नई दिल्ली: महंगी चीनी से परेशान आम लोगों के लिए राहत की खबर है। त्योहारी सीजन से पहले चीनी के थोक दाम में करीब 15% तक की गिरावट देखने को मिली है। सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों के बाद बाजार में सप्लाई बढ़ने लगी है और कीमतों पर दबाव कम हुआ है।
तीन दिन में ₹800 प्रति क्विंटल तक सस्ती
रिपोर्ट के मुताबिक, थोक बाजार में पिछले कुछ दिनों में चीनी की कीमत करीब ₹800 प्रति क्विंटल तक कम हुई है। फिलहाल थोक बाजार में चीनी का भाव लगभग ₹62 प्रति किलो बताया जा रहा है। बाजार से जुड़े विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले दिनों में इसमें करीब ₹3 प्रति किलो की और गिरावट आ सकती है।
सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के आयात की दी मंजूरी
कीमतों को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी के शुल्क-मुक्त आयात की अनुमति दी है। यह आयात 31 अक्टूबर 2026 तक किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य घरेलू बाजार में पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध कराना और त्योहारी सीजन में कीमतों को स्थिर रखना है।
जमाखोरी पर भी सरकार की नजर
चीनी की कीमतों में अचानक तेजी के बाद केंद्र सरकार ने मिलों और कारोबारियों के स्टॉक पर निगरानी बढ़ा दी है। सरकार ने चीनी मिलों से बिक्री और स्टॉक का विस्तृत ब्योरा भी मांगा है। इसके अलावा बड़े खरीदारों के लिए स्टॉक लिमिट को लेकर भी सख्त नियम लागू किए गए हैं, ताकि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा न हो।
खुदरा बाजार में अभी राहत सीमित
हालांकि थोक बाजार में कीमतें नीचे आई हैं, लेकिन खुदरा बाजार में चीनी अभी भी करीब ₹63-75 प्रति किलो के आसपास बिक रही है। अलग-अलग शहरों और दुकानों में कीमतों में अंतर देखने को मिल रहा है।
चीनी महंगी क्यों हुई थी?
सरकार के अनुसार हालिया तेजी के लिए सिर्फ एथेनॉल उत्पादन को जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। उत्पादन में कमी, गन्ने की फसल पर मौसम और बीमारी का असर तथा त्योहारी मांग जैसे कई कारण कीमतों में तेजी के पीछे बताए गए हैं।
वहीं, इंडियन शुगर एंड बायो-एनर्जी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (ISMA) का कहना है कि देश में चीनी की कोई वास्तविक कमी नहीं है और बाजार में घबराहट व सट्टेबाजी कम होने के साथ कीमतें सामान्य हो सकती हैं।
त्योहारों से पहले मिल सकती है बड़ी राहत
रक्षाबंधन और आने वाले त्योहारी सीजन में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने वाली है। ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बाजार में पर्याप्त चीनी उपलब्ध रहे और कीमतों में अनावश्यक तेजी न आए।
अगर आयातित चीनी की सप्लाई समय पर बाजार में पहुंचती है और जमाखोरी पर नियंत्रण बना रहता है, तो आने वाले दिनों में चीनी के दाम और नीचे आने की संभावना जताई जा रही है।