्रमुख कारकों में गिना।

3. रुपये की कमजोरी

रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया 95.98 के स्तर तक कमजोर हुआ। मुद्रा बाजार की कमजोरी ने निवेशकों की धारणा पर अतिरिक्त दबाव डाला।

4. ब्याज दरों और कच्चे तेल को लेकर चिंता

बिजनेस स्टैंडर्ड के अनुसार, संभावित ब्याज दर बढ़ोतरी की आशंका, ऊंची तेल कीमतें, बाजार में सीमित तरलता और लंबे वीकेंड से पहले निवेशकों की सतर्कता भी गिरावट के कारणों में शामिल रहे।

निवेशकों की संपत्ति में बड़ी कमी

NDTV Profit की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार के कारोबार में BSE पर सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण लगभग ₹10.39 लाख करोड़ घटा। यह आंकड़ा कारोबार के दौरान दर्ज बाजार मूल्य में बदलाव को दर्शाता है।

आगे बाजार की नजर किन बातों पर रहेगी?

आने वाले सत्रों में निवेशक विदेशी फंडों के प्रवाह, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड, कच्चे तेल की कीमतों, रुपये की चाल और ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर नजर रखेंगे। बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसी भी शेयर में निवेश का फैसला कंपनी के प्रदर्शन, जोखिम क्षमता और निवेश अवधि को ध्यान में रखकर करना चाहिए।

निष्कर्ष:

1 अक्टूबर को सेंसेक्स और निफ्टी में तेज इंट्राडे गिरावट आई। ऑटो, मेटल और अन्य प्रमुख शेयरों में बिकवाली के साथ विदेशी निवेशकों की निकासी, अमेरिकी यील्ड और रुपये की कमजोरी ने बाजार की धारणा को प्रभावित किया। बाजार के इंट्राडे आंकड़े बदलते रहते हैं, इसलिए यहां दिए गए स्तरों को रिपोर्टिंग समय के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।